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महाराष्ट्र के जलाशयों में 42.61 प्रतिशत पानी जमा, ठाणे में पानी की मांग ज्यादा, टैंकरों पर निर्भरता बढ़ी

Mumbai News. महाराष्ट्र के जलाशयों में 42.61 प्रतिशत जलभंडारण है। बीते साल राज्य के जलाशयों में 35.90 प्रतिशत पानी था। पिछले साल के मुकाबले जलाशयों में 6.71 प्रतिशत ज्यादा पानी है। रविवार को राज्य के जलसंसाधन विभाग की ओर से यह जानकारी मिली है। इसके अनुसार प्रदेश में छोटे, मध्यम और बड़े मिलाकर कुल 3028 जलाशय हैं। इनमें 17404.11 दस लाख घन मीटर (दलघमी) पानी इस्तेमाल करने योग्य बचा है। सूखा प्रभावित माने जाने वाले मराठवाड़ा संभाग के 929 जलाशयों में 48.10 प्रतिशत पानी है। पुणे अंचल के 724 जलाशयों में 35.29 प्रतिशत पानी है। राज्य भर में सबसे कम पानी पुणे संभाग के जलाशयों में है। वहीं, नागपुर विभाग के 387 जलाशयों में 45.98 प्रतिशत, अमरावती विभाग के 276 जलाशयों में 51.89 प्रतिशत, नाशिक विभाग के 539 जलाशयों में 44.07 प्रतिशत और कोंकण विभाग के 173 जलाशयों में 45.47 प्रतिशत पानी उपलब्ध है। बीते दिनों मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एल नीनो के प्रभाव को देखते हुए पानी संभलकर इस्तेमाल करने का आह्वान किया था।
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1 मई से मुंबई में 10 प्रतिशत पानी कटौती, जलाशयों में सिर्फ 109 दिन का ही पानी बचा
अल नीनो के चलते मौसम विभाग ने इस साल मानसून कमजोर रहने की संभावना जताई है। मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) अभी से पेयजल नियोजन में जुट गई है। इसी के तहत एक मई से मुंबई में 10 फीसदी पानी कटौती की तैयारी मनपा ने की है। इस उपाय से मुंबई के जलाशयों में जमा पानी ज्यादा दिन चल सकता है। मुंबई में रोजाना 3,900 मिलियन लीटर (एमएलडी) पानी की आपूर्ति की जाती है। मुंबई के जलाशयों में 29 प्रतिशत पानी (4,23,174 मिलियन लीटर) का स्टॉक है। अगर बिना कटौती के पानी आपूर्ति की जाती है तो मौजूदा स्टॉक से 12 अगस्त तक जलापूर्ति की जा सकती है। अगर कटौती के हिसाब से मुंबई में पानी आपूर्ति की जाती है तो पूरे अगस्त महीने तक मुंबईकरों को पेयजल मुहैया कराया जा सकता है।
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ठाणे में पानी की मांग ज्यादा, टैंकरों पर निर्भरता बढ़ी
ठाणे महानगरपालिक क्षेत्र की लगभग 27 लाख आबादी के लिए रोजाना 580 एमएलडी पानी मुहैया कराया जा रहा है। हालांकि जरूरत 620 एमएलडी लीटर पानी की है।
- -कल्याण-डोंबीवली मनपा क्षेत्र की जनसंख्या 20 लाख से ज्यादा है। यहां उल्हास व कालू नदी शोधन संयंत्र से 140 एमएलडी तथा एमआईडीसी (MIDC) के बारवी डैम से 100 एमएलडी पानी की आपूर्ति की जाती है। जरूरत 350-413 एमएलडी की है।
- -मीरा-भायंदर की 13-14 लाख की आबादी को 250 एमएलडी पानी की जरूरत है। हालांकि आपूर्ति 200-215 एमएलडी की ही है। यानी रोजाना 50 एमएलडी पानी कम मिल रहा है। असमान जलापूर्ति, रिसाव और शटडाउन से हालात बिगड़े हैं। टैंकर निर्भरता बढ़ी, माफिया सक्रिय, जबकि स्थायी समाधान परियोजना अधूरी है।
- -उल्हासनगर की जनसंख्या 6 से 8 लाख के बीच है। यहां 150 एमएलडी पानी की जरूरत है, जिसके मुकाबले आपूर्ति 120 से 130 एमएलडी ही है।
- -भिवंडी की आबादी 12 लाख के आसपास है। शहर को रोजाना 185 एमएलडी पानी की जरूरत है। आपूर्ति 115 एमएलडी की है। यहां 28 से अधिक क्षेत्रों में टैंकरों से पेयजल मुहैया कराया जा रहा है।
- -नवी मुंबई के मोरबे डैम में 43.24 प्रतिशत पानी है। यहां अभी पेयजल आपूर्ति में कोई कटौती प्रस्तावित नहीं है। लेकिन, बढ़ती आबादी और अवैध निर्माण के चलते जलापूर्ति पर दबाव है। इसका खामियाजा शहर के नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है!
Created On :   26 April 2026 9:57 PM IST










