निशाना: सुषमा अंधारे ने संकट में पार्टी का साथ दिया, लेकिन उन्हें वह सम्मान नहीं मिला - सचिन अहीर

सुषमा अंधारे ने संकट में पार्टी का साथ दिया, लेकिन उन्हें वह सम्मान नहीं मिला - सचिन अहीर
  • सुषमा अंधारे और विधायक बाबा काले ने उद्धव गुट के लिए संकट के समय में बहुत काम किया
  • विधान परिषद के उपसभापति चुने गए सचिन अहिर
  • जो सम्मान मिलना चाहिए था वह नहीं मिला

Mumbai News. शिवसेना (उद्धव) छोड़ शिवसेना (शिंदे) में शामिल होने के बाद विधान परिषद के उपसभापति चुने गए सचिन अहिर ने कहा है कि शिवसेना (उद्धव) की तेजतर्रार प्रवक्ता सुषमा अंधारे और विधायक बाबा काले ने उद्धव गुट के लिए संकट के समय में बहुत काम किया लेकिन उन्हें जो सम्मान मिलना चाहिए था वह नहीं मिला। अहीर ने क्या कहा?

एक समाचर चैनल को दिए इंटरव्यू में सचिन अहीर से पूछा गया कि उद्धव ठाकरे की शिवसेना में सुषमा अंधारे और विधायक बाबाजी काले जैसे नेताओं का राजनीतिक भविष्य क्या होगा? क्या वे भी आगे चलकर एकनाथ शिंदे की शिवसेना में दिखाई देंगे? इस सवाल के जवाब में अहीर ने कहा कि यह चर्चा हो रही है कि पार्टी ने कुछ लोगों को क्या दिया और क्या नहीं दिया, लेकिन अंधारे और काले ने दोनों चुनावों (लोकसभा और विधानसभा) में पार्टी का भरपूर साथ निभाया। उन्होंने बताया कि 20 विधायकों में सबसे ज्यादा 52 हजार वोटों की बढ़त बाबाजी काले ने हासिल किया था। लेकिन पार्टी ने उनकी उपेक्षा ही की।

अहीर ने बताया कि कि 2022 में जब महाविकास आघाड़ी सरकार गिरने वाली थी, उस वक्त सुषमा अंधारे ने मुझे फोन किया। अहीर के मुताबिक वे खुद उन्हें ‘मातोश्री’ लेकर गए थे। उस समय सुषमा अंधारे ने कहा था, मुझे कुछ नहीं चाहिए, लेकिन इस मुश्किल समय में मैं पार्टी के साथ खड़ी रहूंगी।

अहीर ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में सुषमा अंधारे ने पार्टी के लिए 100 से ज्यादा सभाएं कीं। उन्होंने एक दमदार प्रवक्ता के रूप में कई भ्रष्टाचार के मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाया, लेकिन जब विधान परिषद सीट की चर्चा हुई तो पार्टी ने उनके नाम पर विचार तक नहीं किया। अहीर ने अप्रत्यक्ष रूप से पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर मेहनत करने वाले और संघर्ष के समय पार्टी के साथ खड़े रहने वाले नेताओं को ही महत्व नहीं मिलेगा, तो कार्यकर्ताओं में नाराजगी बढ़ना स्वाभाविक है।

सचिन अहीर ने उद्धव गुट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब पार्टी में पात्रता के मापदंड ही स्पष्ट नहीं रह जाते, तब एक सामान्य कार्यकर्ता भी सोचने पर मजबूर हो जाता है कि आखिर पार्टी किस दिशा में जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि दिन-रात मेहनत करने वाले लोग ही पार्टी के मापदंड में फिट नहीं बैठ रहे हैं, तो यह स्थिति संगठन के लिए चिंताजनक है।

Created On :   5 July 2026 9:49 PM IST

Tags

Next Story