विधानसभा में की घोषणा: खाने-पीने के सामानों में मिलावट करने वालों को फांसी की सजा हो, इसे लागू करेगी सरकार

खाने-पीने के सामानों में मिलावट करने वालों को फांसी की सजा हो, इसे लागू करेगी सरकार
  • अन्न एवं औषधि प्रशासन मंत्री नरहरि झिरवाल ने विधानसभा में की घोषणा
  • खाने-पीने के सामानों में मिलावट करने वालों को फांसी की सजा

Mumbai News. विधानमंडल के मानसून सत्र के आखिरी दिन खाद्य पदार्थों में मिलावट का मुद्दा जोरदार ढंग से विधानसभा में उठा। बीड के राकांपा (अजित) विधायक प्रकाश (दादा) सोलंके ने मिलावटखोरों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि लोगों की जान से खिलवाड़ करने वालों को फांसी की सजा दी जानी चाहिए। इस पर जवाब देते हुए खाद्य एवं औषधि प्रशासन मंत्री नरहरी झिरवाल ने स्पष्ट किया कि खाद्य सुरक्षा कानून पहले से ही बेहद सख्त है और गंभीर मामलों में मृत्युदंड तक का प्रावधान मौजूद है। हालांकि मंत्री झिरवाल ने यह भी कहा कि इस मामले में आरोपियों को फांसी की सजा हो, इसका सही तरीके से क्रियान्वयन नहीं हो रहा था। इसलिए अब खाने पीने के सामानों में मिलावट करने वालों को एक लाख जुर्माने से लेकर फांसी की सजा हो इसको सरकार लागू करेगी।

सदन में चर्चा के दौरान विधायक सोलंके ने कहा कि मिलावटी खाद्य पदार्थों के कारण लोगों की जान खतरे में पड़ती है। ऐसे अपराधियों के लिए सामान्य सजा पर्याप्त नहीं है और उन्हें फांसी जैसी कठोर सजा मिलनी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी इस तरह का अपराध करने की हिम्मत न करे। सरकार को मिलावटखोरों को फांसी की सजा देनी चाहिए। इस पर मंत्री झिरवाल ने कहा कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत कानून पहले से ही काफी कड़ा है, लेकिन उसका प्रभावी क्रियान्वयन आवश्यक है। उन्होंने कहा कि एफडीए के नियम 27 (सी) के अनुसार गंभीर मामलों में एक लाख रुपए तक के जुर्माने से लेकर दोषियों को मृत्युदंड तक की सजा का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि खाद्य एवं औषधि प्रशासन इसे लागू करेगा। यानि की मिलावट के मामलों में यदि पीड़ित व्यक्ति की मौत हो जाती है तो उसे अधिकतम फांसी की सजा हो सकेगी। मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार मिलावटखोरों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है और जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

विधायक प्रकाश सोलंके ने जालना जिले में स्थित एम. मुंडडा इंडस्ट्रीज में खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) की छापेमारी का मामला उठाया। उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या जांच में यह सामने आया है कि शुद्ध घी के नाम पर स्वास्थ्य के लिए हानिकारक रासायनिक फ्लेवर एसेंस मिलाकर नकली घी तैयार किया जा रहा था और दोषियों पर क्या कार्रवाई की गई है। जवाब में मंत्री झिरवाल ने बताया कि 3 जून 2026 को एफडीए की टीम ने संबंधित फैक्ट्री पर छापा मारा था। जांच के दौरान घी में फ्लेवर एसेंस मिलाकर नकली घी तैयार किए जाने के संकेत मिले। मौके से घी, रिफाइंड सोयाबीन तेल और फ्लेवर एसेंस सहित बड़ी मात्रा में सामग्री जब्त की गई तथा खाद्य पदार्थों के नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए, जिनमें मिलावट की पुष्टि हुई है। झिरवाल ने कंपनी को बंद करने और कंपनी के मालिक को गिरफ्तार करने के आदेश दिए हैं।

Created On :   10 July 2026 7:40 PM IST

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