नमूने असुरक्षित: 20 लीटर के जार वाले पानी पर एफडीए का नियंत्रण नहीं, विधानसभा में सरकार की स्वीकारोक्ति

20 लीटर के जार वाले पानी पर एफडीए का नियंत्रण नहीं, विधानसभा में सरकार की स्वीकारोक्ति
  • पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर के 20 नमूने असुरक्षित मिले
  • पानी की जांच करने में कानूनी बाधाएं होने की बात सरकार ने स्वीकर की

Mumbai News. महाराष्ट्र में 20 लीटर के जार में सप्लाई किए जाने वाले पीने के पानी की गुणवत्ता पर खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) का सीधा नियंत्रण नहीं है। इस पानी की जांच करने में कानूनी बाधाएं होने की बात सरकार ने स्वीकर की है। पीने के पानी की आपूर्ति के लिए एक मानक कार्यप्रणाली (SOP) तैयार करने के निर्देश आयुक्तों को दिए गए हैं।

दरअसल विधानसभा में पूछे गए एक सवाल के लिखित जवाब में यह बात सामने आई है कि शादी-विवाह तथा अन्य सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बड़े पैमाने पर उपयोग होने वाले 20 लीटर जार के पानी को कृत्रिम रूप से ठंडा रखने के लिए कुछ सप्लायर इथिलीन ग्लाइकोल जैसे हानिकारक रसायन का इस्तेमाल कर रहे हैं। सरकार ने अपने उत्तर में स्पष्ट किया कि जार या बोतलबंद पानी को ठंडा करने के लिए इथिलीन ग्लाइकोल के उपयोग की कोई शिकायत अब तक प्राप्त नहीं हुई है। हालांकि खुले जार में बेचे जाने वाले पीने के पानी को खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत "खाद्य' की श्रेणी में शामिल नहीं किया गया है। इसलिए एफडीए उसके नमूनों की जांच नहीं करता। राज्य सरकार ने माना कि ऐसे पानी की गुणवत्ता पर प्रभावी नियंत्रण के लिए अलग व्यवस्था की आवश्यकता है। इसी कारण जार और अन्य माध्यमों से पीने के पानी की आपूर्ति के लिए एसओपी तैयार करने के निर्देश संबंधित आयुक्तों को दिए गए हैं।

इस बीच पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर पर एफडीए की कार्रवाई जारी है। 1 अप्रैल 2023 से 31 मार्च 2026 के बीच विभाग ने पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर बनाने वाली इकाइयों का 182 बार निरीक्षण किया। इस दौरान 177 नमूनों की जांच की गई। इनमें 115 नमूने मानकों के अनुरूप पाए गए, 13 नमूने घटिया गुणवत्ता के, 4 नमूने गलत लेबल वाले और 20 नमूने असुरक्षित पाए गए। जबकि 25 नमूनों की जांच रिपोर्ट अभी लंबित है। नागरिकों की शिकायतों के लिए एफडीए ने 1800222365 टोल-फ्री नंबर जारी किया है।

Created On :   5 July 2026 10:14 PM IST

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