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Nagpur News: 31 हजार निवेशकों से 15.58 करोड़ रुपए की ठगी, पंजाब से कंपनी का मालिक गिरफ्तार

Nagpur News ऑनलाइन कॉन्फ्रेंस के माध्यम से फर्जी कंपनी बनाकर हजारों लोगों को निवेश का लालच देने वाले एक बड़े ठगी रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। सीएलबीपी सिस्टम प्रा. लिमिटेड नामक कंपनी ने "फ्यूचर डिजिटल एसेट’ योजना के जरिए देशभर में लोगों से करोड़ों रुपए की जमा राशि जुटाई और उन्हें भारी मुनाफे का सपना दिखाकर अपने जाल में फंसाया। इस मामले में पांचपावली पुलिस और आर्थिक अपराध शाखा ने संयुक्त कार्रवाई कर नागपुर के स्थानीय एजेंट और पंजाब स्थित कंपनी के मुख्य मालिक सहित दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
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पुलिस ने 2.10 करोड़ रुपए किए फ्रीज : पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ठगों के 5 बैंक खातों और कई डिजिटल वॉलेट को ब्लॉक करवाकर करीब 2.10 करोड़ रुपए की राशि फ्रीज कर दी है। पुलिस भवन में आयोजित एक पत्र परिषद के दौरान पुलिस आयुक्त डॉ. रवींद्रकुमार सिंगल ने इस पूरे घोटाले की जानकारी दी। इस अवसर पर क्राइम ब्रांच के उपायुक्त दीपक अग्रवाल भी उपस्थित थे। पुलिस आयुक्त ने बताया कि, गिरफ्तार आरोपियों में कंपनी का मालिक राकेशकुमार मोहनलाल गर्ग उर्फ राकेश अग्रवाल (48), निवासी चंडीगढ़, पंजाब और नागपुर का मुख्य एजेंट मेहुल शिवाजी दीक्षित (46), निवासी जरीपटका शामिल हैं। दोनों आरोपी फिलहाल 22 जून तक पुलिस रिमांड पर हैं।
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इंदौरा के रजत टॉवर से चल रहा था खेल : पुलिस आयुक्त डॉ. सिंगल ने बताया कि, इस नेटवर्क की सबसे मजबूत पकड़ नागपुर में थी। कंपनी की वेबसाइट पर कुल 10.24 लाख से अधिक सदस्यों के पंजीकरण दर्शाए गए थे, जिनमें से अकेले नागपुर के करीब 30 हजार सदस्य इस नेटवर्क से जुड़े हुए थे। अब तक नागपुर के 600 से अधिक नागरिक इस फर्जी स्कीम में 5 करोड़ रुपए से ज्यादा का निवेश कर चुके हैं। आरोपी इंदौरा चौक स्थित रजत टॉवर में अपना कार्यालय चला रहे थे, जहां से "फ्री क्वाइन’ और "मर्चेंट क्वाइन’ का यह पूरा खेल चल रहा था। कंपनी पंजीकरण के समय प्रत्येक निवेशक से कम से कम 5 हजार रुपए की राशि वसूलती थी। जांच में सामने आया है कि, देशभर के कुल 31,117 निवेशक इस जालसाजी का शिकार हुए हैं, जिन्होंने अब तक 15.58 करोड़ रुपए से अधिक का निवेश किया है।
ऐसे खुली पोल : इस घोटाले की पोल तब खुली जब रामनगर, अंबाझरी निवासी रीमा रंजन घोष (50) ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। रीमा के घर काम करने वाली महिला ने अपने पति मेहुल दीक्षित से उनका परिचय कराया था। मेहुल ने रजत टॉवर स्थित ऑफिस में रीमा को झांसा दिया कि, कंपनी के ऐप में मुफ्त सदस्यता लेने पर 100 दिनों तक 12,500 रुपए मिलेंगे और बाद में 25 नए निवेशक जोड़ने पर हर महीने 1 लाख रुपए से अधिक की कमाई होगी।
वॉलेट में दिखता था फर्जी बैलेंस : कंपनी के फर्जी दस्तावेज और वेबसाइट देखकर रीमा को भरोसा हो गया। उन्होंने खुद 2.25 लाख रुपए निवेश किए और अपने साथ 25 अन्य लोगों को भी जोड़ा। मेहुल ने उन्हें ‘मर्चेंट कॉइन' खरीदने की सलाह देते हुए कहा था कि, भविष्य में इसकी कीमत 1 लाख रुपए तक पहुंच जाएगी। ऐप के डिजिटल वॉलेट में रीमा को लाखों रुपए का बैलेंस तो दिखाई देता रहा, लेकिन जब उन्होंने रकम निकालने का प्रयास किया, तो भुगतान नहीं हुआ। पूछताछ करने पर आरोपी नए-नए नियम बताकर टालमटोल करने लगे। ठगी का अहसास होने पर रीमा ने शिकायत दर्ज कराई। नागपुर के ऐसे ही 26 पीड़ित अब तक सामने आ चुके हैं जिनसे 5.40 लाख की ठगी हुई है। पुलिस ने आरोपियों के पास से लैपटॉप, मोबाइल और अन्य डिजिटल उपकरण जब्त किए हैं और आर्थिक अपराध शाखा पूरे नेटवर्क की गहनता से जांच कर रही है।
Created On :   19 Jun 2026 12:01 PM IST












