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Nagpur News: बच्चों में अकेलापन, असुरक्षा और भविष्य को लेकर चिंता

Nagpur News शहर में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर एक सराहनीय पहल शुरु की गई है। नागपुर के शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय व अस्पताल (मेडिकल) के डॉक्टरों की टीम ने मनोचिकित्सकों और मनोवैज्ञानिकों के साथ मिलकर एक शेल्टर होम का दौरा किया। इस दौरे का उद्देश्य वहां रह रहे बच्चों और किशोरों की मानसिक स्थिति का आकलन करना और उन्हें आवश्यक मनोवैज्ञानिक सहायता उपलब्ध कराना था।
शेल्टर होम में पारिवारिक वातावरण की कमी : टीम ने बच्चों से बातचीत कर उनकी भावनात्मक स्थिति, व्यवहारिक चुनौतियों और मानसिक तनाव के स्तर को समझने का प्रयास किया। कई बच्चों में अकेलापन, असुरक्षा, भय और भविष्य को लेकर चिंता जैसी समस्याएं सामने आईं। विशेषज्ञों ने इन समस्याओं के समाधान के लिए काउंसलिंग, भावनात्मक समर्थन और नियमित फॉलोअप की आवश्यकता बताई। डॉक्टरों के अनुसार, शेल्टर होम में रहने वाले बच्चों को पारिवारिक वातावरण की कमी, सामाजिक असुरक्षा और पूर्व में झेले गए मानसिक आघात (ट्रॉमा) के कारण विशेष मानसिक देखभाल की जरूरत होती है। ऐसे में समय-समय पर इस तरह के दौरे और काउंसलिंग सत्र बेहद जरूरी बताए गए हैं।
मनोचिकित्सा और मनोविज्ञान के समन्वय पर जोर : इस पहल को आगे बढ़ाते हुए 7 अप्रैल को विश्व स्वास्थ्य दिवस पर एक विशेष सत्र आयोजित किया जाएगा। इस सत्र में मानसिक स्वास्थ्य के समग्र (होलिस्टिक) दृष्टिकोण को अपनाते हुए मनोचिकित्सा और मनोविज्ञान दोनों के समन्वय पर विशेष जोर दिया जाएगा। सत्र में बच्चों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ उन्हें तनाव से निपटने, भावनाओं को व्यक्त करने और सकारात्मक सोच विकसित करने के तरीके सिखाए जाएंगे। विशेषज्ञों द्वारा इंटरएक्टिव गतिविधियों और ओपन डिस्कशन के माध्यम से बच्चों को सहज माहौल प्रदान किया जाएगा।
मनोरंजन आधारित थेरेपी पर रहेगा फोकस : कार्यक्रम के तहत एक विशेष सत्र मनोरंजन और उपचारात्मक गतिविधियों पर केंद्रित होगा। यह सत्र मनोवैज्ञानिक तानिया भागेश्वर द्वारा संचालित किया जाएगा। इस सत्र में खेल, आर्ट, म्यूजिक, ग्रुप एक्टिविटी और एक्सप्रेसिव तकनीकों के माध्यम से बच्चों को मानसिक रूप से मजबूत बनाने की कोशिश की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की गतिविधियां बच्चों को अपनी भावनाएं खुलकर व्यक्त करने का अवसर देती हैं और उनके भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती हैं। मेडिकल की टीम केवल एक बार के दौरे तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि इस पहल को दीर्घकालिक रूप से जारी रखने की योजना बना रही है। इसके तहत नियमित काउंसलिंग, फॉलोअप विजिट, और जरूरत पड़ने पर मेडिकल हस्तक्षेप भी शामिल रहेगा।
मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने से बेहतर भविष्य : विशेषज्ञों के अनुसार यदि समय रहते बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान दिया जाए, तो उनके भविष्य को बेहतर दिशा दी जा सकती है। इस तरह की पहल न केवल बच्चों के मानसिक तनाव को कम करती है, बल्कि उनके आत्मविश्वास, सामाजिक व्यवहार और जीवन के प्रति दृष्टिकोण में भी सकारात्मक बदलाव लाती है। यह पहल समाज के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश देती है कि मानसिक स्वास्थ्य उतना ही जरूरी है जितना शारीरिक स्वास्थ्य। खासकर कमजोर और संवेदनशील वर्गों के लिए सामूहिक प्रयास और संवेदनशीलता बेहद आवश्यक है।
Created On :   4 April 2026 7:10 PM IST















