Jabalpur News: पशु पालन विभाग की नाकामी का खामियाजा भुगत रहे घोड़े, अब तक 19 की हो चुकी है मौत

पशु पालन विभाग की नाकामी का खामियाजा भुगत रहे घोड़े, अब तक 19 की हो चुकी है मौत
  • 24 घंटे नजर में फिर भी सामान्य बीमारियों से दम तोड़ रहे, अब पशु प्रेमी फिर इस मामले को उठाएंगे
  • एकदम से क्लाइमेट चेंज होने के कारण और ठीक से उपचार न मिलने के चलते मृत्यु होने की बात अधिक लोग कर रहे हैं।

Jabalpur News: हैदराबाद से लाए गए 57 में से 19 घोड़ों की अब तक मृत्यु हो गई है। 3 माह के अंदर एक के बाद एक दम तोड़ते घोड़ों के आगे पशु पालन विभाग बेबस नजर आ रहा है। जिस घातक ग्लैंडर्स बीमारी की पहले आशंका जताई गई थी वह एक भी घोड़े में नहीं निकली उसके बाद भी घोड़ों की मौत लगातार हो रही है और पूरा माेहकमा हाथ पर हाथ धरे बैठा है। घोड़ों की जांच और उनके उपचार के लिए पशु पालन विभाग ने पूरी टीम झोंक दी है लेकिन कहा जाता है कि इन जानकारों ने पहले कभी घोड़ों का उपचार किया ही नहीं तो घोड़ों को बचाएंगे क्या खाक।

बताया जाता है कि मई माह में पनागर के रैपुरा गांव में सचिन तिवारी नामक व्यक्ति ने हैदराबाद से 57 घोड़े खरीदे थे। उसकी तैयारी थी कि रैपुरा में रेसकोर्स खोलकर घोड़ों की दौड़ के जरिए कमाई की जाए, हालांकि सचिन तिवारी हर बार नई बात बताता था, कभी कहा गया कि वह केवल देखरेख के लिए घोड़ों को लाया तो कभी पता चला कि वह केवल मोहरा है घोड़े किसी बड़े गिरोह के इशारे पर केवल यहां कुछ दिनों के लिए रखे गए थे।

हालांकि मई माह में ही घोड़ों ने दम तोड़ना शुरू कर दिया तो सचिन घबरा गया था और उसने वेटरनरी कॉलेज तथा जिला प्रशासन से सम्पर्क किया। इसके बाद घोड़ों का उपचार शुरू किया गया। इसमें पशुपालन विभाग के साथ ही वेटरनरी यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ चिकित्सकों के साथ ही पुणे के जाने-माने पशु चिकित्सक अनिल लहाणे भी शामिल थे। लगातार जारी उपचार और देखरेख के बाद भी घोड़ों की मृत्यु कभी नहीं रुक पाई और एक-एक करके घोड़ों का मरना जारी है।

पिछले करीब दो सप्ताह में 7 और घोड़ों ने दम तोड़ दिया है जिससे अब तक 19 घोड़ों की मृत्यु हो चुकी है। इस प्रकार अब केवल 38 घोड़े बचे हुए हैं। बताया जाता है कि घोड़ों की जांच के लिए पशु पालन विभाग ने 3 चिकित्सकों की पूरी टीम लगाई हुई थी और एक नोडल अधिकारी को भी जिम्मा सौंपा गया था लेकिन कहा जाता है कि ये चिकित्सक केवल खानापूर्ति कर रहे थे।

लगातार जांच तो कैसे हुईं मौत

अब हर पशु प्रेमी की जुबान पर केवल यही सवाल है कि जब चौबीसों घंटे घोड़ों पर नजर रखी जा रही थी तो फिर उनकी लगातार मौत कैसे हुई। बताया जाता है कि पिछले दिनों मरे घोड़ों में 2 को सेप्टीसीमिया, 2 को पैरालिसिस, 1 को सांस सम्बंधी बीमारी और 1 को पेट में दर्द की शिकायत थी। इन सामान्य बीमारियों के कारण बड़े जतन से रखे गए घोड़ों की मृत्यु हो रही है तो फिर सड़क पर घूम रहे घोड़े ज्यादा सुरक्षित हैं, क्योंकि वे किसी डॉक्टर से इलाज नहीं करा रहे।

उम्र का बहाना बना रहे चिकित्सक

यह भी दावा किया जा रहा था कि बहुत से घोड़ों की उम्र हो चुकी है इसलिए उनकी मृत्यु हो रही है लेकिन जानकारों का कहना है कि जिन भी घोड़ों की मृत्यु हुई उनकी उम्र अभी सामान्य से अधिक नहीं हुई थी। हालांकि एकदम से क्लाइमेट चेंज होने के कारण और ठीक से उपचार न मिलने के चलते मृत्यु होने की बात अधिक लोग कर रहे हैं।

Created On :   30 Aug 2025 5:51 PM IST

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