उठाया मुद्दा: ओबीसी-कुनबी प्रमाणपत्र विवाद पर कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार का सवाल, नियमों के विरुद्ध थे तो दिए ही क्यों

ओबीसी-कुनबी प्रमाणपत्र विवाद पर कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार का सवाल, नियमों के विरुद्ध थे तो दिए ही क्यों
  • राजनीतिक लाभ के लिए प्रमाणपत्र बांटना उचित नहीं
  • जनप्रतिनिधि सरकार द्वारा जारी प्रमाणपत्रों के आधार पर चुनाव लड़े थे

Nagpur News. मराठा समाज के कुछ जनप्रतिनिधियों को जारी किए गए ओबीसी और कुणबी जाति प्रमाणपत्र ,जाति वैधता जांच समिति द्वारा रद्द किए जाने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। इस मुद्दे पर कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने महायुति सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए सवाल उठाया कि यदि ये प्रमाणपत्र कानूनी मानकों पर खरे नहीं उतरते थे, तो सरकार ने इन्हें जारी ही क्यों किया।

हाल ही में मराठवाड़ा के तीन जिला परिषद सदस्यों और एक नगरसेवक के कुणबी जाति प्रमाणपत्र अमान्य घोषित किए गए। इसके चलते उनकी सदस्यता रद्द हो गई। ये सभी जनप्रतिनिधि सरकार द्वारा जारी प्रमाणपत्रों के आधार पर चुनाव लड़े थे और निर्वाचित हुए थे। अब प्रमाणपत्र रद्द होने के कारण संबंधित सीटों पर दोबारा चुनाव कराने की स्थिति बन गई है।

राजनीतिक लाभ के लिए प्रमाणपत्र बांटना उचित नहीं

वडेट्टीवार ने कहा कि ओबीसी आरक्षण संविधान प्रदत्त अधिकार है और इसके साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि केवल वही निर्णय अदालत में टिकते हैं जो कानून और निर्धारित नियमों के अनुरूप लिए जाते हैं। राजनीतिक लाभ के लिए जाति प्रमाणपत्र बांटना उचित नहीं है। उनकी वैधता ठोस दस्तावेजों और कानूनी मानकों पर आधारित होनी चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि नियमों के विरुद्ध जारी किए गए प्रमाणपत्र अंततः रद्द हो जाते हैं, जिसका नुकसान न केवल जनप्रतिनिधियों बल्कि आम नागरिकों को भी उठाना पड़ता है। वडेट्टीवार ने सरकार से पूछा, "यदि ये प्रमाणपत्र नियमों के अनुरूप नहीं थे, तो इन्हें जारी करने की जरूरत ही क्या थी? आखिर किसके दबाव में यह फैसला लिया गया?"

उधर, मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटील ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने महायुति के नेताओं को चुनाव में हराने की अपील करते हुए राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे पर निशाना साधा। साथ ही उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर मराठा समाज के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया।

इस विवाद के बाद महाराष्ट्र में एक बार फिर मराठा और कुणबी आरक्षण का मुद्दा राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह मामला और अधिक तूल पकड़ सकता है।

Created On :   6 Aug 2026 8:20 PM IST

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