- Home
- /
- राज्य
- /
- महाराष्ट्र
- /
- नागपुर
- /
- बच्चे को डायबिटीज होता है, तो उसका...
मधुर पाठशाला: बच्चे को डायबिटीज होता है, तो उसका प्रभाव पूरे परिवार पर पड़ता है - रूटीन बनाना बेहद महत्वपूर्ण
Nagpur News. उपराजधानी में टाइप 1 डायबिटीज के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से एक सेमिनार आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम इंडियन मेडिकल एसोसिएशन भवन में “मधुर पाठशाला” के बैनर तले सिल्वर लाइनिंग पीडियाट्रिक फाउंडेशन द्वारा आयोजित किया गया। दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई, जिसमें टाइप 1 डायबिटीज से प्रभावित बच्चे और उनके अभिभावक शामिल हुए।
इस अवसर पर पीडियाट्रिक एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. निखिल लोहिया ने कहा कि जब किसी बच्चे को डायबिटीज होता है, तो उसका प्रभाव पूरे परिवार पर पड़ता है, क्योंकि बच्चा परिवार के सदस्यों पर निर्भर होता है। ऐसे में परिवार के हर सदस्य की जिम्मेदारी बनती है कि वे बच्चे का सही तरीके से ध्यान रखें। उन्होंने कहा कि डायबिटीज के बारे में सही जानकारी होना अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने आगे बताया कि सामाजिक परिवेश में अभिभावक अक्सर इस बात को लेकर चिंतित रहते हैं कि लोग टाइप 1 डायबिटीज के बारे में क्या सोचेंगे। बच्चों के सामने भी सामान्य बच्चों की तुलना में अधिक चुनौतियां होती हैं, लेकिन इन बातों को लेकर अधिक चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। टाइप 1 डायबिटीज से ग्रसित बच्चे सामान्य रूप से सभी प्रकार का भोजन कर सकते हैं, बशर्ते इंसुलिन की मात्रा और समय का सही प्रबंधन किया जाए। इंसुलिन के विभिन्न प्रकार होते हैं, जिन्हें बच्चों की जरूरत के अनुसार दिया जाता है।
डॉ. लोहिया ने कहा कि यदि इंसुलिन का सही तरीके से प्रबंधन किया जाए, तो कोई विशेष परेशानी नहीं होती। बच्चों को नियमित दिनचर्या में ढालना प्रारंभ में कठिन हो सकता है, लेकिन एक बार रूटीन बन जाने पर सब कुछ आसान हो जाता है। उन्होंने जंक फूड से बचने और संतुलित आहार लेने की सलाह दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि टाइप 1 डायबिटीज का मुख्य कारण शरीर में इंसुलिन का न बनना है, इसलिए बाहरी रूप से इंसुलिन दिया जाता है। इसे केवल बीमारी के रूप में न देखकर सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
उन्होंने यह भी सलाह दी कि बुखार या बीमारी के समय तुरंत उपचार लेना चाहिए और इंसुलिन लेना बिल्कुल बंद नहीं करना चाहिए। यदि उल्टी हो रही हो, तो कीटोन स्तर की जांच करें, और सांस लेने में कठिनाई होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
कार्यक्रम के दौरान नर्सरी कक्षा की एक बच्ची ने नृत्य प्रस्तुति दी, जिसे उपस्थित लोगों ने खूब सराहा।
इसके अलावा बच्चों ने एक स्किट प्रस्तुत किया, जिसमें उन्होंने बताया कि यदि खेलते समय चक्कर आएं, कमजोरी महसूस हो या अस्वस्थता लगे, तो तुरंत शुगर की जांच करनी चाहिए। यदि शुगर कम हो, तो तुरंत मीठा देना चाहिए और 15 मिनट बाद दोबारा शुगर की जांच करनी चाहिए।
बच्चों के जिद्दी व्यवहार और उनकी बात न मानने से संबंधित एक प्रश्न के उत्तर में डेवलपमेंटल पीडियाट्रिशियन डॉ. निराली लोहिया ने कहा कि बच्चों को छोटी उम्र से ही समझाना और सिखाना जरूरी है। कई बार बच्चे अभिभावकों की समस्याओं और उनके त्याग को नहीं समझ पाते। ऐसे में अभिभावकों को भी धैर्य रखना चाहिए, बच्चों को समझना चाहिए और किसी भी स्थिति में उन पर हाथ नहीं उठाना चाहिए। साथ ही बच्चों को भी यह समझाना आवश्यक है कि उनके माता-पिता जो भी करते हैं, वह उनकी भलाई के लिए ही होता है।
डॉ. निराली लोहिया ने कहा कि टाइप 1 डायबिटीज से पीड़ित बच्चों के खानपान को लेकर जिद करना बहुत सामान्य बात है, लेकिन इसे संभालने का तरीका समझदारी और धैर्य से भरा होना चाहिए।
दिए खास टिप्स
- सबसे पहले, बच्चों को डांटने या जबरदस्ती करने से स्थिति और बिगड़ सकती है। बेहतर है कि उन्हें उनकी भाषा में सरल तरीके से समझाया जाए कि कौन-सा खाना उनके शरीर के लिए अच्छा है और क्यों। उदाहरण के तौर पर, आप उन्हें बता सकते हैं कि सही खाना खाने से उन्हें खेलने, पढ़ने और एक्टिव रहने में मदद मिलेगी।
- बच्चों को विकल्प देना भी काफी प्रभावी होता है। जैसे, “तुम्हें ये हेल्दी खाना खाना है” कहने के बजाय, “तुम फल खाओगे या सलाद?” इस तरह उन्हें लगता है कि वे खुद निर्णय ले रहे हैं।
- खाने को दिलचस्प बनाना भी जरूरी है। रंग-बिरंगे, आकर्षक और स्वादिष्ट तरीके से हेल्दी फूड तैयार करें, ताकि बच्चे खुद उसमें रुचि लें। कभी-कभी उनकी पसंद को ध्यान में रखते हुए हेल्दी वर्जन बनाना भी मददगार होता है।
- रूटीन बनाना बेहद महत्वपूर्ण है। तय समय पर खाना और इंसुलिन का सही प्रबंधन बच्चों को धीरे-धीरे आदत में ढाल देता है, जिससे जिद कम होती है। साथ ही, अभिभावकों को खुद भी उदाहरण बनना चाहिए। जब पूरा परिवार हेल्दी खानपान अपनाता है, तो बच्चे भी उसे आसानी से स्वीकार करते हैं।
- सबसे अहम बात, बच्चों की भावनाओं को समझें। यदि वे जिद कर रहे हैं, तो उसके पीछे कोई कारण हो सकता है। जैसे दोस्तों जैसा खाना न मिलना या बार-बार टोकना। ऐसे में उनसे शांत तरीके से बात करें और उन्हें भरोसा दिलाएं कि वे भी सामान्य जीवन जी सकते हैं।
Created On :   29 April 2026 6:16 PM IST













