अदालत: हाई कोर्ट ने कहा - अस्थायी कर्मचारी भी अवैध बर्खास्तगी को दे सकते हैं चुनौती, बर्खास्त जूनियर इंजीनियरों की बहाली का निर्देश

  • 16 साल बाद पीएमसी के बर्खास्त जूनियर इंजीनियरों की बहाली का निर्देश
  • अस्थायी कर्मचारी भी अवैध बर्खास्तगी को दे सकते हैं चुनौती

Mumbai News. बॉम्बे हाई कोर्ट ने पुणे महानगरपालिका (पीएमसी) में कार्यरत अस्थायी (कॉन्ट्रैक्ट) कर्मचारियों को लेकर अपने फैसले में कहा कि कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी भी अवैध बर्खास्तगी को चुनौती दे सकते हैं। अदालत ने 16 साल बाद पीएमसी के बर्खास्त जूनियर इंजीनियरों को नौकरी पर बहाल करने का निर्देश दिया। अदालत ने औद्योगिक न्यायालय के 30 जुलाई 2010 के अंतरिम आदेश को रद्द कर दिया है। पीएमसी ने जूनियर इंजीनियरों को 19 मार्च 2011 को बर्खास्त किया था।

न्यायमूर्ति अमित बोरकर की एकल पीठ ने संजय शामराव भोर समेत अन्य जूनियर इंजीनियरों की याचिकाओं को स्वीकार करते हुए कहा कि पीएमसी को कर्मचारियों को हटाने से पहले यह सूचित करना चाहिए था कि नए चयनित उम्मीदवार उनकी जगह आ गए हैं। रिकॉर्ड से यह सिद्ध नहीं हुआ कि कर्मचारियों की जगह नियमों के अनुसार चयनित उम्मीदवार नियुक्त हुए थे। 19 मार्च 2011 को जूनियर इंजीनियरों की बर्खास्तगी अवैध थी। पीठ ने कहा कि पीएमसी को कर्मचारियों को 12 सप्ताह के भीतर पुनर्नियुक्त करना होगा। कर्मचारियों को पूर्ण बकाया वेतन नहीं मिलेगा, बल्कि 25 फीसदी अंतरिम वेतन के आधार पर मुआवजा दिया जाएगा। सेवा की निरंतरता केवल पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभ के लिए मानी जाएगी।

Created On :   17 May 2026 10:08 PM IST

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