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मराठी भाषा विवाद: संजय निरुपम की गाड़ी पर मनसे का पथराव, 4 मई की हड़ताल पर सख्त रुख, परिवहन आयुक्त ने गृह विभाग को प्रस्ताव भेजा

Mumbai News. राज्य में रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य करने के फैसले को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी बीच मुंबई के दहिसर इलाके में रिक्शा और टैक्सी चालकों से मिलने पहुंचे शिवसेना (शिंदे) नेता संजय निरुपम की गाड़ी पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के नेताओं ने पथराव कर दिया। जिससे माहौल और तनावपूर्ण हो गया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर हालात को काबू में किया और कुछ कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया है। इस बीच मनसे नेता अविनाश जाधव ने चेतावनी देते हुए कहा कि 4 मई को रिक्शा-टैक्सी वालों की हड़ताल का कोई असर नहीं होने देंगे।
राज्य सरकार के परिवहन विभाग के फैसले पर सवाल उठाने वाले संजय निरुपम शुक्रवार को दहिसर के गणपत पाटील नगर में रिक्शा चालकों से मुलाकात करने पहुंचे थे। इसी दौरान मनसे के कार्यकर्ता वहां पहुंचे और जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। देखते ही देखते स्थिति बिगड़ गई और निरुपम की गाड़ी पर पथराव शुरू हो गया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर हालात को काबू में किया और कुछ कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया है। पुलिस ने इस मामले में मुकदमा भी दर्ज किया है।
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मराठी का विरोध नहीं, जबरदस्ती गलत
निरुपम ने कहा कि राज्य में रहने वाले लोगों को मराठी आनी चाहिए और मराठी भाषा का सम्मान होना चाहिए। लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि भाषा के नाम पर जबरदस्ती, दबाव या धमकी देना गलत है और इसका विरोध होना चाहिए। निरुपम ने कहा कि मराठी सीखना जरूरी है, लेकिन इसके लिए चालकों को समय मिलना चाहिए। उन्होंने बताया कि कई चालक पहले से मराठी जानते हैं, जबकि कुछ को सीखने का मौका दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यह नियम नया नहीं, बल्कि 2019 के सरकारी आदेश से जुड़ा है, जिसे अब सख्ती से लागू करने की तैयारी है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर बिना तैयारी के नियम लागू किया गया, तो कई चालकों का रोजगार खतरे में पड़ सकता है। उन्होंने इस संबंध में सरकार से पुनर्विचार की मांग की है।
4 मई की हड़ताल पर मनसे की चेतावनी
रिक्शा-टैक्सी चालकों द्वारा 4 मई को घोषित हड़ताल को लेकर भी सियासत तेज हो गई है। मनसे नेता अविनाश जाधव ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि उस दिन आम लोगों को किसी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो वह खुद सड़कों पर उतरेंगे। अगर हड़ताल से यात्रियों को दिक्कत होती है, तो मनसे कार्यकर्ता खुद गाड़ियां चलाकर लोगों को उनके गंतव्य तक पहुंचाएंगे।
सरकार भी सख्ती के मूड में
इस बीच राज्य के परिवहन आयुक्त ने मराठी भाषा को अनिवार्य करने संबंधी प्रस्ताव गृह विभाग को भेज दिया है। इससे संकेत मिल रहे हैं कि सरकार इस फैसले को लागू करने के लिए गंभीर है। फिलहाल रिक्शा-टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा की अनिवार्यता ने राज्य की राजनीति को गरमा दिया है।
Created On :   24 April 2026 10:06 PM IST











