बड़ा आंदोलन: वोट चोरी के विरोध में मुंबई में विपक्ष का हल्लाबोल, आदित्य ठाकरे का मूक मोर्चा तो राज ठाकरे ने शुरू किया हस्ताक्षर अभियान - दिल्ली के जंतर-मंतर पर अब नहीं होंगे प्रदर्शन

वोट चोरी के विरोध में मुंबई में विपक्ष का हल्लाबोल, आदित्य ठाकरे का मूक मोर्चा तो राज ठाकरे ने शुरू किया हस्ताक्षर अभियान - दिल्ली के जंतर-मंतर पर अब नहीं होंगे प्रदर्शन
  • शिवाजी पार्क में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ फिर प्रदर्शन
  • जंतर-मंतर पर अब नहीं होंगे धरना-प्रदर्शन
  • एक बार फिर बदला विरोध-प्रदर्शनों का भूगोल

डिजिटल डेस्क, मुंबई. देश में कथित वोट चोरी और मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। दिल्ली में राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी दलों के आंदोलन के बीच मुंबई में भी शिवसेना (उद्धव), महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) और कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को शिवाजी पार्क के पास मीनाताई ठाकरे के पुतले के निकट आदित्य ठाकरे के नेतृत्व में प्रदर्शन किया गया। वहीं, मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे ने ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर हस्ताक्षर अभियान शुरू किया।

आदित्य ठाकरे का सवाल- देश में लोकतंत्र बचा है या नहीं?

शिवसेना (उद्धव) विधायक आदित्य ठाकरे ने रविवार के बाद सोमवार को भी आंदोलन में हिस्सा लिया। इस दौरान उनके साथ उनके छोटे भाई तेजस ठाकरे भी मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग के कामकाज और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध जताया। आदित्य ठाकरे ने आरोप लगाया कि आंदोलन करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा रही हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर देश में लोकतंत्र बचा है या नहीं? आदित्य ने कहा कि देश की सीमाओं की सुरक्षा के लिए तैनात सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को छात्रों के पीछे लगाया जा रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि मुंबई में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को बुलाया गया है। आदित्य ने चेतावनी दी कि यदि आंदोलनकारियों के खिलाफ मामले दर्ज किए जाते हैं, तो वे पुलिस थानों के बाहर बैठकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। उनके इस बयान से संकेत मिल रहे हैं कि चुनाव आयोग के खिलाफ आंदोलन आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है।

राज ठाकरे ने पत्नी और बेटे के साथ संभाला मोर्चा

दूसरी ओर राज ठाकरे ने ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर हस्ताक्षर अभियान की शुरुआत की। इस दौरान उनकी पत्नी शर्मिला ठाकरे और बेटे अमित ठाकरे भी उनके साथ मौजूद रहे। अमित ठाकरे ने छात्रों के आंदोलन का समर्थन करते हुए सवाल किया कि सुप्रीम कोर्ट आखिर कब तक छात्रों को रोकेगी? वहीं शर्मिला ठाकरे ने कहा कि छात्रों को कम करके नहीं आंकना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि पहले भाजपा से लोग घबराते थे, लेकिन अब छात्र खुलकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के खिलाफ अपनी आवाज उठा रहे हैं।

तिलक भवन में कांग्रेस का प्रदर्शन

मुंबई में कांग्रेस पदाधिकारियों ने भी कथित वोट चोरी के विरोध में प्रदर्शन किया। दादर स्थित प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय तिलक भवन परिसर में कार्यकर्ताओं ने जोरदार नारेबाजी की। इस दौरान ज्ञानेश कुमार, भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ नारे लगाए गए। दिल्ली से लेकर मुंबई तक विपक्षी दलों के एकजुट विरोध से महाराष्ट्र में चुनाव आयोग और मतदाता सूची का मुद्दा फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आया।

एक बार फिर बदला विरोध-प्रदर्शनों का भूगोल, जंतर-मंतर पर अब नहीं होंगे धरना-प्रदर्शन

उधर केन्द्र सरकार ने जंतर-मंतर को मिली आधिकारिक प्रदर्शन-स्थल की मान्यता खत्म कर दी है। दिल्ली पुलिस द्वारा जारी बयान के मुताबिक अब राजधानी दिल्ली में रामलीला मैंदान, बुराड़ी मैंदान और पूर्वी दिल्ली के सीबीडी ग्राउंड पर ही धरना-प्रदर्शन हो सकेंगे। कनॉट प्लेस के नजदीक स्थित जंतर-मंतर लंबे समय से धरना और विरोध प्रदर्शन का गवाह रहा है। यहां हुए आंदोलनों के बाद कई बार सरकारों को झुकना पड़ा है। लेकिन यह जानना जरूरी है कि इसके पहले सत्ता पक्ष को चुनौती देने का कार्य दिल्ली की किस जगह से होता था। जंतर-मंतर से पहले विरोध प्रदर्शन का मुख्य केन्द्र बोट क्लब हुआ करता था, जो मौजूदा कर्त्तव्य पथ के पास स्थित है। लेकिन 1988 में किसान नेता महेन्द्र सिंह टिकैत के नेतृत्व में हुए जबरदस्त आंदोलन ने सरकार की नींद उड़ा दी। तब लाखों की संख्या में बोट क्लब पहुंचे किसानों ने वहां न केवल कई दिनों तक खाना बनाया बल्कि अपने पशु भी बांध दिए थे। ऐसे हालात में सरकार ने राष्ट्रपति भवन, साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक के नजदीक बोट क्लब को प्रदर्शन स्थल की मान्यता खत्म कर दी और जंतर-मंतर को इसके लिए अधिसूचित किया।

1993 में पहली बार हुआ था यहां आंदोलन

जंतर-मंतर पर पहला जन आंदोलन 1993 में हुआ था, जब डूसू प्रेसिडेंट आशीष सूद के नेतृत्व में सरकार के एक निर्णय के विरूद्ध प्रदर्शन हुआ था। इसके बाद तो यहां कई ऐतिहासिक प्रदर्शन हुए, जिनमें 2011 में अन्ना आंदोलन, 2012 में निर्भया आंदोलन, 2019 में नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ आंदोलन, 2021 का किसान आंदोलन, 2023 में कुश्ती खिलाड़ियों का आंदोलन आदि का नाम प्रमुखता से शामिल है। हालांकि एनजीटी ने वष 2017 में जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शनों पर यह कहकर रोक लगा दी थी कि यहां की हरियाली खत्म हो रही है। लेकिन 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने एनजीटी के इस आदेश पर रोक लगाते हुए जंतर-मंतर पर धरना करने की इजाजत दे दी।


Created On :   12 Oct 2026 10:10 PM IST

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