अमानवीय: डायलिसिस मरीज को 17 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट करके ठगे 1.67 करोड़, ब्लू डार्ट कॉल से शुरू हुआ डर का खेल

डायलिसिस मरीज को 17 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट करके ठगे 1.67 करोड़, ब्लू डार्ट कॉल से शुरू हुआ डर का खेल
  • डायलिसिस पर होने के दर्द पर भी नहीं पसीजा ठगों का दिल
  • 12 म्यूचुअल फंड, 4 सरकारी बॉन्ड तुड़वाए
  • मां के गहने बेचने को किया मजबूर

Mumbai News. सांताक्रूज इलाके से साइबर ठगी का एक बेहद सनसनीखेज और अमानवीय मामला सामने आया है, जहां ठगों ने एक डायलिसिस मरीज कारोबारी को 17 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट में रखकर 1 करोड़ 67 लाख 40 हजार रुपये ठग लिए। साइबर अपराधियों ने खुद को ब्लू डार्ट कुरियर कर्मचारी, पुलिस अधिकारी, सीबीआई अफसर और आरबीआई अधिकारी बताकर पीड़ित को लगातार डराया, धमकाया और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। इस दौरान पीड़ित खुद के हर दूसरे दिन डायलिसिस होने की बात कहता रहा, लेकिन ठगो का दिल बिल्कुल नहीं पसीजा और आरोपियों ने न सिर्फ पीड़ित के बैंक खातों की रकम निकलवाई, बल्कि 12 म्यूचुअल फंड तुड़वाए, 4 सरकारी बॉन्ड बिकवाए और यहां तक कि मां के गहने बेचने तक का दबाव बनाया। इस मामले में पीड़ित की शिकायत पश्चिम साइबर सेल ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

ब्लू डार्ट कॉल से शुरू हुआ डर का खेल

पीड़ित मरीज ने पुलिस को बताया कि 2 अप्रैल 2026 की सुबह उनके मोबाइल पर एक कॉल आया। कॉलर ने खुद को ब्लू डार्ट कुरियर सर्विस, मरोल शाखा का कर्मचारी राहुल कुमार बताया। उसने कहा कि उनके नाम से मुंबई से बैंकॉक भेजा गया एक पार्सल कस्टम विभाग ने पकड़ा है। आरोपी ने बताया कि पार्सल में 200 ग्राम एमडीएमए ड्रग्स, 5 पासपोर्ट, 3 एटीएम कार्ड, 1 लैपटॉप और कपड़े बरामद हुए हैं। जब पीड़ित ने कहा कि यह पार्सल उनका नहीं है, तो आरोपी ने कहा कि मामला गंभीर है और पुलिस शिकायत करनी होगी। इसके बाद कॉल कथित पुलिस अधिकारी को ट्रांसफर किया गया। आरोपी ने पीड़ित से कहा कि पार्सल में 5 पासपोर्ट मिले हैं, इसलिए वह ह्यूमन ट्रैफिकिंग रैकेट में शामिल हैं। साथ ही ड्रग्स मिलने से नारकोटिक्स केस भी बनेगा। आरोपी बार-बार गिरफ्तारी, जेल और पूछताछ की धमकी देता रहा।

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नवाब मलिक मनी लॉन्ड्रिंग केस से जोड़ा नाम

ठगों ने पीड़ित से कहा कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल कई राज्यों में अपराधों में हुआ है। फिर दावा किया गया कि उनका नाम एक बड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में आया है, जिसका मुख्य आरोपी नवाब मलिक है। आरोपियों ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में बयान दिए गए हैं और बैंक अधिकारियों के साथ कई लोगों की गिरफ्तारी होने वाली है। आरोपियों की सूची में उसका भी नाम है। इस झूठे डर ने पीड़ित को पूरी तरह तोड़ दिया।

डायलिसिस मरीज होने पर भी नहीं बख्शा

पीड़ित ने आरोपियों को बताया कि वह गंभीर मरीज हैं और हर दूसरे दिन डायलिसिस कराना पड़ता है। इसके बावजूद ठगों ने कहा कि उन्हें 72 घंटे निगरानी में रखा जाएगा और जांच पूरी होने तक मोबाइल ऑन रखना होगा। फिर सिग्नल ऐप डाउनलोड कराया गया और व्हाट्सऐप पर आधार कार्ड, फोटो और निजी जानकारी मांगी गई। कुछ देर बाद सीबीआई लोगो और सरकारी मुहर वाले फर्जी दस्तावेज भेजे गए, जिससे पीड़ित को लगा कि असली जांच एजेंसियां कार्रवाई कर रही हैं आरोपियों ने खुद को सीबीआई जांच अधिकारी अमित कुमार बताया और कहा कि वह राष्ट्रीय जांच में सहयोग कर रहे हैं। इसके बाद उन्होंने पूछा कि बैंक खातों में कितनी रकम है। शेयर बाजार में कितना निवेश है। कितने म्यूचुअल फंड हैं और कितने सरकारी बॉन्ड हैं। डर के कारण पीड़ित ने सारी जानकारी दे दी।

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12 म्यूचुअल फंड तुड़वाए, 4 सरकारी बॉन्ड बिकवाए

ठगों ने कहा कि उनके खातों की वैधता जांचनी है, इसलिए सारी रकम सरकारी सत्यापन खाते में भेजनी होगी। इसके बाद पीड़ित से एक्सेंचर कंपनी के शेयर बिकवाए गए। 12 म्यूचुअल फंड तुड़वाए गए, 4 सरकारी बॉन्ड बिकवाए गए,बैंक खातों की रकम निकलवाई गई और धीरे-धीरे पूरी राशि अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करा ली गई। पीड़ित से कुल 1 करोड़ 67 लाख 40 हजार 200 रुपये अलग-अलग बैंक खातों में जमा कराए गए। इतनी बड़ी रकम ऐंठने के बाद भी ठगों ने कहा कि जांच पूरी नहीं हुई है और अब 80 लाख रुपये और जमा करने होंगे। जब पीड़ित ने कहा कि उनके पास पैसे नहीं बचे हैं, तो ठगों ने कहा कि अपनी मां के गहने बेचो और पैसे जमा करो, बाद में सब वापस मिल जाएगा। यह सुनकर परिवार भी सदमे में आ गया। लगातार तनाव और दबाव में जी रहे पीड़ित ने 21 अप्रैल को अपने भाई को पूरी बात बताई, जिसके बाद साइबर ठगी का खुलासा हुआ। इसके बाद साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस अब मोबाइल नंबरों, बैंक खातों और डिजिटल ट्रेल के जरिए आरोपियों की तलाश कर रही है।

खार पश्चिम में डिजिटल अरेस्ट का खौफनाक खेल आया सामने

खार पश्चिम इलाके में डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी का सनसनीखेज मामला सामने आया है, कहा। ठगों ने 66 वर्षीय रिटायर्ड बुजुर्ग डॉमनिक मार्शल फर्नांडीस को मनी लॉन्ड्रिंग केस और गिरफ्तारी का डर दिखाकर 1.46 करोड़ रुपये ठग लिए।आरोपियों ने पहले खुद को टेलीकॉम अथॉरिटी ऑफ इंडिया का अधिकारी बताया और कहा कि उनके आधार कार्ड से फर्जी सिम निकाला गया है, जिससे 24 लोगों को आपत्तिजनक मैसेज भेजे गए हैं। बाद में खुद को सीबीआई अधिकारी सचिन यादव बताकर कहा गया कि उनका नाम जेट एयरवेज के पूर्व सीईओ नरेश गोयल से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आया है और उन्हें 20 लाख रुपये कमीशन मिला है। ठगों ने फर्जी दस्तावेज, डेबिट कार्ड की फोटो और वीडियो कॉल के जरिए पीड़ित को डराया। फिर बैंक खाते, चेकबुक, सोना, नकदी और संपत्ति की जानकारी ली। इसके बाद कहा गया कि जांच के लिए घर का सारा सोना बेचकर रकम सरकारी खाते में जमा करनी होगी, जो बाद में वापस मिलेगी। डरे हुए बुजुर्ग ने घर का पूरा सोना बेच दिया और अलग-अलग खातों में 1 करोड़ 46 लाख रुपये भेज दिए। रकम भेजने के बाद आरोपी गायब हो गए। पीड़ित ने साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

Created On :   28 April 2026 10:02 PM IST

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