मामला गंभीर है: ट्विस्ट - छात्रावासों में घटिया भोजन का आरोप याचिका कर्ता पीछे हटा तो आगे बढ़ा हाईकोर्ट

ट्विस्ट - छात्रावासों में घटिया भोजन का आरोप याचिका कर्ता पीछे हटा तो आगे बढ़ा हाईकोर्ट
  • कोर्ट ने स्वत: संज्ञान याचिका की संभावना जांचने के दिए निर्देश
  • रिपोर्ट अब तक दाखिल नहीं

Nagpur News. मागासवर्गीय विद्यार्थियों के शासकीय छात्रावासों में घटिया, बासा और अस्वच्छ भोजन दिए जाने के आरोपों से जुड़े मामले में याचिकाकर्ता द्वारा जनहित याचिका वापस लेने की तैयारी किए जाने का मामला सामने आया है। हालांकि, प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने अदालत द्वारा स्वत: संज्ञान लेकर याचिका शुरू की जा सकती है या नहीं, इसकी कानूनी संभावना जांचने के निर्देश दिए हैं।

रिपोर्ट अब तक दाखिल नहीं

न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति रजनीश व्यास की खंडपीठ के समक्ष बुधवार को सुनवाई हुई। पिछली सुनवाई में अदालत ने राज्य सरकार से संबंधित छात्रावासों की मौजूदा स्थिति और वहां विद्यार्थियों को हो रही समस्याओं की जानकारी देने वाली रिपोर्ट मांगी थी। यह रिपोर्ट अब तक दाखिल नहीं की गई है। राज्य सरकार ने रिपोर्ट पेश करने के लिए एक सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा, जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया।

अब अदालत तय करेगी

सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि याचिकाकर्ता ने जनहित याचिका वापस लेने के लिए आवेदन किया है। खास बात यह रही कि याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे एड. अपूर्व डे को भी इस आवेदन की जानकारी नहीं थी। इस पर वकील और अदालत दोनों ने आश्चर्य जताया। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने एड. अपूर्व डे को यह जांचने के निर्देश दिए कि क्या हाईकोर्ट इस मामले में स्वत: संज्ञान लेकर याचिका शुरू कर सकता है। अगली सुनवाई में इसकी कानूनी स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया है। इसके बाद अदालत तय करेगी कि मामले में स्वत: संज्ञान लिया जाए या नहीं।

पूरा मामला यह है

भीम आर्मी सामाजिक संगठन के सदस्य और सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत मिलिंद बानसोड ने यह जनहित याचिका दायर की थी। इसमें नागपुर विभाग के करीब 25 शासकीय छात्रावासों और दो आवासीय स्कूलों में घटिया भोजन दिए जाने का आरोप लगाया गया है। याचिका में भोजन में कीड़े, लार्वा और सेफ्टी पिन मिलने, बासा चिकन तथा मिलावटी और पतला दूध दिए जाने की घटनाओं का उल्लेख है।

शासन के नियमों पर भी सवाल : 6 नवंबर 2023 के शासन निर्णय के अनुसार विद्यार्थियों को पौष्टिक भोजन, नाश्ता, फल, दो अंडे, सप्ताह में दो बार मांसाहार और 200 मिलीलीटर टेट्रा पैक दूध देना अनिवार्य है। याचिका में आरोप है कि इन नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। साथ ही छात्रावासों में आहार विशेषज्ञ की नियुक्ति, भोजन तालिका प्रदर्शित करने और भोजन की जांच के लिए समिति गठित करने के प्रावधानों पर भी सवाल उठाए गए हैं।

Created On :   20 Aug 2026 5:10 PM IST

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