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सूखे का खतरा: राहत की बारिश पर लंबा अंतराल पड़ रहा भारी, धान-कपास और तुअर के लिए नमी की कमी तो कुछ क्षेत्रों में रोग व कीटों से नुकसान की चिंता
डिजिटल डेस्क, नागपुर. मानसून के अंतिम चरण में बारिश की अनियमितता ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। बारिश के बीच लंबे अंतराल के कारण खेतों में नमी की कमी होने लगी है और इसका असर खरीफ फसलों पर दिखाई दे रहा है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार धान, कपास और तुअर को इस समय पर्याप्त नमी की जरूरत है। बारिश का खंड आगे भी बढ़ा तो इन फसलों की बढ़वार और उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। वहीं सोयाबीन के लिए मौजूदा स्थिति अपेक्षाकृत संतोषजनक बताई जा रही है।
फसलों को लंबे ड्राय स्पेल का नुकसान
कृषि विशेषज्ञ विनोद खडसे के मुताबिक विदर्भ में बारिश का वितरण समान नहीं रहा है। कई क्षेत्रों में बारिश औसत से कम रही है, जबकि कुछ जगह कम समय में तेज बारिश हुई है। ऐसे में खेतों में लगातार नमी बनाए रखना चुनौती बना हुआ है। विशेष रूप से धान, कपास और तुअर की फसलों को लंबे ड्राय स्पेल का नुकसान हो सकता है।
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फसल को बचाने की जरूरत
कृषि विभागीय सांख्यिकी मिलिंद चंद्रमणि ने कहा कि जिले में फिलहाल संतरे की खेती 19,531.6 हेक्टेयर, नींबू की 92.16 हेक्टेयर और मोसंबी की 8,891.3 हेक्टेयर क्षेत्र में की जा रही है। फसलों में फफूंदजनित रोगों के कारण होने वाले फल-पातन से बचाव के लिए किसानों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। किसानों को समय पर फसल की निगरानी कर आवश्यक उपाय करने चाहिए।
145.20 लाख हेक्टेयर लक्ष्य
महाराष्ट्र सरकार ने 2026 के खरीफ सीजन में 145.20 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुआई का लक्ष्य रखा था। जुलाई के अंत तक सोयाबीन की बुआई करीब 44.30 लाख हेक्टेयर और कपास की 35.97 लाख हेक्टेयर तक पहुंच चुकी थी। सितंबर की शुरुआत में राज्य का खरीफ रकबा निर्धारित लक्ष्य से करीब 5% कम बताया गया। बारिश के असमान वितरण से अब बुआई के बजाय फसलों की बढ़वार और उत्पादन पर असर की चिंता बढ़ गई है। राज्य के 83 तालुकों में 20 से 38 दिन तक बारिश का खंड दर्ज होने की रिपोर्ट सामने आई है। इनमें विदर्भ के बुलढाणा, अकोला, अमरावती और नागपुर जिले के 20 तालुके भी शामिल हैं। इतने लंबे अंतराल को खरीफ फसलों के लिए गंभीर माना जा रहा है।
नींबू वर्गीय फसलें बारिश पर निर्भर
विदर्भ में खरीफ के साथ नींबू वर्गीय फलों का भी बड़ा क्षेत्र है। इस वर्ष मैंडरिन संतरा कुल 23,979.8 हेक्टेयर क्षेत्र में से 19,531.6 हेक्टेयर, नींबू/लाइम कुल 122.16 हेक्टेयर में से 92.16 हेक्टेयर तथा मोसंबी/स्वीट ऑरेंज कुल 11,354.05 हेक्टेयर में से 8,891.3 हेक्टेयर क्षेत्र में लगाई गई है। लंबे समय तक बारिश का खंड रहने पर इन बागों में भी मिट्टी की नमी और सिंचाई प्रबंधन चुनौती बन सकता है।
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कुछ क्षेत्रों में धान पर रोग की चिंता
विदर्भ के कुछ धान उत्पादक क्षेत्रों में बारिश की अनियमितता के साथ ब्राउन रॉट बीमारी को लेकर भी चिंता बनी हुई है। फसल में रोग का प्रकोप बढ़ने पर उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इसलिए किसानों को खेतों की नियमित निगरानी और कृषि विभाग की सलाह के अनुसार रोग नियंत्रण उपाय करने की जरूरत है।
सितंबर की बारिश पर टिकी उम्मीद
सितंबर में बारिश सामान्य से कम रहने की स्थिति बनी हुई है। 2026 में कमजोर मानसून और सितंबर की बारिश की कमी के कारण कपास, सोयाबीन, धान और अन्य खरीफ फसलों के महत्वपूर्ण विकास चरणों में पर्याप्त नमी को लेकर चिंता जताई गई है। महाराष्ट्र में सितंबर के पहले 11 दिनों में भी औसत से 17% कम बारिश दर्ज होने की रिपोर्ट सामने आई है। ऐसे में अब विदर्भ के किसानों की नजर सितंबर की शेष बारिश पर है। समय पर बारिश हुई तो फसलों को अंतिम चरण में आवश्यक नमी मिल सकती है, लेकिन बारिश का खंड और लंबा हुआ तो खरीफ उत्पादन के साथ फल फसलों पर भी दबाव बढ़ सकता है।
Created On :   14 Sept 2026 6:51 PM IST












