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विधान परिषद: पुणे के उपजिलाधिकारी-तहसीलदार समेत 15 अधिकारी निलंबित, सेस पगड़ी इमारतों के पुनर्विकास का रास्ता साफ

Mumbai News. महाराष्ट्र जमीन राजस्व कानून की धारा -155 का दुरुपयोग करके घोटाला करने वाले पुणे के संबंधित उपजिलाधिकारी, तहसीलदार समेत 15 अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। शुक्रवार को विधान परिषद में प्रदेश के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने यह घोषणा की। सदन में शिवसेना (उद्धव) के विधायक अनिल परब ने अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का मुद्दा उठाया था। इस पर बावनकुले ने कहा कि निलंबित अधिकारियों में से दोषियों के खिलाफ फौजदारी मामला दर्ज किया जाएगा। इसके साथ ही कुछ अधिकारियों को बर्खास्त भी किया जाएगा। बावनकुले ने कहा कि महाराष्ट्र जमीन राजस्व कानून की धारा- 155 के तहत तहसीलदारों को किसानों के सातबारा के नामों में गलती सुधारने यानी शुद्ध लेखन का अधिकार होता है। लेकिन इसका दुरुपयोग अधिकारियों ने किसानों की जमीन का मालिकाना हक बदलकर दूसरों के नाम पर कर दिया है। पुणे समेत राज्य भर में यह घोटाला हुआ है। बावनकुले ने कहा कि जांच समिति ने पुणे विभाग में 424 प्रकरणों को उजागर किया है। जिसमें से अतिगंभीर 13 प्रकरणों में दोषी 15 अधिकारियों और कर्मचारियों को निलंबित करने का फैसला लिया गया है। जबकि गंभीर स्वरूप के 247 प्रकरणों में दोषी अधिकारियों के खिलाफ जांच शुरू है। वहीं 164 प्रकरण में भी जांच करके कार्रवाई की जाएगी। बावनकुले ने कहा कि सभी जिलाधिकारियों को इस मामले में जांच के आदेश दिए गए हैं। दिसंबर के नागपुर के शीतकालीन सत्र में एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) सदन में पेश की जाएगी। उन्होंने कहा कि धाराशिव के तुलजापुर अतिक्रमण मामले की भी जांच की जाएगी।
सेस पगड़ी इमारतों के पुनर्विकास का रास्ता साफ
मुंबई की जर्जर उपकर प्राप्त (सेस) पगड़ी इमारतों के पुनर्विकास का रास्ता साफ हो गया है। सेस की पगड़ी इमारतों को धोखादायक घोषित करने का अधिकार मुंबई इमारत मरम्मत और पुनर्रचना मंडल (एमबीआरआरबी) को मिला है। इमारतों को धोखादायक घोषित करने के लिए म्हाडा के कार्यकारी अभियंता को सक्षम प्राधिकारी नियुक्त किया जाएगा। इससे संबंधित विधेयक विधान परिषद में पारित हुआ है। शुक्रवार को सदन में प्रदेश के कैबिनेट मंत्री शंभुराज देसाई ने महाराष्ट्र गृहनिर्माण व क्षेत्रविकास अधिनियम-1967 में संशोधन विधेयक पेश किया। महाराष्ट्र आवास एवं क्षेत्र विकास प्राधिकरण (म्हाडा) के तहत मुंबई इमारत मरम्मत और पुनर्रचना मंडल काम करता है। विधेयक पर चर्चा के दौरान शिवसेना (उद्धव) के विधायक अनिल परब ने कहा कि सेस की पगड़ी इमारतों को धोकादायक घोषित करने के लिए सक्षम प्राधिकारी कौन है? इसका अधिनियम में कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं था। इस कारण जर्जर हालत में होने के बावजूद सेस की इमारतों का पुनर्विकास नहीं हो पा रहा था। बारिश में जर्जर इमारतों के ढहने से लोगों की मौत हो जाती थी। इस बीच देसाई ने कहा कि सेस की पगड़ी इमारतों के मालिक पुनर्विकास के मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में गए हैं। इस मामले में 20 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। सरकार इस मामले में मजबूती से पक्ष रखा है।
Created On :   10 July 2026 8:43 PM IST
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