Nagpur News: सिकलसेल जागरूकता अभियान का ब्रांड एंबेसडर हार गया जिंदगी की जंग

सिकलसेल जागरूकता अभियान का ब्रांड एंबेसडर हार गया जिंदगी की जंग
बनाया था जीवन का मूल-मंत्र - मैंने जीना सीख लिया, अब दूसरों को जीना सिखाऊंगा

Nagpur News सिकलसेल जैसी असहनीय आनुवंशिक बीमारी से जूझते हुए भी जीवन को मुस्कुराकर जीने वाले 21 वर्षीय गिरीश डोंगरे का 31 मई 2026 को एम्स नागपुर में निधन हो गया। सिकलसेल जैसी गंभीर अनुवांशिक बीमारी के साथ जन्मे गिरीश का हर दिन संघर्ष से भरा था। असहनीय पीड़ा, बार-बार अस्पतालों के चक्कर और सामान्य बच्चों जैसी जिंदगी न जी पाने की कसक उसके जीवन का हिस्सा थी।

सामान्य जीवन न जी पाने की पीड़ा : 5 जुलाई 2004 को जन्मे गिरीश को ढाई वर्ष की उम्र में सिकलसेल (एसएस) होने का पता चला। पिता गौतम डोंगरे और मां पद्मा दोनों सिकलसेल एएस (कैरियर) हैं। बचपन से ही हर दो-तीन महीने में उसे असहनीय दर्द का सामना करना पड़ता था। हाइड्रॉक्सीयूरिया दवा शुरू होने से दर्द के दौरों के बीच का अंतर कुछ बढ़ा, लेकिन संघर्ष कभी खत्म नहीं हुआ। बीमारी ने उससे सामान्य जीवन जीने का अवसर छीन लिया, लेकिन उसने अपनी दुनिया रंगों और कैनवास में तलाश ली। घर पर रहकर उसने चित्रकला सीखी और जल्द ही उत्कृष्ट पोर्ट्रेट कलाकार बन गया। उसकी बनाई तस्वीरें इतनी जीवंत होती थीं कि वह देश की कई प्रमुख हस्तियों को उनके पोर्ट्रेट भेंट करता था।

मजबूत इरादों के सामने बीमारी पड़ गई छोटी : दसवीं कक्षा के बाद उसने मुंबई के प्रतिष्ठित जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट में पढ़ने का सपना देखा। 2023 में प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण कर बीएफए में दाखिला हासिल किया। वर्ष 2025 में गोवा सरकार ने उसे सिकलसेल जागरूकता अभियान का ब्रांड एंबेसडर बनाया। इसी वर्ष वह वर्ल्ड सिकलसेल काउंसिल का सदस्य भी बना। वह मरीजों को सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और बीमारी के साथ सामान्य जीवन जीने की प्रेरणा देता था। उसका एक ही संदेश था-‘मैंने जीना सीख लिया है, अब दूसरों को जीना सिखाऊंगा।’

31 मई को हुई मौत : 28 मई 2026 की रात उसे सिकलसेल का गंभीर दर्द उठा। पहले मेडिकल अस्पताल और फिर एम्स नागपुर में उपचार चला, लेकिन 31 मई को वह जिंदगी की जंग हार गया। उसके निधन के 15 दिन बाद उसके मित्र ने घर पहुंचकर बताया कि वह बीएफए तृतीय वर्ष की परीक्षा उत्तीर्ण कर चुका है। गिरीश को दो बहनें हैं। एक बारहवीं में और दूसरी ग्यारहवीं में पड़ रही है। गिरीश की मां पद्मा मेडिकल में नर्स है। गिरीश के पिता गौतम नेशनल अलायंस ऑफ सिकलसेल आर्गनाइजेशन (नैस्को) के सचिव हैं।

नागपुर में 3,000 सिकलसेल मरीज : नागपुर में लगभग 3,000 सिकलसेल मरीज हैं, जबकि मेडिकल और डागा अस्पताल में हर वर्ष 5,000 से अधिक मरीज हाइड्रॉक्सीयूरिया दवा लेने पहुंचते हैं। 20 से 25 वर्ष आयु वर्ग के 40 से अधिक युवा हर साल इस बीमारी से दम तोड़ देते हैं।

Created On :   19 Jun 2026 1:01 PM IST

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