Jabalpur News: बहुचर्चित ज्योति हत्याकांड में पति समेत तीन की उम्र कैद की सजा रहेगी बरकरार

बहुचर्चित ज्योति हत्याकांड में पति समेत तीन की उम्र कैद की सजा रहेगी बरकरार
सुप्रीम कोर्ट से शहर की बेटी ज्योति को मिला न्याय

डिजिटल डेस्क,जबलपुर। सुप्रीम कोर्ट से जबलपुर की बेटी ज्योति को आखिरकार न्याय मिल गया। सुप्रीम कोर्ट ने कानपुर के बहुचर्चित ज्योति हत्याकांड में बिस्किट कारोबारी पति पीयूष श्यामदासानी, रेनू उर्फ अखिलेश और सोनू की उम्र कैद की सजा बरकरार रखी है। इस मामले में मनीषा माखीजा को इलाहाबाद हाई कोर्ट से मिली दोषमुक्ति को भी यथावत रखा गया है।

प्रकरण के अनुसार जबलपुर निवासी उद्योगपति शंकर नाग्देव की बेटी ज्योति का विवाह 28 नवंबर 2012 को कानपुर निवासी बिस्किट कारोबारी पीयूष श्यामदासानी के साथ हुआ था। 27 जुलाई 2014 को पति ने अपने साथियों के साथ साजिश रचकर ज्योति की हत्या कर दी।

इस मामले में कानपुर सत्र न्यायालय ने 20 अक्टूबर 2022 को पीयूष श्यामदासानी, मनीषा माखीजा, ड्राइवर अवधेश, रेनू उर्फ अखिलेश, सोनू और आशीष कश्यप को उम्र कैद की सजा सुनाई थी। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 29 नवंबर 2024 को पांच दोषियों की सजा बरकरार रखते हुए मनीषा माखीजा को दोषमुक्त कर दिया था।

हाईकोर्ट के आदेश को दी गई थी चुनौती

बताया गया है कि पीयूष, रेनू उर्फ अखिलेश और सोनू ने इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा दी गई उम्र कैद की सजा को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, वहीं शासन की ओर से भी मनीषा की दोषमुक्ति के खिलाफ अपील दायर की गई थी। ड्राइवर अवधेश और आशीष कश्यप की ओर से अपील दायर नहीं की गई थी। सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के निर्णय को यथावत रखा है।

सीईओ अनुपालन रिपोर्ट पेश करें या फिर खुद हाजिर हों

मप्र हाई कोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने नरसिंहपुर जिले के ग्राम गरहा में उप-स्वास्थ्य केन्द्र के सामने सामुदायिक भवन बनाए जाने के मामले में दिए गए स्थगन आदेश की अनुपालन रिपोर्ट पेश नहीं किए जाने पर नाराजगी जताई है।

डिवीजन बेंच ने जिला पंचायत सीईओ को 10 दिन के भीतर अनुपालन रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं, ऐसा नहीं होने पर मूल दस्तावेजों के साथ कोर्ट में हाजिर होना होगा। मामले की अगली सुनवाई 31 जुलाई को होगी। यह जनहित याचिका नरसिंहपुर निवासी अमित पेठिया ने दायर की है। याचिका में अधिवक्ता ब्रजेन्द्र स्वरूप साहू और रविकांत शुक्ला पैरवी कर रहे हैं।

ननि के सहायक आयुक्तों की याचिका हुई खारिज

मप्र हाई कोर्ट के जस्टिस विशाल धगट की एकल पीठ ने जबलपुर नगर निगम के सहायक आयुक्त संभव मनु अयाची और अंकिता जैन की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें वर्ष 2016 से उन्हें वरिष्ठता का लाभ दिए जाने की मांग की गई थी।

एकल पीठ ने अपने आदेश में कहा कि जो अधिकारी 10 साल तक अपने अधिकारों के लिए कोई कदम नहीं उठाते हैं, वे बाद में दूसरों को राहत मिलने के आधार पर काल्पनिक वरिष्ठता की मांग नहीं कर सकते हैं।

सहायक आयुक्तों की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि उन्हें 30 जून 2016 से वरिष्ठता का लाभ मिलना चाहिए। उसी दिन चयन समिति ने उनके नाम की अनुशंसा मेयर-इन-काउंसिल को भेजी थी। सुनवाई के बाद एकल पीठ ने याचिका खारिज कर दी है।

Created On :   22 July 2026 4:23 PM IST

Tags

Next Story