ऐलान: 4 अक्टूबर को ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ठाकरे बंधुओं का महामोर्चा, भायखला से बीएमसी मुख्यालय तक मार्च

4 अक्टूबर को ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ठाकरे बंधुओं का महामोर्चा, भायखला से बीएमसी मुख्यालय तक मार्च
  • राज-उद्धव ठाकरे की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऐलान
  • सभी दलों को फोन कर बुलाएंगे

डिजिटल डेस्क, मुंबई. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर विपक्षी दलों के विरोध के बीच अब राज्य में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे और शिवसेना (उद्धव) पक्ष प्रमुख उद्धव ठाकरे एक साथ मैदान में उतर आए हैं। दोनों ठाकरे बंधुओं ने 4 अक्टूबर को ज्ञानेश और चुनाव आयोग के खिलाफ संयुक्त महामोर्चा निकालने का ऐलान किया है। मंगलवार को राज ठाकरे के शिवतीर्थ स्थित आवास पर हुई संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में मोर्चे की पूरी रूपरेखा सामने रखी गई। राज ने बताया कि 4 अक्टूबर को सुबह 10 बजे लोग भायखला स्थित रिचर्डसन एंड क्रूडास कंपनी के पास जुटेंगे। इसके बाद करीब 11 से 11.30 बजे के बीच मोर्चा शुरू होगा। मोर्चा बीएमसी मुख्यालय के पास पहुंचेगा, जहां मंच बनाया जाएगा और मोर्चा सभा में बदल जाएगा।

मोर्चे में ही विस्तार से बोलेंगे

राज ठाकरे ने कहा कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर वह पिछले कई वर्षों से सवाल उठाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि 2017-18 में उन्होंने कई नेताओं से मुलाकात कर ईवीएम सहित चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की थी। हालांकि उन्होंने मंगलवार को इन मुद्दों पर विस्तार से बोलने से इनकार करते हुए कहा कि 4 अक्टूबर को मोर्चे के दौरान ही पूरी बात रखी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि यह मोर्चा केवल किसी एक राजनीतिक दल का कार्यक्रम नहीं है। चुनाव आयोग के पिछले कुछ वर्षों के कामकाज को लेकर जो सवाल उठे हैं, उनके खिलाफ यह संयुक्त प्रदर्शन होगा।

किसी पार्टी का झंडा नहीं, सिर्फ तिरंगा

मोर्चे को गैर-दलीय स्वरूप देने पर ठाकरे बंधुओं ने खास जोर दिया है। राज ने स्पष्ट किया कि मोर्चे में किसी भी राजनीतिक दल का झंडा नहीं होगा और प्रतिभागियों के हाथ में केवल तिरंगा रहेगा। राजनीतिक दलों के नारे भी नहीं लगाए जाएंगे। उन्होंने कहा यह मुद्दा लोकतंत्र और संविधान से जुड़ा है, इसलिए मोर्चे को किसी एक पार्टी के आंदोलन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

सत्ताधारी दलों के लिए भी दरवाजे खुले

राज ने कहा कि मोर्चे के लिए सभी राजनीतिक दलों को आमंत्रित किया जाएगा। यहां तक कि सत्ताधारी दल के नेता भी यदि मंच पर आना चाहें तो उनका स्वागत किया जाएगा। उन्होंने बताया कि किसी को औपचारिक पत्र नहीं भेजा जाएगा, बल्कि नेताओं को व्यक्तिगत रूप से फोन कर मोर्चे में शामिल होने का आग्रह किया जाएगा। इस तरह ठाकरे बंधुओं ने कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों के साथ-साथ सत्ता पक्ष के नेताओं के लिए भी मोर्चे में शामिल होने का रास्ता खुला रखा है।

आंदोलन की आपस में कोई प्रतियोगिता नहीं

कांग्रेस और अन्य संगठनों द्वारा अलग-अलग आंदोलन किए जाने के सवाल पर राज ठाकरे ने कहा कि यह किसी तरह की प्रतियोगिता नहीं है। उनके मुताबिक जिसे जिस तरीके से आंदोलन करना है, वह कर सकता है और लोकतांत्रिक व्यवस्था में अधिक से अधिक आंदोलन होने चाहिए।

उद्धव-राज फिर एक मंच पर

राज और उद्धव ठाकरे का चुनाव आयोग के मुद्दे पर एक साथ आना महाराष्ट्र की राजनीति में भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। दोनों नेता अलग-अलग राजनीतिक राह पर हैं, लेकिन चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची के मुद्दे पर दोनों ने संयुक्त मोर्चा बनाया है। इससे पहले भी दोनों दलों ने स्थानीय चुनाव, मराठी और छात्रों के मुद्दे पर एक साथ आंदोलन किया था।

आंदोलन का सभी को अधिकार लेकिन मुद्दों की सच्चाई भी जांचें- फडणवीस

ठाकरे बंधुओं के मार्च पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि लोकतंत्र में हर किसी को आंदोलन करने का अधिकार है। किसी के आंदोलन करने पर वह टिप्पणी नहीं करेंगे, लेकिन आंदोलन में उठाए जा रहे मुद्दों की सच्चाई जरूर जांचनी चाहिए। फडणवीस ने कहा कि लोकतंत्र में आंदोलन करने का अधिकार है। कौन आंदोलन कर रहा है, इस पर मैं टिप्पणी नहीं करूंगा। लेकिन जिन मुद्दों को लेकर आंदोलन किया जा रहा है, वे कितने सही हैं, इसे समझना जरूरी है।

Created On :   29 Sept 2026 9:35 PM IST

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