मंथन: सूखे की सूची से बाहर तहसीलों के किसानों को भी मिलेगी राहत, फडणवीस ने दिए प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश

सूखे की सूची से बाहर तहसीलों के किसानों को भी मिलेगी राहत, फडणवीस ने दिए प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश
  • मंत्रिमंडल बैठक में सूखा राहत पर मंथन
  • 10वीं-12वीं के परीक्षा शुल्क से राहत देने के भी निर्देश

डिजिटल डेस्क, मुंबई. महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति और किसानों को राहत देने को लेकर मंगलवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिमंडल की महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में सूखा राहत, किसानों की सहायता, पानी का नियोजन और विद्यार्थियों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। सरकार द्वारा सूखाग्रस्त घोषित की गईं तहसीलों की सूची से बाहर रह गए क्षेत्रों को लेकर मुख्यमंत्री ने प्रस्ताव तैयार करने के आदेश अधिकारियों को दिए। फडणवीस ने यह भी निर्देश दिया कि सूखा राहत के लिए गठित मंत्रिमंडलीय उपसमिति की बैठक नियमित रूप से होनी चाहिए। साथ ही सभी मंत्री अपने-अपने विभागों से संबंधित सुझाव नियमित रूप से उपसमिति के सामने रखें। मंगलवार को मंत्रिमंडलीय उपसमिति की बैठक में सूखे को लेकर चर्चा हुई।

दरअसल, राज्य में कई तहसीलों में बारिश की कमी के बावजूद निर्धारित सूखा मानदंड पूरा नहीं होने के कारण उन्हें आधिकारिक सूची से बाहर रखा गया है। अब सरकार इन क्षेत्रों के लिए वैकल्पिक मानदंडों के आधार पर राहत देने की दिशा में आगे बढ़ती हुई दिखाई दे रही है। हालांकि इन किसानों को किस स्वरूप में और कितनी सहायता दी जाएगी, इसे लेकर अभी अंतिम जानकारी सामने नहीं आई है। बैठक में फडणवीस ने पानी की संभावित कमी को देखते हुए जल नियोजन पर भी जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को पानी के इस्तेमाल और प्राथमिकता क्रम को स्पष्ट करने वाला स्वयंस्पष्ट शासनादेश जारी करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पेयजल की जरूरत तय करते समय उसमें पशुओं के लिए पानी को भी शामिल किया जाए और उसके बाद अन्य प्राथमिकताएं तय की जाएं।

डीपीडीसी में सूखा राहत को प्राथमिकता

मुख्यमंत्री ने जिला योजना एवं विकास समिति (डीपीडीसी) के माध्यम से अधिक से अधिक काम सूखा राहत से संबंधित लेने के निर्देश दिए। पालकमंत्रियों से स्थानीय स्तर पर परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेने और सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए प्रभावी उपाय करने को कहा गया। फडणवीस ने 10वीं और 12वीं की परीक्षा फीस को लेकर भी निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों से पहले परीक्षा शुल्क लेकर बाद में रिफंड करने के बजाय सूखा प्रभावित क्षेत्रों में पात्र विद्यार्थियों से शुल्क ही नहीं लिया जाए। इससे प्रभावित परिवारों के विद्यार्थियों को आर्थिक राहत मिलने की संभावना है।

Created On :   29 Sept 2026 10:14 PM IST

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