सूखे पर सियासत तेज: विपक्ष की विशेष अधिवेशन बुलाने की मांग, फडणवीस ने मंत्रियों को दिए जमीन पर उतरने के निर्देश, बोले - वीआईपी कल्चर से रहें दूर

विपक्ष की विशेष अधिवेशन बुलाने की मांग, फडणवीस ने मंत्रियों को दिए जमीन पर उतरने के निर्देश, बोले - वीआईपी कल्चर से रहें दूर
  • कई जिलों में सूखे जैसे हालात के बीच सरकार ने शुरू किया प्रारंभिक आकलन
  • राऊत और रोहित पवार ने विशेष अधिवेशन बुलाने की मांग की
  • एक सप्ताह में प्रारंभिक आकलन, इसके बाद पंचनामे
  • शरद पवार पहले ही रख चुके हैं राहत की मांग

डिजिटल डेस्क, मुंबई. महाराष्ट्र में बारिश की कमी के कारण कई जिलों में सूखे जैसे हालात बन गए हैं। खेतों में खड़ी फसलें प्रभावित हुई हैं और किसानों के सामने पानी, चारा और आर्थिक संकट गहराने लगा है। इस बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अपने मंत्रियों को प्रभावित इलाकों में जाकर जमीनी स्तर पर स्थिति का जायजा लेने और प्रारंभिक आकलन करने के निर्देश दिए हैं। फडणवीस ने संकेत दिया है कि राहत के लिए केंद्र से मिलने वाली सहायता का इंतजार किए बिना राज्य स्तर पर भी जरूरी कदम उठाए जाएंगे। फडणवीस ने अपने मंत्रियों से साफ कहा है कि सूखा प्रभावित क्षेत्रों के दौरे केवल औपचारिकता न बनें। मंत्री जमीन पर उतरकर किसानों से सीधे संवाद करें और वास्तविक स्थिति की जानकारी लें। साथ ही दौरे के दौरान अनावश्यक तामझाम और वीआईपी संस्कृति से बचने के निर्देश दिए गए हैं। यह निर्देश ऐसे समय आया है जब नांदेड़ में सूखे की समीक्षा बैठक के दौरान मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों को काजू-बादाम परोसे जाने का वीडियो वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया। विपक्ष ने इसे किसानों की परेशानी के बीच सरकार की संवेदनशीलता पर सवाल के रूप में उठाया।

एक सप्ताह में प्रारंभिक आकलन, इसके बाद पंचनामे

मुख्यमंत्री फडणवीस के मुताबिक राज्य सरकार अगले एक सप्ताह में सूखे जैसी स्थिति का प्रारंभिक आकलन पूरा करने की दिशा में काम कर रही है। इसके बाद फसल नुकसान के पंचनामे किए जाएंगे। सरकार का कहना है कि प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए केंद्र की सहायता का इंतजार किए बिना आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। पेयजल और चारे जैसी तत्काल जरूरतों पर भी सरकार नजर रख रही है।आधिकारिक प्रक्रिया के तहत फसल नुकसान के पंचनामे 5 अक्टूबर से शुरू करने की बात मुख्यमंत्री फडणवीस पहले ही कह चुके हैं। दरअसल राज्य में जून से सितंबर के बीच बारिश में कमी और कई इलाकों में लंबे बारिश ब्रेक ने खरीफ फसलों पर असर डाला है।

विपक्ष बोला- हालात गंभीर, विशेष अधिवेशन बुलाएं

दूसरी ओर सूखे के मुद्दे पर विपक्ष ने सरकार पर दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया है। शिवसेना (उद्धव) सांसद संजय राऊत ने राज्य की स्थिति को गंभीर बताते हुए सूखे पर चर्चा और राहत के लिए विधानमंडल का जल्द विशेष अधिवेशन बुलाने की मांग की है। राऊत ने रविवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि राज्य में किसानों के सामने पैदा हुई स्थिति पर सरकार को विधानसभा में विस्तृत चर्चा करनी चाहिए और तत्काल राहत पैकेज पर निर्णय लेना चाहिए। उनका तर्क है कि केवल अधिकारियों की समीक्षा बैठकों से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि सरकार को किसानों के लिए स्पष्ट और ठोस निर्णय लेने होंगे।

रोहित पवार की मांग- दिल्ली में पीएम से समय लें, शरद पवार भी साथ चलेंगे

राकांपा (शरद) विधायक रोहित पवार ने मराठवाड़ा के सूखाग्रस्त इलाकों के दौरे के दौरान कहा कि राज्य सरकार को दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से समय लेना चाहिए। उनके मुताबिक, यदि जरूरत पड़े तो शरद पवार भी प्रधानमंत्री से मुलाकात के लिए साथ चलेंगे। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि किसान आसमानी संकट में है, इसलिए सरकार को किसानों को एक लाख प्रति हेक्टेयर की मदद देनी चाहिए।

शरद पवार पहले ही रख चुके हैं राहत की मांग

सूखे के मुद्दे पर राकांपा (शरद) प्रमुख शरद पवार ने मुख्यमंत्री फडणवीस को पत्र लिखकर तत्काल राहत उपायों की मांग कर चुके हैं। पवार ने राज्य में सूखा घोषित करने, किसानों को प्रति हेक्टेयर 50 हजार रुपए की आर्थिक सहायता देने की मांग रखी है। पवार ने यह भी कहा था कि गंभीर स्थिति को देखते हुए सरकार को केवल औपचारिक सूखा आकलन पूरा होने का इंतजार नहीं करना चाहिए।

Created On :   20 Sept 2026 8:43 PM IST

Tags

Next Story