प्रभावित लक्ष्य: कैग की रिपोर्ट में दावा - जल जीवन मिशन योजना का लाभ 85 नही 69 फीसदी घरों तक ही पहुंचा

कैग की रिपोर्ट में दावा - जल जीवन मिशन योजना का लाभ 85 नही 69 फीसदी घरों तक ही पहुंचा
  • फंड, योजना और क्रियान्वयन में बड़ी खामियां
  • 75 फीसदी जलापूर्ति योजनाएं अब भी अधूरी
  • हर घर जल प्रमाणन पर भी सवाल

Mumbai News. नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने राज्य में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन में गंभीर खामियों की ओर इशारा किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि योजना, वित्तीय प्रबंधन, जलापूर्ति परियोजनाओं के निष्पादन और आंकड़ों की रिपोर्टिंग में व्यापक कमियां रही हैं, जिससे मिशन के लक्ष्य प्रभावित हुए। कैग ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार ने जल जीवन मिशन के तहत 27.74 लाख निजी या स्वयं के खर्च से लगाए गए नल कनेक्शनों को भी मिशन की उपलब्धि में शामिल कर लिया। जबकि ये कनेक्शन योजना के तहत नहीं दिए गए थे। रिपोर्ट के अनुसार जल जीवन मिशन योजना का लाभ 85 नही 69 फीसदी घरों तक ही पहुंचा है।

शुरुआती योजना में ही मिली बड़ी खामियां

ऑडिट में पाया गया कि जिन जिलों की जांच की गई, उनमें किसी ने भी अनिवार्य बेसलाइन सर्वे नहीं कराया। 24 चयनित गांवों में विलेज एक्शन प्लान तो बनाए गए, लेकिन 13 गांवों में ग्राम पंचायत की मंजूरी के बिना ही योजना तैयार कर ली गई। इसके अलावा जिला कार्य योजनाओं में जल सुरक्षा, वित्तीय योजना, मानव संसाधन, भूमि की उपलब्धता और जल स्रोतों के आकलन जैसे महत्वपूर्ण बिंदु शामिल ही नहीं किए गए। राज्य स्तर पर भी व्यापक स्टेट एक्शन प्लान नहीं बनाया गया।

75 फीसदी जलापूर्ति योजनाएं अब भी अधूरी

रिपोर्ट के अनुसार, 2019 से 2024 के बीच महाराष्ट्र में 51 हजार 560 जलापूर्ति योजनाएं शुरू की गईं, लेकिन इनमें से केवल 12,703 योजनाएं ही पूरी हो सकीं। 38 हजार 857 योजनाएं अब भी निर्माणाधीन हैं। जांच किए गए छह जिलों में स्थिति और खराब रही, जहां केवल 16.57 फीसदी योजनाएं ही पूरी हुईं। कैग ने देरी के लिए भूमि उपलब्ध न होना, वन विभाग की मंजूरी में विलंब, प्रशासनिक स्वीकृतियों में देरी और काम समय पर शुरू न होने को जिम्मेदार बताया।

हर घर जल प्रमाणन पर भी सवाल

रिपोर्ट में 'हर घर जल' प्रमाणन प्रक्रिया में भी अनियमितताएं सामने आईं। राज्य के 40 हजार 297 गांवों में से केवल 10 हजार 677 गांव को ही प्रमाणित किया गया। ऑडिट में पाया गया कि कई गांवों को हर घर जल घोषित कर दिया गया, जबकि सभी घरों तक पानी नहीं पहुंच रहा था। कई मामलों में जियो-टैगिंग में भी गड़बड़ियां मिलीं। कैग के अनुसार 51 हजार 560 योजनाओं में से 13 हजार 835 योजनाओं की लागत बाद में संशोधित करनी पड़ी। परियोजनाओं का दायरा बढ़ने, जल स्रोत बदलने और अतिरिक्त कार्यों के कारण कुल लागत में 9 हजार 608 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हुई। 2019 से 2024 के बीच महाराष्ट्र को 59 हजार 740 करोड़ रुपए मिलने थे, लेकिन केंद्र और राज्य सरकार ने मिलकर केवल 27 हजार 657 करोड़ रुपए ही जारी किए। इस अवधि में 26 हजार 410 करोड़ रुपए खर्च किए गए।

Created On :   10 July 2026 8:07 PM IST

Tags

Next Story