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Nagpur News: 663 अस्पतालों की जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग ने बनाई 15 चिकित्सकों की टीम

Nagpur News शहर में अस्पतालोें से नियमों के उल्लंघन को लेकर शुक्रवार को स्वास्थ्य अधिकारी डॉ दीपक सेलाेकार ने बैठक ली है। सभी 10 जोनल अधिकारियों के साथ ही मुख्यालय के दो चिकित्सकों को शहर के सभी अस्पतालों की जांच का निर्देश दिया गया है। इससे पहले शुक्रवार को स्वास्थ्य अधिकारी डॉ दीपक सेलाेकार के नेतृत्व में मैक्स अस्पताल में भी जांच की गई। अस्प्ताल में 200 बेड की अनुमति के अनुसार ही बेड पाएं गए है। शहर के सभी 663 अस्पतालों में पार्किग समेत इमारत निर्माणकार्य को लेकर नगररचना विभाग से जांच की जाएंगी। गुरूवार को भी आमसभा के समाप्त होने के बाद मनपा के स्वास्थ्य विभाग से दो अस्पतालों में जांच की गई। अतिरिक्त स्वास्थ्य अधिकारी डॉ नरेन्द्र बहिरवार समेत अन्य चिकित्सकों ने रेडियन्स अस्पताल और सीए रोड पर चांडक अस्पताल में जांच की। जांच दल को रेडियन्स अस्पताल में मान्य 50 बेड में से केवल 43 ही बेड नजर आएं, जबकि चांडक अस्पताल में मान्य 50 बेड में से 25 बेड ही मिले। दोनों अस्पताल में बेड को लेकर नियम उल्लंघन को लेकर मामला नहीं मिला है। महापौर नीता ठाकरे और आयुक्त डॉ विपिन प्रत्यक्ष तौर पर पूरे जांच अभियान की निगरानी कर रहे है।
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663 अस्पतालों की होगी कड़ी जांच
आमसभा में दो नगरसेवकों रितेश पांडे और आभा पांडे ने अस्पतालों में नियमों के उल्लंघन को लेकर सवाल किया था। इसके जवाब में स्वास्थ्य अधिकारी डॉ दीपक सेलाेकार ने सदन में बताया था कि शहर में 663 पंजीकृत अस्पताल है, इसमें से 100 बेड वाले करीब 14 अस्पताल मौजूद है। प्रत्येक तीन साल में पंजीयन के नवीनीकरण के दौरान जांच की जाती है। नियम के उल्लंघन पर बाम्बे नर्सिग होम एक्ट 1959 के तहत कार्रवाई करने का प्रावधान है, लेकिन नियमित रूप से जांच में कोई भी नियम उल्लंघन नहीं मिला है। हालांकि छत्रपति चौक पर आर्थापेडिक चिकित्सक डॉ सतीश सोनार को बगैर अनुमति के ओपीडी में मरीज को भर्ती करने के मामले में कार्रवाई की गई है। डॉ दीपक सेलाेकार से शहर में सभी 663 अस्पतालों की जांच करने का आश्वासन दिया गया है।
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क्या हो रहे उल्लंघन
शहर में निजी अस्पतालों से पार्किग के साथ ही इमारत निर्माण और बगैर अनुमति के बेड संख्या बढ़ाकर नियमों का उल्लंघन होने का मुद्दा उठाया गया। मनपा के स्वास्थ्य विभाग से कोई भी जांच अथवा कार्रवाई नहीं हो रही है। अधिकतर अस्पतालों से पार्किग दिखाकर निर्माणकार्य की अनुमति ली गई, लेकिन बाद में पार्किग इलाके को मरीजों के लिए वेटिंग रूम, फार्मेसी, एम्बुलेंस कक्ष समेत अन्य इस्तेमाल लाया जा रहा है। अस्पताल में आनेवाले मरीजों को पार्किग के लिए समीप के रास्ते और सार्वजनिक इलाकों को इस्तेमाल करना पड़ रहा है। अस्पतालों में निर्धारित बेड संख्या को बढ़ाने, इलाज के नाम पर मनमर्जी शुल्क वसूल करने और अस्पतालों में इलाज की दर सूची गायब होने के साथ ही चिकित्सक की डिग्री और अस्पताल मान्यता के प्रमाणपत्र नहीं होने का मामला उठाया।
Created On :   21 Aug 2026 4:57 PM IST












