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बॉम्बे हाई कोर्ट: पीडब्ल्यूडी की श्रेणी में अनियमितता मामले में कोर्ट ने कहा - केवल मेडिकल रिपोर्ट में अंतर के आधार पर कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जा सकती

Mumbai News. बॉम्बे हाई कोर्ट ने राज्य के सरकारी विभाग में नियुक्त दिव्यांग व्यक्तियों (पीडब्ल्यूडी) की श्रेणी में बड़े पैमाने पर अनियमितता के मामले में कहा है कि केवल मेडिकल रिपोर्ट में अंतर के आधार पर कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जा सकती है। मेडिकल जांच होगी, लेकिन उसके आधार पर तुरंत दंड नहीं दिया जा सकता है। एफआईआर और सस्पेंशन पर रोक लगाकर कर्मचारियों को राहत दी गई। यह राहत सभी समान मामलों पर लागू होगी, जिससे व्यापक सुरक्षा मिली है। इस तरह अदालत ने संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए एक ओर जांच जारी रहने दी, तो दूसरी ओर कर्मचारियों को तत्काल दंडात्मक कार्रवाई से संरक्षण दिया है। 9 अप्रैल को मामले की अगली सुनवाई रखी गई है।
न्यायमूर्ति रवींद्र वी. घुगे और न्यायमूर्ति अभय जे. मंत्री की पीठ ने संतोष हिरामन लश्करे समेत अन्य याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान कहा कि हम भी इसी तरह का एक आदेश पारित कर रहे हैं, जिसमें निर्देश दिया जाता है कि याचिकाकर्ता संबंधित अधिकारियों द्वारा अनिवार्य की गई मेडिकल जांच करवाएंगे। मेडिकल जांच के बाद केवल मेडिकल रिपोर्ट में किसी भी तरह के अंतर के आधार पर ऐसे याचिकाकर्ताओं के खिलाफ कोई भी जल्दबाजी वाला कदम नहीं उठाया जाएगा। इसमें अधिकारियों द्वारा एफआईआर दर्ज करने और कुछ याचिकाकर्ताओं के लिए जारी किए गए निलंबन के आदेश पर रोक लगा दी जाएगी।
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सरकारी वकील पी. पी. काकडे ने स्पष्ट रूप से कहा है कि जब न्यायालय ने याचिकाओं के पिछले समूह में ऐसे सुरक्षात्मक आदेश पारित किए थे, तब विभाग को उन आदेशों की सूचना दे दी गई थी। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सौरभ पाकाले ने पीठ ने मांग की कि न्यायालय द्वारा ऐसे आदेश पारित किए जाने के बावजूद जो लोग न्यायालय के समक्ष याचिकाकर्ता नहीं हैं, उन्हें निलंबन के आदेशों, प्रस्तावित एफआईआर पंजीकरण और अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है। इस पर पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ताओं को सुरक्षा प्रदान करने वाले ऐसे अंतरिम आदेश समान स्थिति वाले सभी व्यक्तियों पर लागू होंगे और विभाग इन आदेशों का संज्ञान लेगा, जिससे एफआईआर दर्ज करने या आगे निलंबन आदेश जारी करने से परहेज किया जा सके।
सभी याचिकाकर्ता दिव्यांग व्यक्तियों (पीडब्ल्यूडी) श्रेणी से संबंधित हैं। विभाग को संदेह था कि दिव्यांग व्यक्तियों श्रेणी में बड़े पैमाने पर अनियमितता (गलत वर्गीकरण) हुआ है। इसलिए याचिकाकर्ताओं को फिर से मेडिकल परीक्षण कराने का निर्देश दिया गया। इसको दिव्यांग व्यक्तियों ने हाई कोर्ट में याचिकाएं दायर कर चुनौती दी। नागपुर और औरंगाबाद पीठों तथा कोल्हापुर सर्किट पीठ से स्थानांतरित मामलों में पेश होने वाले सभी वकील बॉम्बे हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के आदेशों के तहत इस न्यायालय (मुंबई पीठ) के समक्ष एक साथ मिला दिया गया है।
Created On :   8 April 2026 9:51 PM IST












