भंडाफोड़: फ्रॉड एप फैक्ट्री चलाने वाले झारखंड के तीन आरोपी बिहार से गिरफ्तार, साइबर गैंग्स को बेचते थे एपीके फाइलें

फ्रॉड एप फैक्ट्री चलाने वाले झारखंड के तीन आरोपी बिहार से गिरफ्तार, साइबर गैंग्स को बेचते थे एपीके फाइलें
  • मुंबई के सात साइबर मामलों से मिला लिंक
  • मुंबई पुलिस ने एपीके फाइल सप्लाई चेन का किया भंडाफोड़

Mumbai News. एमजीएल फाइल के जरिए लोगों से साइबर ठगी करने के मामले में मुंबई साइबर पुलिस को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। पुलिस ने महानगर गैस लिमिटेड (एमजीएल) के नाम पर फर्जी एपीके फाइल भेजकर लोगों के बैंक खातों से रकम उड़ाने वाले अंतरराज्यीय साइबर ठग गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में झारखंड, पश्चिम बंगाल और बिहार तक पीछा कर गिरोह के तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है,जिनकी पहचान आरिफ अंसारी (28), बिलाल शेख (28) और मेहबूब आलम (25) के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी केवल ठगी को अंजाम देने वाले नहीं थे, बल्कि फ्रॉड एप फैक्ट्री चलाते थे। ये बैकएंड एनेबलर के तौर पर काम करते हुए अलग-अलग साइबर गैंग्स के लिए कस्टमाइज्ड एपीके फाइलें तैयार करते थे,जिनका इस्तेमाल लोगों का संवेदनशील डेटा चोरी करने और बैंक खातों से रकम निकालने में किया जाता था। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से पांच मोबाइल फोन बरामद किए हैं, जिनमें कई फर्जी एपीके फाइलें मिली हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि इन्हीं फाइलों का इस्तेमाल देशभर में कई साइबर ठगी मामलों में किया गया।

ऐसे बनाते थे लोगों को शिकार

साइबर पुलिस के अनुसार, गिरोह लोगों को मैसेज भेजकर बताता था कि उनका एमजीएल गैस कनेक्शन बंद होने वाला है। इसके बाद आरोपी खुद को कंपनी का अधिकारी बताकर संपर्क करते थे और एमजीएल गैस अनब्लॉक एपीके नाम की फाइल डाउनलोड करने को कहते थे। जैसे ही पीड़ित यह फाइल डाउनलोड करता था, आरोपी उसके मोबाइल फोन और बैंकिंग डाटा तक पहुंच बना लेते थे। यह एप्लिकेशन इंस्टॉल होने के बाद बैंकिंग क्रेडेंशियल्स चुरा सकती थी,ओटीपी इंटरसेप्ट कर सकती थी और मोबाइल का रिमोट एक्सेस भी दे देती थी यानी साइबर अपराधियों को पीड़ित के फोन पर पूरा नियंत्रण मिल जाता था। इसी तरह से कुर्ला निवासी 64 वर्षीय उपेंद्र नारायण मुस्कुर को भी गिरोह ने निशाना बनाकर 2.35 लाख रुपए ठग लिए थे। इस मामले में पश्चिम विभाग साइबर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।

तकनीकी जांच से खुला राज

जांच के दौरान पुलिस ने एपीके फाइल का तकनीकी विश्लेषण किया, जिसमें कई मोबाइल नंबर, आईएमईआई नंबर, आईपी डिटेल्स और ईमेल आईडी सामने आए। जांच में मुख्य आरोपी आरिफ अंसारी का नाम सामने आया, जो झारखंड का रहने वाला है। पहले पुलिस टीम झारखंड पहुंची, लेकिन आरोपी फरार मिला। बाद में सूचना मिली कि वह पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में छिपा है। इसके बाद मुंबई पुलिस की टीम वहां पहुंची और लगातार निगरानी रखी। आरोपी ट्रेन से भागने की फिराक में थे, तभी मंगलवार सुबह बिहार के किशनगंज रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ की मदद से तीनों को गिरफ्तार कर लिया गया।पुलिस को शक है कि यह तिकड़ी मुंबई में दर्ज कम से कम छह से सात साइबर फ्रॉड मामलों से जुड़ी है। साथ ही देशभर में भी इसी तरीके से कई लोगों को ठगे जाने की आशंका है। जांचकर्ता अब जब्त किए गए मोबाइल फोन और डिजिटल डाटा की जांच कर रहे हैं, ताकि अन्य खरीदारों, पैसों के लेनदेन और इन फर्जी एप्लिकेशन के नेटवर्क का पता लगाया जा सके। एक अधिकारी ने बताया कि यह कोई अलग-थलग फ्रॉड केस नहीं है, बल्कि एक बड़े इकोसिस्टम का हिस्सा है, जहां टेक डेवलपर्स ठगों को साइबर ठगी के उपकरण सप्लाई कर रहे हैं। हम पूरे नेटवर्क की मैपिंग कर रहे हैं।फिलहाल आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर मुंबई लाया गया है। पुलिस का मानना है कि इस गिरफ्तारी के बाद देश में एपीके फाइल ठगी के कई और मामलों का खुलासा हो सकता है।

Created On :   22 April 2026 10:14 PM IST

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