विशेष एनआईए अदालत: मुंबई की विशेष एनआईए अदालत से पूर्व पुलिस अधिकारी सचिन वझे को मिली जमानत, मनसुख हिरेन की हत्या का मामला

मुंबई की विशेष एनआईए अदालत से पूर्व पुलिस अधिकारी सचिन वझे को मिली जमानत, मनसुख हिरेन की हत्या का मामला
  • 2021 के एंटीलिया के पास विस्फोटक रखने और मनसुख हिरेन की हत्या का मामला
  • एक जमानतदार के साथ 1 लाख रुपए के पर्सनल बॉन्ड पर रिहा करने का दिया आदेश
  • अदालत ने कहा-सरकारी पक्ष यूएपीए के तहत आतंकवाद का मामला साबित करने में नाकाम रहा

डिजिटल डेस्क, मुंबई. विशेष एनआईए अदालत से 25 फरवरी 2021 को उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर एंटीलिया के पास विस्फोटक रखने और मनसुख हिरेन की हत्या के मामले में पूर्व पुलिस अधिकारी सचिन वझे को जमानत मिल गई है। अदालत ने वझे को जमानत देते हुए कहा कि सरकारी पक्ष उनके खिलाफ गैर-कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत आतंकवाद का मामला साबित करने में नाकाम रहा है।

विशेष सत्र न्यायालय के न्यायाधीश चकोर एस. बाविस्कर ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है, जिससे यह माना जा सके कि अंबानी परिवार को किसी भी तरह से डराया-धमकाया गया था। उन्होंने केंद्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा सख्त यूएपीए कानून लागू करने पर सवाल उठाते हुए कहा कि एजेंसी अंबानी परिवार के किसी भी सदस्य का बयान दर्ज करने में नाकाम रही जिससे यह साबित हो सके कि उन्हें डराया-धमकाया गया था। अदालत ने यह भी कहा कि घटना के तुरंत बाद से लेकर अब तक अंबानी परिवार के रोजमर्रा के कामकाज में एक मिनट के लिए भी कोई रुकावट नहीं आई। हालांकि सरकारी पक्ष का कहना है कि सचिन वझे दहशत फैलाना चाहते थे या आरोपी की हरकत से अंबानी परिवार के मन में दहशत फैलने की संभावना थी, लेकिन रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है, जो इस बात की पुष्टि करे।

इसके अलावा अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अंबानी के घर के पास खड़ी एसयूवी में मिली जिलेटिन की छड़ों में डेटोनेटर नहीं थे। इसलिए वे धमाका करने के काम की नहीं थीं और यूएपीए की धारा 15 के तहत आतंकवादी गतिविधि की परिभाषा के लिए जरूरी साधन की श्रेणी में नहीं आती थीं। ठाणे के व्यवसाई मनसुख हिरेन की हत्या के मामले में अदालत ने कहा कि भले ही यह हत्या का मामला था, लेकिन यह किसी आतंकवादी गतिविधि का सीधा नतीजा नहीं था। यह भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 (हत्या) के तहत एक अलग अपराध है, जिस पर यूएपीए के कड़े जमानत नियम लागू नहीं होते। अदालत ने वझे की जमानत अर्जी मंजूर कर ली और उन्हें एक जमानतदार के साथ 1 लाख रुपए के पर्सनल बॉन्ड पर रिहा करने का आदेश दिया। अभियोजन पक्ष ने वझे और अन्य लोगों पर फरवरी और मार्च 2021 के बीच एक आतंकवादी गिरोह बनाने और आपराधिक साजिश रचने का आरोप लगाया है।

Created On :   29 Sept 2026 10:04 PM IST

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