भांडाफोड़: हजार करोड़ की ठगी का ब्लू प्रिंट था तैयार, एपीके फाइल फैक्ट्री का मास्टरमाइंड पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार

हजार करोड़ की ठगी का ब्लू प्रिंट था तैयार, एपीके फाइल फैक्ट्री का मास्टरमाइंड पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार
  • 70 हज़ार के धोखाधड़ी केस से मुंबई पुलिस ने किया 63 करोड़ की ठगी का भांडाफोड़
  • एपीके फाइल बनाकर 15-20 हज़ार रुपए में टेलीग्राम के ज़रिए साइबर ठगों को बेचता था आरोपी
  • आरोपी के पास से 967 रॉ एपीके फाइल बरामद और 37200 बैंक अकाउंट बरामद

Mumbai News. साइबर अपराध की काली दुनिया में डिजिटल हथियार सप्लाई करने वाले सबसे खतरनाक नेटवर्क का मुंबई पुलिस ने भांडाफोड़ किया है। डीबी मार्ग पुलिस ने एक ऐसे मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया है, जो देश भर के साइबर ठगों के लिए अदृश्य हथियार यानी फर्जी एपीके फाइलें तैयार करने की फैक्ट्री चला रहा था। महज 70,500 रुपये की धोखाधड़ी के एक मामूली केस से शुरू हुई यह पड़ताल जब आगे बढ़ी, तो पुलिस के भी होश उड़ गए और पूरे देश से 63 करोड़ रुपये की विशाल ठगी का पर्दाफाश हो गया।

छोटा मामला, बड़ा खुलासा

पूरे खेल का भंडाफोड़ तब हुआ, जब मुंबई के एक नागरिक को महानगर गैस लिमिटेड के नाम से एक फर्जी टेक्स्ट मैसेज मिला। मैसेज में लिखा था कि गैस कनेक्शन कटने से बचाने के लिए तुरंत दिया गया ऐप इंस्टॉल करें और बिल अपडेट करें। पीड़ित ने जैसे ही वह एपीके फाइल अपने फोन में डाउनलोड की, उसके फोन का पूरा कंट्रोल साइबर ठगों के पास चला गया और खाते से 70,500 रुपये साफ हो गए। मामला दर्ज होने के बाद डीबी मार्ग पुलिस स्टेशन की स्पेशल टेक्निकल टीम ने डिजिटल पैरों के निशानों का पीछा करना शुरू किया। पुलिस ने पाया कि इस अपराध के पीछे कोई आम ठग नहीं, बल्कि एक बेहद शातिर डेवलपर है जो पूरे देश के ठगों को ये फर्जी ऐप्स सप्लाई कर रहा है।

पश्चिम बंगाल से दबोचा गया मास्टरमाइंड

पुलिस उपायुक्त रागसुधा आर ने बताया कि पुलिस टीम ने तकनीकी निगरानी और खुफिया सूचनाओं के आधार पर आरोपी का पीछा शुरू किया। झारखंड के गिरिडीह से होते हुए पश्चिम बंगाल तक चले लंबे ऑपरेशन के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया, जिसकी पहचान एस के मंडल(26) के रूप में हुई है। आरोपी साइंस ग्रेजुएट है और आईटी में गहरी महारत रखता है। वह पिछले 6 महीने से इसी अवैध धंधे में लगा हुआ था और यूट्यूब से एपीके फाइल बनाना सीखा था।

1000 करोड़ की ठगी का खतरनाक ब्लू प्रिंट

जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी अब तक 91 एपीके फाइलें बाजार में बेच चुका था, जिनका इस्तेमाल करके साइबर अपराधियों ने देशभर में 2,993 निर्दोष लोगों को अपना शिकार बनाया और 63.69 करोड़ रुपये की चपत लगाई। इनमें से अकेले महाराष्ट्र और मुंबई में ही 512 शिकायतें दर्ज हैं। पुलिस ने आरोपी के ठिकाने से 967 रॉ एपीके फाइलें और 37,200 आम नागरिकों का गोपनीय बैंकिंग डेटाबेस बरामद कर लिया। आरोपी इन फाइलों को बेचने की तैयारी में ही था। रागसुधा आर के मुताबिक, अगर ये 967 फाइलें ठगों के हाथ लग जातीं, तो देश भर के लोगों से 1,000 करोड़ रुपये से भी अधिक की ठगी को अंजाम दे दिया जाता।

टेलीग्राम के जरिए चल रहा था ब्लैक मार्केट

आरोपी साइबर दुनिया का एक बड़ा सप्लायर बन चुका था। वह टेलीग्राम चैनल्स के जरिए नए और पुराने साइबर अपराधियों से संपर्क करता था। एक फर्जी एपीके फाइल की कीमत 15,000 से 20,000 रुपये तय की गई थी। खास बात यह थी कि वह खरीदार को उस ऐप का एक्सक्लूसिव कंट्रोल देता था, ताकि कोई दूसरा ठग उस फाइल का फायदा न उठा सके। हर फाइल 40 से 45 दिनों तक सक्रिय रहती थी। इसके साथ ही वह शिकार बनाने के लिए 37,200 लोगों का प्राइवेट बैंकिंग डेटा भी ठगों को मुहैया कराता था। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 10 मोबाइल फोन, 1 हाई-एंड लैपटॉप, 7 एक्टिव सिम कार्ड समेत कई अन्य चीजें बरामद की है। फिलहाल पुलिस इस बात का पता लगा रही है कि आरोपी से किन-किन राज्यों के ठगों ने ऐप्स खरीदे थे, ताकि इस पूरे सिंडिकेट को जड़ से खत्म किया जा सके।

Created On :   29 July 2026 9:48 PM IST

Tags

Next Story