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MP News: रायसेन में तीन मासूम आदिवासी बेटियों की मौत दुर्घटना नहीं प्रशासनिक उदासीनता है - दिग्विजय सिंह

डिजिटल डेस्क, भोपाल। रायसेन जिले के आदिवासी बहुल ग्राम सगौर में तीन नाबालिग आदिवासी बालिकाओं की कुएं में डूबने से मौत पर पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने इस घटना को प्रशासनिक लापरवाही और पेयजल व्यवस्था की विफलता बताया। सिंह ने कहा कि तीन मासूम बेटियों की असमय मृत्यु ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है।
यह केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक उदासीनता का परिणाम है। भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए प्रदेशभर में नल-जल योजनाओं और पेयजल व्यवस्थाओं की व्यापक समीक्षा की जानी चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को पत्र लिखकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
नगर पालिका रायसेन में नेता प्रतिपक्ष प्रभात चावला के नेतृत्व में आए प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि ग्राम सगौर में वर्ष 2022 से नल-जल योजना कागजों में संचालित दिखाई जा रही है, जबकि वास्तविकता में ग्रामीणों को आज भी पेयजल के लिए भटकना पड़ रहा है। गर्मी के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। बताया गया कि नाबालिग बालिकाएं राधा गौंड (14 वर्ष), तनु गौंड (11 वर्ष) और अम्रता गौंड (11 वर्ष) पानी भरने के लिए कुएं पर गई थीं, जहां पैर फिसलने से तीनों बालिकाओं की डूबकर मृत्यु हो गई।
यह घटना क्षेत्र में व्याप्त पेयजल संकट और नल-जल योजनाओं की जमीनी हकीकत को उजागर करती है। सिंह ने कहा कि यह समस्या केवल ग्राम सगौर तक सीमित नहीं है, बल्कि रायसेन जिले के अनेक दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट गंभीर रूप धारण कर चुका है। करोड़ों रुपये खर्च कर संचालित की जा रही नल-जल योजनाओं का लाभ आम लोगों तक नहीं पहुंच रहा है, जिससे ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर पानी की व्यवस्था करनी पड़ रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि इस घटना की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय कर उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हो। पीड़ित परिवारों को राज्य शासन की ओर से आर्थिक सहायता के साथ अन्य आवश्यक सहयोग दिया जाए।
Created On :   5 Jun 2026 9:37 PM IST









