कर्जमाफी की सूची पर बवाल: सैकड़ों किसानों ने कृषि मंत्री से की शिकायत, पात्र होने के बावजूद सूची से नाम गायब

सैकड़ों किसानों ने कृषि मंत्री से की शिकायत, पात्र होने के बावजूद सूची से नाम गायब
  • शरद पवार ने सरकार को दिया 15 दिन का अल्टीमेटम
  • सैकड़ों किसानों ने कृषि मंत्री से की शिकायत

Mumbai News. राज्य सरकार की 'पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी किसान कर्जमाफी योजना' की किसानों की सूची जारी होने के बाद राज्य में नया विवाद खड़ा हो गया है। बड़ी संख्या में किसानों ने आरोप लगाया है कि कर्जमाफी की सूची में गंभीर खामियां हैं। कई ऐसे किसानों के नाम सूची में शामिल किए गए हैं जिन पर या तो बिलकुल कर्ज नहीं है या तो बहुत कम कर्ज है, जबकि दो लाख रुपये तक के पात्र कर्जदार किसानों के नाम सूची से गायब हैं। इससे किसानों में भारी नाराजगी है। इसी को लेकर राज्य के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में किसानों ने सीधे कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे को शिकायत पत्र भेजे हैं। इस मुद्दे ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। राकांपा (शरद) अध्यक्ष शरद पवार ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि वह अगले 15 दिनों तक सरकार की कार्रवाई पर नजर रखेंगे। यदि इस अवधि में किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो सरकार के खिलाफ लड़ाई लड़ी जाएगी।

दूसरी सूची में 16.96 लाख किसान, लेकिन शिकायतों का अंबार

सरकार ने महाआयटी पोर्टल पर पात्र किसानों की सूची अपलोड कर दी है। पहली सूची में 533 किसानों के नाम थे, जबकि दूसरी सूची में करीब 16 लाख 96 हजार किसानों को शामिल किया गया है। किसानों का कहना है कि पात्र होने के बावजूद उनके नाम सूची में नहीं हैं, जबकि कुछ ऐसे लोगों को लाभार्थी बनाया गया है जिनका कर्ज बहुत कम है। सबसे अधिक शिकायतें राष्ट्रीयकृत बैंकों के खिलाफ सामने आई हैं।किसानों का आरोप है कि जब वे ई-केवाईसी कराने बैंकों में पहुंचते हैं तो बैंक के रिकॉर्ड में दर्ज कर्ज, बकाया राशि और ब्याज की रकम में भारी अंतर दिखाई देता है। इस कारण कई पात्र किसानों की कर्जमाफी प्रक्रिया अटक रही है। कई किसानों ने शिकायत की है कि बैंक उनके खाते में वास्तविक बकाया राशि से अधिक रकम दिखा रहे हैं, जिससे कर्जमाफी का लाभ मिलने में परेशानी हो रही है। यही वजह है कि बड़ी संख्या में किसानों ने कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

कृषि मंत्री ने बैंकों को दिए सख्त निर्देश

इस बीच कृषि मंत्री भरणे ने किसानों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए कहा कि जिला सहकारी बैंकों में ज्यादा समस्या नहीं है, लेकिन राष्ट्रीयकृत बैंकों के खिलाफ लगातार शिकायतें मिल रही हैं। उन्होंने बताया कि सरकार राष्ट्रीयकृत बैंकों और सहकारी बैंकों के बीच बैठक कर स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि दो लाख रुपये तक के सभी पात्र कृषि ऋणों की कर्जमाफी सुनिश्चित की जाए। भरणे ने कहा कि सरकार द्वारा निर्धारित नीति के अनुसार पात्र किसानों का कर्ज शून्य किया जाएगा और उन्हें 'निल प्रमाणपत्र' दिया जाएगा। इसके बाद किसान अगले ही दिन नया फसल ऋण लेने के पात्र होंगे।

56 लाख किसानों को मिलेगा लाभ

सरकार के अनुसार इस योजना के तहत राज्य के लगभग 56 लाख किसानों को कर्जमाफी का लाभ मिलेगा। पूरी योजना पर 36 हजार 585 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। सरकार ने इसके लिए मानसून सत्र में 20 हजार करोड़ रुपये की बजटीय व्यवस्था भी की है। इस बीच राकांपा (शरद) अध्यक्ष शरद पवार ने पुणे में कहा कि यदि पात्र किसानों के नाम सूची में जल्द नहीं जोड़े गए और बैंकिंग स्तर की विसंगतियां दूर नहीं हुईं, तो यह मुद्दा राजनीतिक और किसान आंदोलनों का बड़ा कारण बन सकता है। पवार ने सरकार को 15 दिन के भीतर सभी समस्याओं का हल करने की चेतावनी दी है।

Created On :   29 July 2026 7:57 PM IST

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