रेवस-रेड्डी कोस्टल हाईवे परियोजना: बॉम्बे हाई कोर्ट से रत्नागिरी के जयगढ़ क्रीक पर दो-लेन पुल निर्माण का रास्ता साफ, वन भूमि के डायवर्जन और 75 मैंग्रोव पेड़ों को काटने की अनुमति

बॉम्बे हाई कोर्ट से रत्नागिरी के जयगढ़ क्रीक पर दो-लेन पुल निर्माण का रास्ता साफ, वन भूमि के डायवर्जन और 75 मैंग्रोव पेड़ों को काटने की अनुमति
  • अदालत ने महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (एमएसआरडीसी) को मैंग्रोव वन भूमि के डायवर्जन और 75 मैंग्रोव पेड़ों को काटने की दी अनुमति
  • दो-लेन पुल रेवस-रेड्डी कोस्टल हाईवे परियोजना का है हिस्सा
  • परियोजना से महाराष्ट्र-गोवा तटीय मार्ग पर यातायात सुगम बनाना
  • पर्यटन को बढ़ावा देना और कनेक्टिविटी में होगा सुधारना
  • अदालत ने 75 मैंग्रोव पेड़ों कटने के बदले 750 मैंग्रोव पौधे लगाना का दिया निर्देश

Mumbai News. बॉम्बे हाई कोर्ट से महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले के जयगढ़ खाड़ी (क्रीक) पर दो-लेन पुल निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। यह दो-लेन पुल रेवस-रेड्डी कोस्टल हाईवे परियोजना का हिस्सा है। इस परियोजना से महाराष्ट्र-गोवा तटीय मार्ग पर यातायात सुगम बनाना, पर्यटन को बढ़ावा देना और कनेक्टिविटी में सुधार होगा। अदालत ने पुल निर्माण के लिए महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (एमएसआरडीसी) को 750 मैंग्रोव पौधे लगाने समेत कई कड़ी शर्तों के साथ मैंग्रोव वन भूमि के डायवर्जन और 75 मैंग्रोव पेड़ों की कटाने की अनुमति दी है। अदालत ने अक्टूबर से मार्च तक कछुओं के प्रजनन काल में निर्माण कार्य नहीं करने का निर्देश है।

न्यायमूर्ति भारती डांगरे और न्यायमूर्ति मंजूषा देशपांडे की पीठ ने महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (एमएसआरडीसी) की याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि परियोजना सार्वजनिक महत्व की है और इससे तटीय संपर्क, यातायात तथा पर्यटन को लाभ होगा। इतनी बड़ी परियोजना के लिए हर चरण की अलग अनुमति व्यावहारिक रूप से आवश्यक हो सकती है। इसलिए ‘टुकड़ों में अनुमोदन’ को पूरी तरह अवैध नहीं कहा जा सकता है। मैंग्रोव वृक्षारोपण के लिए विशेष पर्यावरणीय परिस्थितियां चाहिए होती हैं। इसलिए पास के क्षेत्र में ही रोपण अनिवार्य नहीं है।

बॉम्बे एनवायरनमेंट एक्शन ग्रुप (बीईएजी) ने परियोजना का विरोध हुए कहा था कि इतनी बड़ी 498 किलो मीटर की परियोजना को टुकड़ों में अनुमति देना गलत है। संपूर्ण पर्यावरणीय प्रभाव का एक साथ मूल्यांकन होना चाहिए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के एम.सी. मेहता बनाम भारत संघ के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि प्रतिपूरक वृक्षारोपण प्रभावित क्षेत्र के पास होना चाहिए।

इसको लेकर पीठ ने कहा कि परियोजना को अनुमति देते समय शर्तें लगाईं है। अक्टूबर से मार्च तक कछुओं के प्रजनन काल में निर्माण कार्य नहीं होगा,शोर रोकने हेतु शोर अवरोध लगाए जाएंगे। स्थानीय मछुआरों की गतिविधि प्रभावित नहीं होगी,समुद्री जल प्रवाह बाधित नहीं होगा। तटीय जैव-विविधता की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। इसके साथ ही एमएसआरडीसी को 0.4479 हेक्टेयर मैंग्रोव भूमि के डायवर्जन और 75 मैंग्रोव पेड़ों को काटने के बदले 750 मैंग्रोव पोड़ों को लगाने का भी निर्देश दिया गया है। याचिकाकर्ता एमएसआरडीसी सभी पर्यावरणीय शर्तों का पालन करेगा।

क्या है पूरा मामला

याचिकाकर्ता एमएसआरडीसी को राज्य में रत्नागिरी जिले के रेवास-रेड्डी तटीय राजमार्ग पर तावसल और संडेलावगन के बीच जयगढ़ खाड़ी (क्रीक) पर एक दो-लेन पुल के निर्माण की जिम्मेदारी दी गई है। राज्य सरकार ने उसे रेवास-रेड्डी कोस्टल हाईवे, महाराष्ट्र स्टेट हाईवे के अपग्रेडेशन और सुधार का काम बैंककोट से रत्नागिरी के जयगढ़ दो लेन में पक्के शोल्डर के साथ कार्य सौंपा है। इस परियोजना से यातायात की भीड़ कम होगी और तटरेखा के समानांतर महाराष्ट्र सीमा से गोवा सीमा तक संपर्क बेहतर होगा। इससे न केवल आवागमन सुगम होगा, बल्कि पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

Created On :   17 May 2026 9:57 PM IST

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