अंदरूनी खटपट !: फिर सीएम के साथ बैठक में नहीं पहुंचे शिंदे, विधान परिषद चुनाव को लेकर महायुति में अनबन

फिर सीएम के साथ बैठक में नहीं पहुंचे शिंदे, विधान परिषद चुनाव को लेकर महायुति में अनबन
  • चव्हाण के साथ कल अमरावती जाएंगे सामंत
  • सीएम के साथ बैठक में नहीं पहुंचे शिंदे

डिजिटल डेस्क, मुंबई. महाराष्ट्र में विधान परिषद चुनाव को लेकर महायुति में फिर मनमुटाव पैदा हो गया है। शिवसेना (शिंदे) के मुख्य नेता व उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे गुरुवार को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई महाडीबीटी बैठक में नहीं पहुंचे जबकि तय कार्यक्रम के अनुसार श्री शिंदे को इस बैठक में शामिल होना था।

गुरुवार की दोपहर 12.45 बजे निर्धारित इस बैठक से शिंदे की गैरहाजिरी के बाद एक बार फिर शिंदे की नाराजगी को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। हालांकि, उनकी अनुपस्थिति का कारण स्पष्ट नहीं हुआ है। इसके पहले 13 अक्टूबर को मुख्यमंत्री के साथ हुई नगरविकास विभाग की बैठक में भी शिंदे नहीं गए थे जबकि वे नगर विकास विभाग के मंत्री हैं। इस बीच, उद्योग मंत्री उदय सामंत ने दावा किया कि विधान परिषद चुनाव में बगावत रोकने के लिए बातचीत से रास्ता निकल सकता है। उन्होंने कहा कि अगले दो दिनों में चुनाव को लेकर समाधान निकलने की उम्मीद है। ऐसे में अब सबकी नजर इस बात पर है कि महायुति के घटक दलों के बीच उम्मीदवारों को लेकर जारी खींचतान कैसे खत्म होती है। बता दें कि पुणे शिक्षक सीट से शिवसेना (शिंदे) अपना उम्मीदवार चाहती थी पर भाजपा यह सीट छोड़ने के लिए तैयार नहीं हुई।

‘अमरावती का उम्मीदवार हमारा नहीं, तो संभाजीनगर के उम्मीदवार का क्या?’

अमरावती के उम्मीदवार को लेकर राकांपा (अजित) के विधायक संजय खोडके की भूमिका पर मंत्री सामंत ने सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि अगर संजय खोडके कहते हैं कि अमरावती का उम्मीदवार हमारा नहीं है, तो क्या छत्रपति संभाजीनगर के सतीश चव्हाण के बारे में भी यही कहा जाएगा कि वे हमारे नहीं हैं?’बता दें कि सतीश चव्हाण राकांपा (अजित) के उम्मीदवार हैं। जबकि अमरावती शिक्षक सीट से शिवसेना (शिंदे) के उम्मीदवार किरण नाईक मैदान में हैं।

पुणे के उम्मीदवार पर शिवसेना का ठप्पा क्यों?

पुणे शिक्षक सीट की उम्मीदवारी पर सामंत ने कहा कि वहां शिवसेना का उम्मीदवार नहीं है। संबंधित व्यक्ति पहले उनके विशेष कार्य अधिकारी (ओएसडी) थे, लेकिन अब उनके साथ काम नहीं करते। वे पहले से ही शिक्षा क्षेत्र में सक्रिय हैं और कई संस्थाओं से जुड़े हुए हैं। ऐसे में उन पर बेवजह शिवसेना (शिंदे) का ठप्पा लगाया जा रहा है। शिवसेना (शिंदे) सामंत ने अभिमन्यु पवार और सुमित वानखेड़े का उदाहरण देते हुए कहा कि वे भी पहले सरकारी अधिकारी थे। अपने काम के आधार पर वे विधायक बने। उनके मुताबिक, किसी व्यक्ति के पूर्व प्रशासनिक पद के आधार पर उसे किसी राजनीतिक दल का उम्मीदवार मान लेना उचित नहीं है।

चव्हाण के साथ कल अमरावती जाएंगे सामंत

सामंत ने बताया कि वे शुक्रवार को भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण के साथ अमरावती जाएंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि बातचीत के जरिए बगावत रोकने का रास्ता निकलेगा और अगले दो दिनों में समाधान हो जाएगा

Created On :   15 Oct 2026 10:07 PM IST

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