बॉम्बे हाई कोर्ट: डेयरी एंड स्वीट्स शॉप के लाइसेंस सस्पेंड करने पर एफडीए को फटकार, शैक्षणिक संस्थाओं में कथित अनियमितता की एसआईटी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में पेश

डेयरी एंड स्वीट्स शॉप के लाइसेंस सस्पेंड करने पर एफडीए को फटकार, शैक्षणिक संस्थाओं में कथित अनियमितता की एसआईटी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में पेश
  • अदालत ने एफडीए को पुणे के गुरुनानक डेयरी एंड स्वीट्स शॉप को 5 लाख का मुआवजा देने का दिया आदेश
  • याचिका में एफडीए पर डेयरी एंड स्वीट्स शॉप के 98 फीसदी नियमों का पालन करने के बावजूद लाइसेंस बहाल नहीं करने का आरोप
  • एसआईटी ने नासिक मंडल के अलावा कोल्हापुर, छत्रपति संभाजीनगर, अमरावती, लातूर, नागपुर, मुंबई के शैक्षणिक संस्थाओं में भी जांच की शुरू

Mumbai News. बॉम्बे हाई कोर्ट ने डेयरी एंड स्वीट्स शॉप के लाइसेंस सस्पेंड करने का मामले में एक बार फिर महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) को फटकार लगाई। अदालत ने एफडीए को पुणे के गुरुनानक डेयरी एंड स्वीट्स शॉप को 5 लाख रुपए का मुआवजा 30 दिनों में देने का आदेश दिया है। अदालत ने एफडीए द्वारा डेयरी के लाइसेंस सस्पेंशन के आदेशों को "अजीब नीति और मनमानी’ माना और लाइसेंस सस्पेंशन के आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने डेयरी को अपना कारोबार फिर से शुरू करने की इजाजत दे दी है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र वी. घुगे और न्यायमूर्ति गौतम ए. अंखड की पीठ ने पुणे की गुरुनानक डेयरी एंड स्वीट्स शॉप की याचिका पर कहा कि आप (एफडीए) की नियत तारीफ के काबिल है और कोई विभाग कम से कम हरकत में तो आया है, लेकिन आप हद से ज्यादा आगे बढ़ रहे हैं। जैसे ही आप ने 98 फीसदी नियमों का पालन देखा, आप को तुरंत लाइसेंस का सस्पेंशन हटा देना चाहिए था। एफडीए की वकील ने लाइसेंस बहाल न करने को सही ठहराते हुए कहा कि अपील पर सुनवाई हो चुकी थी और 11 अगस्त को फैसले के लिए मामला बंद कर दिया गया था। पीठ ने कहा कि यह साफ तौर पर मनमानी है और बिल्कुल अजीब नीतियां हैं। एक बार जब आप 98 फीसदी के साथ पास हो जाते हैं, तो वे कहते हैं कि अब जाकर अपील दायर करो। यह नागरिकों को परेशान करना है। एफडीए ने फूड पॉइजनिंग की शिकायतें मिलने के बाद डेयरी के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी। जांच के दौरान एफडीए ने साफ-सफाई, रखरखाव और हाइजीन से जुड़ी कई कमियां पाई थीं। एफडीए ने 98 फीसदी कंप्लायंस रिपोर्ट के बावजूद डेयरी का लाइसेंस सस्पेंड कर दिया था। डेयरी ने एफडीए कमिश्नर तुकाराम मुंडे से संपर्क किया और 9 जुलाई को एक कंप्लायंस रिपोर्ट के जरिए कमियों के बारे में बताया। चार दिन बाद एफडीए के एक अधिकारी ने जगह का दोबारा निरीक्षण किया और फूड सेफ्टी कंप्लायंस में 36 में से 35 (98 फीसदी) अंक दिए। हालांकि लाइसेंस बहाल नहीं किया गया, जिसके बाद डेयरी ने 12 जून को उसके फूड लाइसेंस को सस्पेंड करने के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील अभिजीत देसाई ने दलील दी गई कि डेयरी का कारोबार 34 दिनों से बंद है, जिससे 8 लाख 74 हजार रुपए का नुकसान हुआ है।

राज्य के शैक्षणिक संस्थाओं में भर्ती एवं नियुक्तियों में कथित अनियमितता का मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) ने बॉम्बे हाई कोर्ट में सीलबंद लिफाफों में अंतरिम रिपोर्ट की पेश

उधर राज्य के शैक्षणिक संस्थाओं में भर्ती एवं नियुक्तियों में कथित अनियमितता के मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) ने बॉम्बे हाई कोर्ट में सीलबंद लिफाफों में अंतरिम रिपोर्ट पेश किया। एसआईटी की रिपोर्ट में नासिक मंडल के अलावा कोल्हापुर, छत्रपति संभाजीनगर, अमरावती, लातूर, नागपुर और मुंबई के शैक्षणिक संस्थाओं में भी जांच की शुरू करने की बात कही गई है। अदालत ने कहा कि एसआईटी को राज्य के प्रत्येक जिले की सभी शैक्षणिक संस्थानों में जांच करनी चाहिए। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रविन्द्र वी. घुगे और न्यायमूर्ति गौतम ए. अंखड की पीठ ने भाऊसाहेब भिकनराव चव्हाण की याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि जांच अभी व्यापक स्तर पर चल रही है और इस समय पूरे दस्तावेजी अभिलेख की विस्तार से समीक्षा करना उचित नहीं होगा। एसआईटी ने अब केवल नासिक मंडल तक अपनी जांच सीमित नहीं रखी है, बल्कि कोल्हापुर, छत्रपति संभाजीनगर, अमरावती, लातूर, नागपुर, मुंबई आदि जिलों की विभिन्न शैक्षणिक संस्थाओं में भी जांच प्रारंभ कर दी है। पीठ ने एसआईटी को स्पष्ट निर्देश दिया कि एसआईटी को महाराष्ट्र के प्रत्येक जिले की सभी शैक्षणिक संस्थानों में जांच करनी चाहिए। यह जांच इस बात से प्रभावित नहीं होनी चाहिए कि किसी संस्था का प्रबंधन कौन करता है या वह संस्था किसी जनप्रतिनिधि अथवा अति विशिष्ट व्यक्ति (वीवीआईपी) द्वारा संचालित है। पीठ ने यह भी कहा कि वह अफवाहों अथवा निराधार आरोपों पर निर्भर न रहे, बल्कि उपलब्ध सामग्री और प्रमाणों को एकत्रित एवं व्यवस्थित करे। यदि किसी व्यक्ति ने किसी संस्था से असंबद्ध रहते हुए एसआईटी को कोई सामग्री या जानकारी दी है, तो एसआईटी उस व्यक्ति से अपने कथन के समर्थन में शपथ पत्र प्रस्तुत करने को कह सकती है। यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर झूठी जानकारी देता है, तो उसके खिलाफ अभियोजन की कार्रवाई भी की जा सकती है। पीठ ने कहा कि शैक्षणिक संस्थाओं में भर्ती एवं नियुक्ति की प्रक्रिया में कोई अवैधता हुई है या नहीं? यदि अवैध नियुक्तियां हुई है, तो उनका क्या प्रभाव पड़ा? ऐसी नियुक्तियों के कारण राज्य के राजकोष को कोई आर्थिक हानि हुई है या नहीं। पीठ ने एसआईटी को अपनी जांच आगे जारी रखने की अनुमति दी और उसके द्वारा विभिन्न जिलों में जांच का विस्तार किए जाने को ध्यान में रखते हुए फिलहाल किसी उच्चाधिकार प्राप्त समिति (एचपीसी) के गठन की आवश्यकता पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया। पहले पीठ ने कहा था कि यदि एसआईटी केवल किसी एक जिले पर केंद्रित रहती है और अपना कार्य उचित ढंग से नहीं करती है, तो सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में एचपीसी गठित करने पर विचार किया जा सकता है। पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर 2026 को रखते हुए राज्य सरकार को एसआईटी द्वारा की गई जांच में हुई आगे की प्रगति से अवगत कराने का निर्देश दिया है।

Created On :   17 Aug 2026 10:20 PM IST

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