बॉम्बे हाई कोर्ट: सरकारी अस्पतालों या संस्थानों में कार्यरत संविदा कर्मचारी भी सरकार की सेवा में माने जाएंगे

सरकारी अस्पतालों या संस्थानों में कार्यरत संविदा कर्मचारी भी सरकार की सेवा में माने जाएंगे
  • अदालत ने कहा-सरकारी अस्पतालों में कार्यरत संविदा डेंटल सर्जन भी आयु-सीमा से छूट पाने के पात्र हैं
  • अदालत से राज्य में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत वर्षों से संविदा के आधार पर कार्यरत डेंटल सर्जनों को मिली बड़ी राहत

Mumbai News. बॉम्बे हाई कोर्ट से राज्य में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत वर्षों से संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) के आधार पर कार्यरत डेंटल सर्जनों को नियमित नियुक्ति के लिए अधिकतम आयु सीमा में छूट को लेकर बड़ी राहत मिली है। अदालत ने कहा कि संविदा कर्मचारी भी सरकार की सेवा में माने जाएंगे, यदि वे सरकारी अस्पतालों या संस्थानों में कार्य कर रहे हैं। अदालत ने महाराष्ट्र प्रशासनिक न्यायाधिकरण (एमएटी) के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें योग्य उम्मीदवारों के नाम नियुक्ति के लिए भेजने का निर्देश दिया गया था।

न्यायमूर्ति सुमन श्याम और न्यायमूर्ति रणजीत सिंह राजा भोंसले की पीठ ने महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) की याचिका खारिज करते हुए अपने फैसले में कहा कि एनएचएम के तहत सरकारी संस्थानों में कार्यरत संविदा कर्मचारी भी "सरकार की सेवा’ में माने जा सकते हैं। इसलिए उन्हें केवल संविदा कर्मचारी होने के आधार पर आयु-सीमा की छूट से वंचित नहीं किया जा सकता है। भर्ती नियमों में यह कहीं नहीं लिखा है कि आयु-सीमा की छूट केवल स्थायी सरकारी कर्मचारियों को ही मिलेगी। इसलिए एनएचएम के अंतर्गत सरकारी अस्पतालों में कार्यरत संविदा डेंटल सर्जन भी आयु-सीमा से छूट पाने के पात्र हैं। करने का निर्देश दिया गया।

पीठ ने कहा कि वर्ष 2024 की महाराष्ट्र सरकार की सरकारी संकल्प (जीआर) से भी यह स्पष्ट होता है कि 10 वर्ष या उससे अधिक सेवा देने वाले एनएचएम कर्मचारियों को आयु-सीमा में छूट देने की नीति सरकार ने अपनाई है। एमपीएससी ने केवल आयु के आधार पर उम्मीदवारों को अयोग्य घोषित करके पहले के हाई कोर्ट के आदेश की भावना का उल्लंघन किया। पीठ ने कहा कि एमपीएससी और महाराष्ट्र सरकार को 6 सप्ताह के भीतर आदेश का पालन कर नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी करे।

क्या है पूरा मामला

वर्ष 2015 में महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) ने 189 डेंटल सर्जन पदों के लिए भर्ती निकाली। विज्ञापन में सामान्य वर्ग के लिए अधिकतम आयु 35 वर्ष तथा आरक्षित वर्ग के लिए 40 वर्ष निर्धारित थी। याचिकाकर्ता डॉक्टर एनएचएम के तहत सरकारी अस्पतालों में कई वर्षों से संविदा पर कार्यरत थे। एमपीएससी ने बाद में यह कहते हुए उनके नाम नियुक्ति के लिए नहीं भेजे कि वे आयु सीमा से अधिक हो चुके थे। संविदा डॉक्टरों ने एमपीएससी के फैसले के खिलाफ न्यायाधिकरण का दरवाजा खटखटाया। न्यायाधिकरण ने डॉक्टरों के पक्ष में फैसला सुनाया, जिसे एमपीएससी ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। डॉ. जगदीश आनंदराव भालेराव और डॉ. भरत लाड समेत अन्य डाक्टरों ने हस्तक्षेप याचिकाएं दायर की थी।

Created On :   10 July 2026 8:25 PM IST

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