बॉम्बे हाई कोर्ट: नरेंद्र दाभोलकर हत्याकांड मामले में मुख्य दोषी सचिन अंदुरे को मिली जमानत, आजीवन कारावास की सजा पर लगाई रोक

नरेंद्र दाभोलकर हत्याकांड मामले में मुख्य दोषी सचिन अंदुरे को मिली जमानत, आजीवन कारावास की सजा पर लगाई रोक
  • बॉम्बे हाई कोर्ट ने अंदुरे के आजीवन कारावास की सजा पर लगाई रोक
  • हत्या के लिए अंदुरे और शरद कलसकर को दोषी ठहराया और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी

Mumbai News. बॉम्बे हाई कोर्ट ने मंगलवार को सामाजिक कार्यकर्ता और तर्कवादी नरेंद्र दाभोलकर की 2013 में हुई हत्या के मामले में दोषी सचिन अंदुरे को जमानत दे दी। 10 मई 2024 को पुणे सेशन कोर्ट ने दाभोलकर की हत्या के लिए अंदुरे और शरद कलसकर को दोषी ठहराया और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इस मामले में कलसकर को पहले ही जमानत मिल चुकी है। न्यायमूर्ति सारंग कोतवाल और न्यायमूर्ति रणजीत सिंह भोंसले की पीठ ने सचिन अंदुरे की याचिका को स्वीकार करते हुए पुणे सेशन कोर्ट के 2024 में अंदुरे को सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा को निलंबित कर दी है। अंदुरे पर सामाजिक कार्यकर्ता गोविंद पानसरे की हत्या के मामले में भी मुकदमा चल रहा है। अब वह जेल से बाहर आ सकते हैं, क्योंकि उन्हें दोनों मामलों में जमानत मिल गई है।

महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति (अंधविश्वास विरोधी संगठन) के संस्थापक 67 वर्षीय दाभोलकर की 20 अगस्त 2013 को पुणे में सुबह की सैर के दौरान मोटरसाइकिल सवार दो हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। शुरुआत में मामले की जांच पुणे पुलिस ने की थी, लेकिन उनकी बेटी मुक्ता दाभोलकर द्वारा हाई कोर्ट में याचिका दायर करने के बाद 2014 में जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई थी। अभियोजन पक्ष ने दावा किया था कि दाभोलकर पर गोली चलाने वाले शूटरों में से अंदुरे एक थे। हालांकि उन्हें कड़े गैर-कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) और आर्म्स एक्ट के तहत लगे आरोपों से बरी कर दिया गया था। सेशन कोर्ट ने इस मामले में सबूतों की कमी का हवाला देते हुए तीन आरोपियों वीरेंद्र सिंह तावड़े, संजीव पुनालेकर और विक्रम भावे को भी बरी कर दिया था। अंदुरे ने अपनी सजा को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में अपील दायर की थी और एक अंतरिम याचिका में जमानत और अपनी उम्रकैद की सजा पर रोक लगाने की मांग की थी। हाई कोर्ट ने अंदुरे की याचिका मंजूर कर ली।

दाभोलकर की बेटी मुक्ता ने भी हाई कोर्ट में अपील दायर करके इस मामले में बरी किए जाने और अंदुरे व कलसकर के खिलाफ यूएपीए के आरोप न लगाने के फैसले को चुनौती दी थी। अपनी याचिका में उन्होंने आरोप लगाया कि यह हत्या दक्षिणपंथी चरमपंथियों की एक बड़ी साजिश का हिस्सा थी। दाभोलकर की हत्या समेत तीन अन्य तर्कवादियों की इसी तरह की हत्याओं की कड़ी में पहली घटना थी। इनमें फरवरी 2015 में कोल्हापुर में गोविंद पानसरे, अगस्त 2015 में धारवाड़ में कन्नड़ भाषा के विद्वान एम.एम. कलबुर्गी और सितंबर 2017 में बेंगलुरु में पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या शामिल है।

Created On :   18 Aug 2026 8:56 PM IST

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