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प्राथमिकताओं पर मंथन: महाराष्ट्र में बच्चों और किशोरों के पोषण को लेकर बनेगी जिला-स्तरीय रणनीति, बाल मोटापा और पोषण पर जोर

डिजिटल डेस्क, नागपुर। महाराष्ट्र में बच्चों और किशोरों के स्वास्थ्य एवं पोषण को बेहतर बनाने के उद्देश्य से यूनिसेफ (UNICEF), महाराष्ट्र इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (MAHAIAP) और स्वास्थ्य सेवा निदेशालय (DHS) के संयुक्त तत्वावधान में उच्चस्तरीय परामर्श बैठक आयोजित की गई। बैठक में चिकित्सीय एवं वैज्ञानिक साक्ष्यों को प्रभावी पोषण नीतियों, कार्यक्रमों और मापनीय क्रियान्वयन में बदलने पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में वरिष्ठ शासकीय अधिकारी, यूनिसेफ के प्रतिनिधि, बाल रोग विशेषज्ञ, चिकित्सा महाविद्यालयों के प्राध्यापक और सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ शामिल हुए। इस दौरान महाराष्ट्र में कुपोषण के दोहरे बोझ (Double Burden of Malnutrition-DBM), बच्चों एवं किशोरों के पोषण तथा नैदानिक सेवाओं और सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों के बीच बेहतर समन्वय जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया।
जिला स्तर पर पोषण प्राथमिकताएं तय करने पर जोर
इस बैठक में डबल बर्डन इंडेक्स (DBI) के माध्यम से जिलावार पोषण संबंधी चुनौतियों की पहचान कर उसी के अनुरूप योजना बनाने को महत्वपूर्ण बताया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि प्रत्येक जिले की पोषण संबंधी स्थिति अलग हो सकती है, इसलिए स्थानीय जरूरतों के आधार पर साक्ष्य-आधारित रणनीति तैयार करना जरूरी है।
इसके साथ ही बच्चों में कम उम्र से विकास रुकने (Stunting), आहार संबंधी विकारों का समय रहते निदान एवं उपचार, स्कूल स्वास्थ्य, किशोर पोषण, बाल मोटापा और गैर-संचारी रोगों (NCDs) की रोकथाम पर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई गई।
पांच प्रमुख नीतिगत सिफारिशें
1. DBI आधारित जिला पोषण योजना: प्रत्येक जिले की स्थानीय पोषण चुनौतियों के अनुसार प्राथमिकताएं तय करते हुए DBI आधारित जिला पोषण नियोजन को मजबूत करने की सिफारिश की गई। स्वास्थ्य सुविधाओं और जिला स्तर पर DBI रणनीति लागू करने के साथ मापनीय संकेतकों तथा नियमित निगरानी की व्यवस्था पर जोर दिया गया।
2. Stunting और आहार संबंधी विकारों का जल्द उपचार: बच्चों में विकास रुकने और आहार संबंधी विकारों की जल्द पहचान, उपचार, पोषण परामर्श और उचित रेफरल सेवाओं को मजबूत करने की आवश्यकता बताई गई।
3. मोटापा और NCDs की रोकथाम: बाल मोटापा, किशोर पोषण और गैर-संचारी रोगों की रोकथाम को मौजूदा स्वास्थ्य तथा स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रमों से प्रभावी रूप से जोड़ने की सिफारिश की गई।
4. चिकित्सा एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र में साझेदारी: MAHAIAP के बाल रोग विशेषज्ञों, DHS के चिकित्सा अधिकारियों और DMER के अधीन चिकित्सा महाविद्यालयों के प्राध्यापकों के बीच एक संरचित चिकित्सा–सार्वजनिक स्वास्थ्य साझेदारी विकसित करने पर जोर दिया गया।
5. विशेषज्ञों की सक्रिय भागीदारी: जिला स्तरीय कार्ययोजनाओं, क्षमता-वर्धन, DBI के क्रियान्वयन और निगरानी में MAHAIAP के बाल रोग विशेषज्ञों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने की सिफारिश की गई।
बाल रोग विशेषज्ञ निभा सकते हैं सेतु की भूमिका
बैठक में कहा गया कि बाल रोग विशेषज्ञ चिकित्सीय साक्ष्यों और जमीनी स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन के बीच महत्वपूर्ण सेतु की भूमिका निभा सकते हैं। उनकी विशेषज्ञता का उपयोग जिला स्तर की कार्ययोजनाओं को तैयार करने, स्वास्थ्यकर्मियों की क्षमता बढ़ाने, पोषण संबंधी रणनीतियों के क्रियान्वयन और परिणामों की निगरानी में किया जा सकता है।
- मिशन - चिकित्सीय एवं वैज्ञानिक साक्ष्यों को प्रभावी नीतियों और मापनीय कार्रवाई में बदलना।
- विजन - महाराष्ट्र के प्रत्येक जिले में स्थानीय और विशिष्ट पोषण चुनौतियों की पहचान कर जरूरत के अनुसार साक्ष्य-आधारित एवं मापनीय हस्तक्षेप लागू करना, ताकि प्रत्येक बच्चे और किशोर के स्वास्थ्य, वृद्धि और समग्र विकास में स्थायी सुधार सुनिश्चित किया जा सके।
Created On :   9 Sept 2026 5:18 PM IST












