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Jabalpur News: साल भर में 9 बच्चों में ट्रांसप्लांट हुआ बोनमैरो संसाधनों की कमी से वंचित हैं वयस्क मरीज

डिजिटल डेस्क,जबलपुर। नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में स्थापित बोनमैरो ट्रांसप्लांट यूनिट में पहला सफल प्रत्यारोपण हुए अब 1 साल बीत चुका है। इस दौरान इस यूनिट में ब्लड कैंसर, न्यूरो ब्लास्टोमा, सिकलसेल जैसी बीमारियों से पीड़ित अब तक 9 बच्चों का सफल प्रत्यारोपण हो चुका है।
यूनिट शुरू हाेने के साथ ही समय-समय पर संसाधन जुटाए जाते रहे हैं, लेकिन यूनिट में अब तक एक भी वयस्क मरीज का बोनमैरो ट्रांसप्लांट नहीं हो सका है, जिसकी वजह कुछ जरूरी तकनीकी संसाधनों की कमी बताई जा रही है, हालांकि कॉलेज प्रबंधन ने इस दिशा में प्रयास शुरू कर दिए हैं। प्रबंधन द्वारा भोपाल प्रपोजल भेजा गया है। आने वाले समय में ब्लड कैंसर, एप्लास्टिक एनीमिया सहित रक्त विकारों से जुड़ी जानलेवा बीमारियों से जूझ रहे वयस्क मरीजों को भी इस यूनिट में भर्ती कर उपचार मिलेगा।
इंदौर में मिल रहा वयस्काें को उपचार- बता दें कि मेडिकल कॉलेज की बीएमएटी यूनिट प्रदेश की दूसरी बोनमैराे ट्रांसप्लांट यूनिट है, इसके पूर्व इंदौर में करीब 7 वर्ष पूर्व पहली यूनिट शुरू की गई थी। इंदौर में बच्चों के साथ वयस्कों का भी बीएमटी हो रहा है, क्योंकि वहां पर रेडिएशन मशीन आ चुकी है। हालांकि जबलपुर मेडिकल कॉलेज भी मध्यभारत के उन चुनिंदा चिकित्सा संस्थानों में शामिल है जहां पर बोनमैरो ट्रांसप्लांट की सुविधा उपलब्ध है।
निजी स्तर पर 20 से 40 लाख तक का खर्च- जानकारी के अनुसार निजी स्तर पर बोनमैरो ट्रांसप्लांट कराने में जब भाई या बहन बोनमैरो डोनर होते हैं, तो करीब 20 लाख रुपये का खर्च आता है, वहीं माता-पिता के डोनर होने पर यही खर्च 40 लाख रुपयों तक पहुंच जाता है। कुछ मामलों में यह आंकड़ा बढ़ भी सकता है, लेकिन मेडिकल कॉलेज में यह पूरी तरह नि:शुल्क किया जा रहा है।
बोनमैरो ट्रांसप्लांट यूनिट में वयस्कों का भी प्रत्यारोपण हो सके, इसलिए प्रयास शुरू कर दिए हैं। करीब 3 करोड़ की रेडिएशन मशीन से जुड़ा प्रपोजल भोपाल भेजा है।
डॉ. नवनीत सक्सेना, डीन एनएससीबी मेडिकल कॉलेज
एक नजर बीएमटी यूनिट पर
3 वर्ष पूर्व निर्माण की घोषणा
10 करोड़ की लागत से निर्माण
जनवरी 2025 में यूनिट तैयार
10 बिस्तरों वाला आईसीयू वार्ड
रेडिएशन मशीन की आवश्यकता
जानकारी के अनुसार बोनमैरो ट्रांसप्लांट के लिए ब्लड से टी सेल्स हटाने जरूरी हैं, इसके लिए ब्लड को रेडिएट किया जाता है, जिसके लिए रेडिएशन मशीन की आवश्यकता है। इस मशीन की लागत तकरीबन 3 करोड़ बताई जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार ये सुविधाएं अपग्रेड होने का फायदा वयस्कों को तो मिलेगा ही, साथ ही हाई रिस्क बच्चों के मामलों में भी सुविधा होगी। इसके अलावा बच्चों और वयस्कों में हेप्लो पद्धति से होने वाले बोनमैरो ट्रांसप्लांट के लिए नेट टेस्टिंग शुरू किए जाने की भी आवश्यकता है।
Created On :   30 March 2026 6:09 PM IST












