बयान पर बढ़ा विवाद: मनसे कार्यकर्ताओं ने मुंबई भाजपा अध्यक्ष अमित साटम को दिखाए काले झंडे, राज ठाकरे पर की थी टिप्पणी

मनसे कार्यकर्ताओं ने मुंबई भाजपा अध्यक्ष अमित साटम को दिखाए काले झंडे, राज ठाकरे पर की थी टिप्पणी
  • साटम के बयान पर बढ़ा विवाद
  • राज ठाकरे की टिप्पणी के बाद बढ़ा विवाद

Mumbai News. लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और जलभराव के बीच अब राजनीतिक माहौल भी गर्म हो गया है। भाजपा और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के बीच शुरू हुई बयानबाजी अब सड़क तक पहुंच गई है। रविवार को मनसे कार्यकर्ताओं ने मुंबई भाजपा अध्यक्ष अमित साटम के खिलाफ भांडुप में प्रदर्शन करते हुए उन्हें काले झंडे दिखाए और उनके बैनरों पर कालिख पोतकर विरोध जताया। दरअसल मुंबई में भारी बारिश के दौरान साटम विभिन्न इलाकों का दौरा कर हालात का जायजा ले रहे थे। इसी दौरान उन्होंने मनसे प्रमुख राज ठाकरे पर निशाना साधते हुए कहा था कि भाजपा के नेता घर बैठकर सोशल मीडिया पर पोस्ट नहीं लिखते, बल्कि सड़क पर उतरकर काम करते हैं। साटम के इस बयान के बाद भाजपा और मनसे के बीच राजनीतिक टकराव हो गया।

राज ठाकरे की टिप्पणी के बाद बढ़ा विवाद

कुछ दिन पहले विधानसभा परिसर में हुई एक दुर्घटना के ऊपर अमित साटम के कथित रूप से हंसने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इस वीडियो को लेकर मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने अमित साटम और भाजपा पर तीखा हमला बोला था। इसके जवाब में साटम ने कहा था कि उन्होंने मुंबई महानगरपालिका में वर्षों से चल रहे भ्रष्टाचार और सांठगांठ की राजनीति खत्म कर दी है। इस बयान पर मनसे ने कड़ी आपत्ति जताई। मनसे नेता संदीप देशपांडे ने साटम के बयान पर पलटवार करते हुए सवाल उठाया कि यदि भाजपा नेता लगातार मैदान में थे, तो बारिश के दौरान हादसे क्यों हुए? उन्होंने साटम पर जनता का ध्यान असली मुद्दों से भटकाने का आरोप लगाया।

भांडुप में प्रदर्शन

विवाद के बीच सोमवार को बड़ी संख्या में मनसे कार्यकर्ता भांडुप स्थित डीएवी कॉलेज के बाहर एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों ने अमित साटम को काले झंडे दिखाए और उनके पोस्टरों तथा बैनरों पर कालिख पोतकर विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शन के दौरान मनसे कार्यकर्ताओं ने भाजपा के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की। दरअसल साटम ने अपने बयान में कहा था कि विपक्ष मेरे बयान का गलत अर्थ निकालकर लोगों का ध्यान भटका रहा है। हम घर बैठकर सोशल मीडिया पर पोस्ट नहीं लिखते, बल्कि सड़कों पर उतरकर काम करते हैं। विधानसभा में हमने आवाज उठाई, जिसके बाद दो दिनों के भीतर बीएमसी के सात अधिकारियों को निलंबित किया गया। क्या आपने बारिश के दौरान उद्धव ठाकरे, आदित्य ठाकरे या राज ठाकरे को मुंबई की सड़कों पर देखा है? मुझे निशाना बनाने का एक ही कारण है कि हमने बीएमसी की स्टैंडिंग कमेटी में 25 वर्षों से चल रहे भ्रष्टाचार की राजनीति पर रोक लगा दी है।

Created On :   5 July 2026 9:53 PM IST

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