सरकारी खजाने को चूना: योगेश कदम ने कहा - मुंबई पुलिस में 6.41 करोड़ रुपए के वेतन घोटाले में होगी कड़ी कार्रवाई

योगेश कदम ने कहा - मुंबई पुलिस में 6.41 करोड़ रुपए के वेतन घोटाले में होगी कड़ी कार्रवाई
  • आरोपी ने ले लिया है वीआरएस, 2019 में हुई थी यह हेराफेरी
  • फर्जी पुलिसकर्मियों के खातों में जमा हुआ वेतन

Mumbai News. मुंबई पुलिस में फर्जी कर्मचारियों के नाम पर वेतन जारी कर सरकारी खजाने को करीब 6.41 करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचाने के मामले में गृह राज्य मंत्री (शहर) योगेश कदम ने जांच के आदेश दिए हैं। इस प्रकरण में पांच अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, जिसमें से दो को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

मुंबई पुलिस के उत्तर प्रादेशिक विभाग द्वारा की गई आंतरिक जांच में वेतन प्रणाली से जुड़ी कई संदिग्ध प्रविष्टियां सामने आईं। जांच में कुछ कर्मचारियों के वेतन रिकॉर्ड में गड़बड़ी, अतिरिक्त भुगतान और पुलिस वेतन प्रणाली में कथित हेराफेरी का खुलासा हुआ। कदम ने कहा कि मामला साल 2019 का है। उस समय राज्य में महाविकास आघाडी की सरकार थी।

किस अवधि में हुआ ये घोटाला?

जानकारी के मुताबिक पुलिस विभाग की आंतरिक जांच में खुलासा होने के बाद विभाग ने समता नगर पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की। फर्जी कर्मचारियों के नाम पर वेतन जारी करने की अनियमितताएं दिसंबर 2019, जनवरी और फरवरी 2020 तथा जून से सितंबर 2020 के बीच जारी किए गए वेतन से संबंधित हैं। बताया जा रहा है कि वर्ष 2019-20 के वेतन खातों की जांच के दौरान भुगतान में गंभीर विसंगतियां सामने आईं, जिसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ।

पांच अधिकारियों-कर्मचारियों पर केस

इस मामले में वेतन और प्रशासनिक कार्यों से जुड़े पांच अधिकारी एवं कर्मचारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए दो कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है। इन सभी पर सरकारी धन के दुरुपयोग, फर्जी रिकॉर्ड तैयार करने और धोखाधड़ी जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई है कि प्रशासनिक और वेतन शाखा से जुड़े कुछ अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने कथित रूप से आपसी मिलीभगत से यह घोटाला किया। इस मामले का मास्टरमाइंड एक क्लर्क बताया जा रहा है जिसने इस घोटाले को अंजाम देने के बाद स्वैच्छिक सेवानिवृत्त योजना (वीआरएस) ले लिया था। गृह राज्य मंत्री योगेश कदम ने पूरे प्रकरण का संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही है।

डेटा ट्रांसफर के दौरान हुआ भंडाफोड़

आरोपी गैर-पुलिस व्यक्तियों को पुलिस कर्मचारी दिखाते थे, फिर उनके वेतन से जुड़े फर्जी रिकॉर्ड तैयार करते थे। फर्जी कर्मचारियों की प्रविष्टियां भी फर्जी तरीके से सत्यापित की जाती थीं। पुलिस कर्मचारी नहीं होने वाले लोगों को रिकॉर्ड में पुलिसकर्मी दिखाया गया और उनके नाम पर वेतन बना कर हड़प लिया गया। इसके लिए फर्जी वेतन लिस्ट भी तैयार की गईं हैं। इस मामले का मास्टरमाइंड एक क्लर्क बताया जा रहा है जिसने इस घोटाले को अंजाम देने के बाद वीआरएस ले लिया था। यह पूरा घोटाला सेवार्थ पेरोल सिस्टम के पुराने डेटा को नए डिजिटल सिस्टम में स्थानांतरित करने के दौरान पकड़ में आया। उत्तर क्षेत्रीय मंडल के एक पुलिस अधिकारी द्वारा दर्ज शिकायत के अनुसार, दिसंबर 2019 से फरवरी 2020 और जून से सितंबर 2020 के बीच वेतन वितरण में भारी विसंगतियां पाई गईं। जांच में 10 ऐसे प्रमुख नाम सामने आए हैं जो पुलिसकर्मी न होने के बावजूद सैलरी ले रहे थे, जिसमें रामदास भोगले, सुधाकर कदम, सरजू यादव, भागवत भोसले, गुणाजी खवणकर, महादेव हलदणकर, राजेंद्र सोनार, उत्तम थोरात, सूर्यकांत पाटिल और पांडुरंग कदम जैसे नाम शामिल हैं।

Created On :   4 Aug 2026 9:13 PM IST

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