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MP News: ईडी ने इंदौर नगर निगम के असिस्टेंट इंजीनियर राठौर और दो अन्य को फर्जी बिल घोटाले में किया गिरफ्तार, 5 जून तक होगी पूछताछ

डिजिटल डेस्क, भोपाल। डायरेक्टरेट ऑफ एनफोर्समेंट (ईडी), इंदौर सब-ज़ोनल ने इंदौर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन में नकली बिल घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग को लेकर तीन मुख्य आरोपियों, अभय सिंह राठौर, मोहम्मद ज़ाकिर और राहुल बडेरा को गिरफ्तार किया है। आरोपियों को ईडी की स्पेशल कोर्ट (पीएमएलए) इंदौर में पेश किया गया। कोर्ट ने जांच के लिए तीनों आरोपियों को 5 जून तक ईडी की कस्टडी में भेज दिया है। ईडी ने इंदौर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के खजाने से नकली बिल, जाली वर्क ऑर्डर, नकली रिकॉर्ड और ऐसे प्रोजेक्ट कामों के ज़रिए धोखाधड़ी से पैसे निकालने से जुड़े प्रकरणों के अलग-अलग प्रोविज़न के तहत पुलिस स्टेशन एमजी रोड, इंदौर में दर्ज कई एफआईआर और उनमें फाइल की गई चार्जशीट के आधार पर जांच शुरू की। ईडी की जांच में पता चला है कि 2018 से 2023 के दौरान, नगर निगम इंदौर में 119.53 करोड़ रुपये के नकली और बोगस बिल जमा किए गए थे। ये बिल ऐसे कामों के थे जो काम बिल्कुल थे ही नहीं। ऐसे नकली और बनावटी बिलों के आधार पर, नगर निगम के खजाने से लगभग 86.54 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई। ईडी ने पीएमएलए -2002 के तहत आगे की जांच से पता चला कि 2018 से पहले, लगभग 6.22 करोड़ रुपये इसी तरह से निकाले गए थे। धोखाधड़ी की कुल रकम लगभग 100 करोड़ रुपये आंकी गई है।
71 करोड़ के नकली बिलों की चल रही जांच
92.76 करोड़, जो पीएमएलए-2002 के तहत अपराध से कमाना पाया गया। ईडी की जांच से पता चला है कि आरोपियों ने नगर निगम में नकली बिल दिए, जिन्हें बाद में उनके कंट्रोल वाली फर्मों को दे दिया गया। जिन फर्मों को काम दिया गया, उन्होंने बदले में कोई काम नहीं किया, जिससे नगर निगम को भारी नुकसान हुआ। ईडी की जांच में यह भी पाया गया कि तत्कालीन असिस्टेंट इंजीनियर नगर निगम अभय सिंह राठौर ही इस घोटाले का मुख्य साजिशकर्ता रहा है। राठौर ने ही नकली वर्क ऑर्डर तैयार किए और उन्हें प्रोसेस करने में अहम भूमिका निभाई। कॉन्ट्रैक्टर मोहम्मद ज़ाकिर और राहुल बडेरा ने अपनी मालिकी वाली और कंट्रोल वाली फर्मों के ज़रिए लगभग 10 लाख रुपये लिए। नगर निगम के खजाने से 71.78 करोड़ रुपये के नकली और बोगस बिल जब्त करने को ईडी ने जांच में शामिल किया है। नकली बिल तैयार करने, जमा करने और प्रोसेस करने और बाद में साजिश में शामिल अलग-अलग लाभार्थियों के बीच धोखाधड़ी की कमाई बांटने में एक्टिव भूमिका अभय राठौर ने ही निभाई।
22 करोड़ की संपत्ति जब्त
पहले ईडी ने तलाशी भी ली थी, जिसमें लगभग 22.04 करोड़ रुपये की नकदी और कीमती सामान जब्त किया गया था। इसके बाद, पीएमएलए के नियमों के तहत 3 जुलाई, 2025 के प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर के ज़रिए लगभग 34 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियाें को प्रोविजनल रूप से अटैच किया गया था। फिलहाल ईडी, अपराध से की गई कमाई का पता लगाने, उससे हासिल की गई अतिरिक्त संपत्तियों की पहचान करने और मनी ट्रेल का पता लगाने की जांच कर रही है।
Created On :   5 Jun 2026 9:40 PM IST













