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गंभीर संकट: अनिल देशमुख ने कहा - पानी के अभाव में विदर्भ का संतरा - मौसंबी बागान

Nagpur News. इस वर्ष मानसून के काफी देर से आने और लगातार पड़ रही भीषण गर्मी के कारण विदर्भ में सिंचाई का गंभीर संकट पैदा हो गया है। पानी की कमी से क्षेत्र की प्रमुख फसल संतरा और मौसंबी के बाग बड़े पैमाने पर सूखने लगे हैं। पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख ने राज्य सरकार से प्रभावित बागानों का सर्वे कराने तथा किसानों को प्रति एकड़ 50 हजार रुपए की तत्काल सहायता देने की मांग की है।
देशमुख ने कहा कि विदर्भ में हजारों किसान परिवारों की आजीविका संतरा और मौसंबी उत्पादन पर निर्भर है, लेकिन इस वर्ष बारिश नहीं होने से कुएं और बोरवेल सूख गए हैं। बागानों को पानी देना मुश्किल हो गया है, जिसके कारण हरे-भरे पेड़ सूखने लगे हैं और कई स्थानों पर पेड़ पूरी तरह नष्ट हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि वर्षों की मेहनत से तैयार किए गए बाग किसानों की आंखों के सामने बर्बाद हो रहे हैं। पहले तेज गर्मी से भूजल स्तर नीचे चला गया और अब मानसून में देरी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। ऐसे में बागानों को बचाना किसानों के लिए लगभग असंभव हो गया है।
देशमुख ने बताया कि संतरे के पेड़ एक बार सूख जाने पर उन्हें फिर से तैयार करने में कई वर्ष लग जाते हैं। यह केवल एक सीजन की फसल का नुकसान नहीं, बल्कि किसानों के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है। इसलिए सरकार को तत्काल हस्तक्षेप कर राहत उपाय शुरू करने चाहिए।
उन्होंने मांग की कि पानी के अभाव में सूख रहे संतरा और मौसंबी बागानों का पंचनामा कर किसानों को प्रति एकड़ 50 हजार रुपए की आर्थिक सहायता दी जाए। साथ ही चेतावनी दी कि यदि सरकार ने समय रहते स्थिति पर ध्यान नहीं दिया तो किसानों के साथ मिलकर व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा।
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विदर्भ में गहराया संतरा संकट, हजारों किसानों की आजीविका पर खतरा
विदर्भ देश के प्रमुख संतरा उत्पादक क्षेत्रों में शामिल है। नागपुर, काटोल, नरखेड़, सावनेर, अमरावती और वर्धा सहित कई इलाकों में बड़े पैमाने पर संतरा और मौसंबी की खेती होती है। इस वर्ष बारिश में देरी और लगातार बढ़ती गर्मी के कारण बागानों में पानी का संकट गहरा गया है।
किसानों के अनुसार कई क्षेत्रों में कुएं और बोरवेल पूरी तरह सूख चुके हैं। पर्याप्त सिंचाई नहीं मिलने से पेड़ों की पत्तियां झड़ने लगी हैं और फलधारण क्षमता प्रभावित हो रही है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही अच्छी बारिश नहीं हुई तो उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ निर्यात और बाजार आपूर्ति पर भी असर पड़ सकता है।
Created On :   19 Jun 2026 7:50 PM IST












