बॉम्बे हाई कोर्ट: गणपति उत्सव करीब होने के कारण प्रधानमंत्री की अपील पर इस वर्ष अमल संभव नहीं, सरकार ने दिया जवाब

गणपति उत्सव करीब होने के कारण प्रधानमंत्री की अपील पर इस वर्ष अमल संभव नहीं, सरकार ने दिया जवाब
  • राज्य सरकार के संबंधित मंत्री और अधिकारियों के साथ बैठक प्रधानमंत्री की अपील पर लिया गया फैसला
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात' कार्यक्रम में मिट्टी की गणपति प्रतिमाओं का उत्सव में उपयोग करने की थी अपील
  • 5 अगस्त मामले की अगली सुनवाई

Mumbai News. राज्य सरकार ने मंगलवार को बॉम्बे हाई कोर्ट में कहा कि गणेशोत्सव आने में बहुत कर दिन बचे हैं। प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) की प्रतिमाओं तैयार हो चुकी हैं। ऐसे में इस साल पीओपी प्रतिमाओं के गणेशोत्सव पर उपयोग करने पर पूरी तरह से रोक लगाना संभव नहीं है। अदालत ने पूछा कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गणेशोत्सव पर मिट्टी की गणेश प्रतिमाओं का उपयोग की अपील को क्या नहीं मानते है? इसके जवाब में राज्य के महाधिवक्ता मिलिंद साठे ने कहा कि सरकार प्रधानमंत्री के 26 जुलाई 2026 को ‘मन की बात' कार्यक्रम में मिट्टी की गणपति प्रतिमाओं का गणेशोत्सव में उपयोग करने की अपील को गंभीरता से ले रही है, लेकिन उस पर अमल अगले साल करने की कोशिश की जाएगी।

न्यायमूर्ति अजय गडकरी और न्यायमूर्ति कमल खाता की पीठ के समक्ष रोहित मनोहर जोशी की ओर से वकील रोनिता भट्टाचार्य की दायर जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई हुई। इस दौरान महाधिवक्ता मिलिंद साठे ने पीठ को बताया कि 31 जुलाई को संबंधित मंत्री, अधिकारियों, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), मूर्तिकारों और गणेशोत्सव मंडल के साथ बैठक हुई, जिसमें प्रधानमंत्री की अपील पर विचार किया गया। गणेशोत्सव करीब होने और पीओपी प्रतिमाओं के बनाए जाने के कारण इस साल प्रधानमंत्री की अपील पर अमल संभव नहीं है।

हाई कोर्ट ने 24 जुलाई 2025 को अपने फैसले में 6 फीट से कम उंची प्रतिमाओं को कृत्रिम तालाबों और उससे उंची प्रतिमाओं को प्राकृतिक जलाशयों में विसर्जन करने की इजाजत दी थी, उस पर राज्य सरकार इस साल भी पूरी तरह से अमल करेगी। राज्य भर में 28 लाख गणपति प्रतिमाओं का उपयोग किया गया था, जिसमें से केवल 31 हजार प्रतिमाओं का ही प्राकृतिक जलाशयों में विसर्जन किया गया था। अगले साल राज्य सरकार प्रधानमंत्री की मिट्टी की प्रतिमाओं के उपयोग करने की अपील पर अमल करने की कोशिश करेगी।

इस पर पीठ ने टिप्पणी की कि आप (राज्य सरकार) प्रधानमंत्री को बताइए कि उनकी अपील पर अगले साल अमल करेंगे। प्रधानमंत्री ने पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए लोगों को गणेशोत्सव पर मिट्टी की प्रतिमाओं का उपयोग करने की अपील की है। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील रोनिता भट्टाचार्य ने पीठ के संज्ञान में लाया कि पिछले साल हाई कोर्ट ने अपने फैसले में पीओपी की प्रतिमाओं के उपयोग की इस साल मार्च तक ही इजाजत दी थी।

सीपीसीबी ने 2020 में जारी दिशा-निर्देशों में पीओपी से बनी प्रतिमाओं के उपयोग पर रोक लगाने की सिफारिश की थी। 5 अगस्त को गणेशोत्सव मंडलों की ओर से पेश होने वाले वकील डा.उदय वारुंजीकर की दलील सुनने के बाद पीठ अपना फैसला सुनाएगा।

Created On :   4 Aug 2026 9:34 PM IST

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