बॉम्बे हाई कोर्ट: यदि किसी सहकारी संस्था में सरकार की शेयर हिस्सेदारी नहीं है, तो उस पर आरक्षण नीति लागू नहीं होगा

यदि किसी सहकारी संस्था में सरकार की शेयर हिस्सेदारी नहीं है, तो उस पर आरक्षण नीति लागू नहीं होगा
  • अदालत ने राज्य सरकार द्वारा पुणे जिला सहकारी दुग्ध संस्था आरक्षण लागू करने की कार्रवाई गलत और अवैध माना
  • पुणे जिला सहकारी दुग्ध संस्था को आरक्षण लागू करने की कार्रवाई गलत और अवैध माना

Mumbai News. बॉम्बे हाई कोर्ट ने आरक्षण को लेकर अपने एक अहम फैसले में कहा कि यदि किसी सहकारी संस्था में सरकार की शेयर हिस्सेदारी नहीं है, तो उस पर आरक्षण नीति लागू नहीं होगा। अदालत ने राज्य सरकार द्वारा पुणे जिला सहकारी दुग्ध संस्था को आरक्षण लागू करने की कार्रवाई गलत और अवैध माना है। राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि संस्था को विभिन्न योजनाओं के तहत सरकारी आर्थिक सहायता, सब्सिडी और रियायती जमीन मिली है। इसलिए इसे ‘सरकारी सहायता प्राप्त संस्था’ मानकर आरक्षण नीति लागू होनी चाहिए। याचिकाकर्ता के वकील शेखर जगताप ने दलील दी कि संस्था में सरकार की कोई शेयर कैपिटल (हिस्सेदारी) नहीं है। केवल सरकारी सहायता मिलने से संस्था ‘संस्था’ नहीं बन जाती। इसलिए आरक्षण कानून लागू नहीं होना चाहिए। अदालत के समक्ष यह सवाल था कि क्या याचिकाकर्ता संस्था महाराष्ट्र राज्य लोकसेवा आरक्षण अधिनियम 2001 के तहत ‘संस्था’ मानी जाएगी, जिस पर आरक्षण नीति लागू होती है या नहीं। इस पर अदालत ने कानून की धारा 2(सी) और 2(आई) का विश्लेषण करते हुए कहा कि ‘संस्था’ में सहकारी समिति तभी आएगी, जब उसमें सरकार की शेयर होल्डिंग हो। सरकारी योजना का लाभ और रियायती जमीन लेने से संस्था ‘संस्था’ नहीं बनती। सरकारी शासनादेश (जीआर) कानून से ऊपर नहीं हो सकता।

न्यायमूर्ति अजय गडकरी और न्यायमूर्ति कमल खाता की पीठ ने पुणे जिला सहकारी दुग्ध संस्था की याचिका को स्वीकार करते हुए कहा कि हाल ही में ‘चैतन्य पुत्र पंडित नानावाड़े’ के मामले में आरक्षण अधिनियम के प्रावधानों पर विचार करने के बाद इस न्यायालय ने यह निर्णय दिया है कि अधिनियम (संख्या 8) 2004 के प्रावधानों को महाराष्ट्र सहकारी समिति अधिनियम 1960 के प्रावधानों के तहत स्थापित किसी सहकारी समिति पर लागू करने के लिए यह आवश्यक शर्त है कि सरकार या सरकार द्वारा सहायता प्राप्त कोई संस्था ऐसी समिति में शेयरधारक हो।

अदालत ने स्पष्ट किया कि यह बात न केवल धारा 2(सी) की भाषा से, बल्कि अधिनियम (संख्या 8) 2004 की धारा 2(आई) के उप-खंड (2) की भाषा से भी स्पष्ट होती है। विशेष रूप से इस निर्णय में राज्य सरकार द्वारा दिनांक 28 दिसंबर 2016 को भेजे गए एक पत्र का उल्लेख किया गया है, जो राज्य की इस स्थिति को दर्शाता है कि जिन जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों में सरकार का कोई शेयर नहीं है, उन समितियों या संस्थाओं पर आरक्षण से संबंधित कानून लागू नहीं होगा।

Created On :   22 April 2026 9:41 PM IST

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