उठे सवाल: 72 साल बाद दिल्ली से बाहर राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, राज ठाकरे ने पूछा सवाल - गुजरात ही क्यों

72 साल बाद दिल्ली से बाहर राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, राज ठाकरे ने पूछा सवाल - गुजरात ही क्यों
  • महाराष्ट्र की अनदेखी पर भड़के मनसे प्रमुख
  • बोले- तमिलनाडु, केरल, तेलंगाना जैसे राज्यों को क्यों नहीं चुना?
  • कलाकारों आवाज उठाएं

डिजिटल डेस्क, मुंबई। राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के 72 साल के इतिहास में पहली बार पुरस्कार समारोह दिल्ली से बाहर आयोजित करने के फैसले ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। समारोह गुजरात में आयोजित किए जाने की खबर के बाद महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) अध्यक्ष राज ठाकरे ने केंद्र सरकार पर सवालों की बौछार कर दी है। राज ठाकरे ने सीधे पूछा कि आखिर राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के लिए गुजरात ही क्यों? यदि दिल्ली से बाहर समारोह आयोजित करने का फैसला लिया गया था तो सबसे पहले उस महाराष्ट्र के बारे में क्यों नहीं सोचा गया, जिसने देश को फिल्म उद्योग की पहचान दिलाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई है? उन्होंने सवाल किया कि दादासाहेब फाल्के की जन्मभूमि महाराष्ट्र में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह क्यों नहीं हो सकता?

महाराष्ट्र और दक्षिण के राज्यों को क्यों किया नजरअंदाज?

राज ठाकरे ने कहा कि महाराष्ट्र के साथ तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना का भी भारतीय सिनेमा में बेहद महत्वपूर्ण योगदान रहा है। ऐसे में इन राज्यों में से किसी को समारोह के लिए चुना जा सकता था। फिर अचानक गुजरात का चयन क्यों किया गया, इसका जवाब दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुद्दा सिर्फ एक पुरस्कार समारोह के स्थान का नहीं है। सवाल यह है कि 72 साल पुरानी राष्ट्रीय परंपरा को बदलने की जरूरत आखिर क्यों पड़ी? अगर दिल्ली के बाहर आयोजन करना ही था तो चयन के पीछे स्पष्ट और पारदर्शी कारण सामने आने चाहिए।

राज का हमला- देश का हर महत्वपूर्ण आयोजन गुजरात में क्यों?

राज ठाकरे ने इस फैसले को व्यापक राजनीतिक संदर्भ से जोड़ते हुए आरोप लगाया कि देश के महत्वपूर्ण कार्यक्रमों और परियोजनाओं का लगातार गुजरात की ओर केंद्रीकरण किया जा रहा है। उन्होंने मुंबई के महत्व को कम किए जाने के आरोपों के साथ अब दिल्ली की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि देश किसी एक राज्य से नहीं, बल्कि सभी राज्यों के योगदान से आगे बढ़ा है। इसलिए राष्ट्रीय स्तर के आयोजनों में किसी एक राज्य को बार-बार प्राथमिकता देना उचित नहीं है।

कलाकारों से आवाज उठाने की अपील

राज ठाकरे ने फिल्म इंडस्ट्री के कलाकारों और सिनेमा से जुड़े लोगों से भी इस मुद्दे पर आवाज उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने महाराष्ट्र और देश की फिल्म संस्कृति को समृद्ध किया है, उन्हें ऐसे फैसलों पर सवाल पूछने चाहिए।

Created On :   10 Sept 2026 9:19 PM IST

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