MP News: नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत मप्र में बढ़ेंगी ड्रोन दीदियां, केंद्र को भेजी 1066 एसएचजी की सूची

नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत मप्र में बढ़ेंगी ड्रोन दीदियां, केंद्र को भेजी 1066 एसएचजी की सूची
कृषि कार्य में लगी युवा महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए केन्द्र सरकार ने नमो ड्रोन दीदी योजना शुरू की गई।

डिजिटल डेस्क, भोपाल। कृषि कार्य में लगी युवा महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए केन्द्र सरकार ने नमो ड्रोन दीदी योजना शुरू की गई। नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत मप्र ने किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग ने चयनित महिला स्वयं सहायता समूहों की सूची केंद्र सरकार को भेजी है। चयनित सूची को केंद्र सरकार की मंजूरी मिलने के बाद ड्रोन कृषि कार्य में उपयोग के लिए दिए जाएंगे। इससे जिलों में ड्रोन दीदियों की संख्या बढेगी। इससे पहले योजना के तहत देशभर में 1500 दीदियों को ड्रोन दिए गए थे, जिसमें 89 मप्र से थी।

विभाग ने 2025 में 241 नाम दिए थे। जिसे बढ़ाकर कुल 1066 कर दिया गया है। वहीं ड्रोन में बैटरी की समस्या को दूर करने के लिए भी उपाय किए जाएंगे। ड्रोनों का उपयोग खेतों में नैनो यूरिया, नैनो डीएपी और कीटनाशकों के छिड़काव के लिए होता है। ड्रोन दीदियां इन ड्रोनों को किसानों को किराए पर देकर अतिरिक्त कमाई कर सकती हैं। अधिकारियों ने बताया कि केंद्र से मंजूरी के बाद टेंडर की प्रक्रिया की जाएगी।

नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (एनएफएल) कंपनियों को देने के लिए चिन्हित किया जाता है। ये ड्रोन की खरीदी करती है। जिसके बाद इसे ड्रोन दीदियों को दिया जाता है। जिसमें सरकार सब्सिडी देती है। ड्रोन की कीमत करीब 10 लाख की होती है। इसमें 80 प्रतिशत की सब्सिडी मिलती है। वहीं 3 प्रतिशत की ब्याज में भी छूट मिलती है। समूह की एक महिला को 15 दिन की ड्रोन पायलट की ट्रेनिंग मिलती है। इसके साथ ही ड्रोन रिपेयरिंग और मेंटेनेंस (मैकेनिक) को लेकर भी जानकारी दी जाती है। ड्रोन से खेतों में बीज, कीटनाशक और दवाई के छिड़काव से समय की बचत होती है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत पंजीकृत किसी स्वयं सहायता समूह के सदस्य को ड्रोन की पात्रता होती है।

ड्रोन में बैटरी क्षमता कम होने से परेशानी

योजना के तहत कृषि कार्यों के लिए दिए जा रहे ड्रोन में सबसे बड़ी परेशानी बैटरी की है। करीब 15 से 20 मिनट तक ही ड्रोन बैटरी चल पाती है। जिसके बाद उसे चार्ज करना जरूरी होता है। कहीं-कहीं बैटरी खराब होने या फिर 5 से 10 मिनट तक ही चलने की शिकायतें आई हैं। खराब होने पर इसे ठीक करने के लिए लगभग 40000-50000 हजार का खर्चा आ जाता है। हालांकि ज्यादा क्षमता वाले ड्रोन की बात भी कही जा रही है। हालांकि बताया गया है कि बैटरी को लेकर आ रही परेशानी को दूर करने के लिए बैटरी की संख्या बढ़ाई जा सकती है। इसके साथ ही खेतों में छिड़काव के लिए कम पैसे मिलने का ईसू सामने आ चुके हैं। वहीं ड्रोन को लाने ले जाने में किसी अन्य की सहायता लेने से भी खर्च बढ़ रहा है।

इनका कहना है

नमो ड्रोन योजना के तहत सूची बनाकर केंद्र को भेजी गई है। एनएफएल कंपनियां ड्रोन की खरीदी करेंगी। ड्रोन में तकनीकी खराबी आ सकती है। समस्या का समाधान निकाला जा रहा। कृषि में नई तकनीक के माध्यम से काम आसान होने के साथ महिलाओं के आय का साधन बढ़ा है। सब्सिडी भी दी जाती है। आगे आने वाले समय में कृषि में तकनीकी का ज्यादा उपयोग होगा। जिससे उत्पादन बढ़ेगा।

पवन सिंह श्याम, संचालक, मप्र कृषि अभियांत्रिकी

Created On :   5 Jun 2026 9:54 PM IST

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