बाल विवाह पर गंभीर: आदिति तटकरे ने कहा - अब शादी के कार्ड पर वर-वधू की जन्मतिथि छापना हो सकता है अनिवार्य

आदिति तटकरे ने कहा -  अब शादी के कार्ड पर वर-वधू की जन्मतिथि छापना हो सकता है अनिवार्य
  • बाल विवाह रोकने की दिशा में महाराष्ट्र सरकार गंभीरता से कर रही है विचार
  • बाल अधिकार आयोग की सिफारिश

Mumbai News. महाराष्ट्र में बाल विवाह पर अंकुश लगाने के लिए राज्य सरकार एक महत्वपूर्ण पहल करने की तैयारी में है। सरकार राजस्थान मॉडल की तर्ज पर विवाह पत्रिकाओं (शादी के निमंत्रण पत्र) में दूल्हा और दुल्हन की जन्मतिथि अनिवार्य रूप से दर्ज करने का प्रस्ताव तैयार कर रही है। इस प्रस्ताव के लागू होने से विवाह के समय वर-वधू की वास्तविक आयु का सत्यापन आसान होगा और नाबालिगों की शादी रोकने में प्रशासन को बड़ी मदद मिलेगी। विधानसभा के प्रश्नकाल के दौरान भाजपा विधायक अतुल भातखलकर द्वारा पूछे गए प्रश्न के जवाब में महिला एवं बाल विकास मंत्री आदिति तटकरे ने सदन में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राजस्थान में इस व्यवस्था को लागू किए जाने के बाद सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं और बाल विवाह रोकने के प्रयासों को मजबूती मिली है। इसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए महाराष्ट्र सरकार भी इस दिशा में गंभीरता से विचार कर रही है।

राजस्थान मॉडल से प्रेरित पहल

मंत्री आदिति ने कहा कि बाल विवाह आज भी समाज के कुछ हिस्सों में एक गंभीर सामाजिक चुनौती बना हुआ है। बाल विवाह के कारण बालिकाओं की शिक्षा बाधित होती है, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है तथा किशोरियों के समग्र विकास पर भी असर पड़ता है। ऐसे में बाल विवाह पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए केवल कानून पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि सामाजिक और प्रशासनिक स्तर पर निगरानी तंत्र को भी मजबूत करना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि राजस्थान में विवाह पत्रिकाओं पर वर-वधू की जन्मतिथि प्रकाशित करने की व्यवस्था ने विवाह से पहले आयु सत्यापन को आसान बनाया है। इसी मॉडल को महाराष्ट्र में लागू करने पर विचार किया जा रहा है।

बाल अधिकार आयोग की सिफारिश

आदिति ने बताया कि महाराष्ट्र राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने भी सरकार को सिफारिश भेजकर विवाह पत्रिकाओं पर दूल्हा और दुल्हन की जन्मतिथि अनिवार्य रूप से मुद्रित करने का सुझाव दिया है। सरकार इस प्रस्ताव के विभिन्न कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं का अध्ययन कर रही है। यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो विवाह आयोजन से जुड़े सभी संबंधित पक्षों की जवाबदेही भी तय की जाएगी। इसके आलावा शादी के कार्ड छापने वाली प्रिंटिंग प्रेस, विवाह समारोह आयोजित करने वाले मंगल कार्यालय, बैंक्वेट हॉल संचालक तथा विवाह प्रबंधन से जुड़े अन्य संस्थानों की जिम्मेदारियां निर्धारित की जा सकती हैं।

राज्य में घटा बाल विवाह का प्रतिशत

मंत्री तटकरे ने बताया कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार वर्ष 2019 से 2021 के बीच देश में बाल विवाह की दर 23.3 प्रतिशत थी, जबकि महाराष्ट्र में यह 21.9 प्रतिशत दर्ज की गई थी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023-24 में किए गए चयनित जिलों के सर्वेक्षण में देश की औसत दर घटकर 20.1 प्रतिशत पर आ गई है। वहीं महाराष्ट्र में बाल विवाह का प्रतिशत कम होकर 19.7 प्रतिशत तक पहुंच गया है। सरकार इसे और तेजी से कम करने के लिए अभियान चला रही है।

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सरकार ने कितने बाल विवाह रोके

• वर्ष 2020-21 में 519 बाल विवाह रुकवाए गए

• वर्ष 2021-22 में 831 बाल विवाह रोके गए

• वर्ष 2022-23 में 930 बाल विवाह रोके गए

• वर्ष 2023-24 में 1,253 बाल विवाह रोके गए

• वर्ष 2024-25 में 1,495 मामलों में कार्रवाई की गई

• चालू वर्ष में अब तक 1,434 बाल विवाह रोके जा चुके हैं।

इन मामलों में दोषियों के खिलाफ आपराधिक मामले भी दर्ज किए गए हैं।

Created On :   24 Jun 2026 10:28 PM IST

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