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जबलपुर न्यूज: रादुविवि की पहेली- आखिर बिना दिखाए कुलसचिव ने किस आदेश पर हस्ताक्षर कराए

डिजिटल डेस्क जबलपुर
रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय इन िदनों विवादों का विश्वविद्यालय बना हुआ है। एक दिन पहले ही कुलसचिव ने एक कर्मचारी को सस्पेंड किया और 2 को शोकॉज नोटिस जारी िकया और दूसरे ही दिन खुद उनसे ही एक अन्य मामले में स्पष्टीकरण मांग लिया गया। कुलसचिव पर यह आरोप लगाया गया है िक उन्होने विधि विभाग के दो कर्मचारियों पर दबाव डालकर कोरे कागज पर हस्ताक्षर कराने के प्रयास िकए और जब उन्होने ऐसा नहीं किया तो उनसे कुछ लिखवाया गया।
विवि के कुलगुरू प्रो राजेश कुमार वर्मा द्वारा कुलसचिव डॉ रविशंकर सोनवाल को जारी िकए गए पत्र में उल्लेख किया गया है िक आपके द्वारा 11 सितम्बर को विश्वविद्यालय के विधि प्रकोष्ठ के श्रीकांत गौतम एवं अधिवक्ता अखिलेन्द्र सिंह परिहार से अपने केबिन में एक नस्ती खाली बिना कुछ लिखी पर हस्ताक्षरार्थ प्रस्तुत लिखने को कहा गया। उनके द्वारा लिखने एवं हस्ताक्षर करने से मना करने पर आपके द्वारा दबाव में उनसे द्वारा लिखवाया गया। जबकि जिस पत्र को प्रस्तुत करने का लिखवाया वह संलग्न नहीं था उन्हें दिखाया भी नहीं गया जो आपत्ति जनक है। उक्त नस्ती को अधिवक्ता अखिलेन्द्र सिंह परिहार को मार्क कराया गया। अधिवक्ता अखिलेन्द्र सिंह परिहार को भी आपके द्वारा कुलसचिव कार्यालय बुलवा कर नस्ती के विषय की एवं प्रेषित किये जाने वाले पत्र की बिना जानकारी दिए दबाव में उक्त नस्ती पर हस्ताक्षर कराये गए जो आपत्तिजनक है।
कुलगुरू का अनुमोदन जरूरी-
पत्र में उल्लेख िकया गया है िक अधिवक्ता द्वारा कोई भी नस्ती डॉ अश्विनी जायसवाल राहप्रभारी विधि प्रकोष्ठ को मार्क की जाती है एवं डॉ अश्विनी जायसवाल द्वारा प्रभारी विधि प्रकोष्ठ डॉ ममता राय को मार्क की जाती है। तभी विधि प्रकोष्ठ से सम्बंधित कोई भी प्रक्रिया की कार्यवाही आगे अनुमोदन के लिए प्रस्तावित मानी जाती है। तत्पश्यात कुलसचिव कार्यालय होते हुए अंत में कुलगुरु द्वारा अनुमोदन आवश्यक है अन्यथा प्रक्रिया विधि सम्मत नहीं और अपूर्ण है।
रजिस्टर पर कांट-छांट भी हुई-
पत्र में एक और बेहद गंभीर बात का उल्लेख िकया गया है और वह यह है िक विधि प्रकोष्ठ से आपके द्वारा केस रजिस्टर मंगवाया गया जब वह रजिस्टर विधि विभाग में वापस किया तो 11 सितम्बर में किसी अनाधिकृत व्यक्ति के द्वारा 971 नंबर पर एक प्रविष्टि की गयी है, जिसे फिर पेन से विषय को काटा ,मिटाने की कोशिश भी की गई। जिससे विषय स्पष्ट नहीं हो रहा है। विधि प्रकोष्ठ के कर्मचारियों ने जानकारी दी है कि उनके किसी कर्मचारी द्वारा यह प्रविष्टि नहीं की गए है ।जब यह रजिस्टर कुलसचिव कार्यालय गया था तब प्रविष्टि नहीं थी वहां से वापस मिलने पर देखा कि प्रविष्टि की गयी थी यह गंभीर अनियमितता है। कुलगुरू ने 2 िदनों में स्पष्टीकरण मांगा है। इस मामले में कुलसचिव ने अपना पक्ष फिलहाल नहीं रखा है।
Created On :   22 Sept 2026 9:19 PM IST












