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बॉम्बे हाई कोर्ट: 2006 के मालेगांव विस्फोट मामले में चार आरोपियों के खिलाफ केस बंद, चल रहा था ट्रायल

Mumbai News. बॉम्बे हाई कोर्ट ने 2006 के मालेगांव विस्फोट के मामले चार आरोपियों के खिलाफ केस को बंद कर दिया है और उनके खिलाफ चल रहे ट्रायल को भी खत्म कर दिया है। इससे पहले अदालत ने याचिका दायर करने में हुई 49 दिन की देरी को माफ कर दिया था, यह देखते हुए कि यह चुनौती राष्ट्रीय जांच एजेंसी अधिनियम (एनआईए एक्ट) की धारा 21 के तहत एक वैधानिक अपील थी।
मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति श्याम चांडक की पीठ ने राजेंद्र चौधरी समेत अन्य आरोपियों की याचिकाओं को स्वीकार कर लिया है, जिसमें उनके द्वारा एक स्पेशल कोर्ट के सितंबर 2025 के आरोप तय करने के आदेश को चुनौती दी गयी थी। याचिकाओं में इस बात पर भी सवाल उठाया गया था कि ट्रायल कोर्ट ने किस तरह से आरोप तय किए थे और इस मामले में कई सह-आरोपियों को कैसे बरी किया गया था? पीठ ने अपने फैसले में आरोपी राजेंद्र चौधरी, धन सिंह, मनोहर राम सिंह नरवरिया और लोकेश शर्मा के खिलाफ केस बंद हो गया और उनके खिलाफ चल रहा ट्रायल खत्म हो गया।
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8 सितंबर 2006 मालेगांव में सिलसिलेवार बम विस्फोट हुए थे। भारतीय दंड संहिता, गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम और अन्य कानूनों के प्रावधानों के तहत अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। जांच सबसे पहले महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने की थी, जिसने 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया और दिसंबर 2006 में चार्जशीट दायर की। फरवरी 2007 में जांच केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई और बाद में एनआईए ने इसे अपने हाथ में ले लिया।
एनआईए ने आगे की जांच के बाद अन्य आरोपियों के साथ-साथ इन चारों याचिकाकर्ताओं को भी आरोपी बनाया और एक नई चार्जशीट दायर की।याचिकाकर्ता के वकील ने दो मुख्य दलील दी कि एनआईए कोई भी ऐसा चश्मदीद गवाह पेश करने में नाकाम रहा, जिसने असल में यह दावा किया हो कि उसने घटना को अपनी आंखों से देखा था। चार्जशीट में नामजद अन्य आरोपियों को बरी किया जाना पूरी तरह से गैर-कानूनी था।
Created On :   22 April 2026 9:46 PM IST







