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Nagpur News: ट्रंप के 200% टैरिफ प्लान से नागपुर का 6,299 करोड़ का फार्मा निर्यात दबाव में

Nagpur News अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की जेनेरिक दवाओं पर घोषित नई टैरिफ नीति का असर देश के साथ नागपुर के फार्मा उद्योग पर भी पड़ सकता है। वित्त वर्ष 2025-26 में नागपुर से 20,311 करोड़* का कुल निर्यात हुआ, जिसमें 6,299 करोड़ का निर्यात केवल फार्मास्यूटिकल सेक्टर का रहा। इनमें से लगभग 31% दवाएं अमेरिकी बाजार में भेजी गईं। ऐसे में यदि 2028 के बाद अमेरिका जेनेरिक दवाओं पर 100% और फिर 200% तक आयात शुल्क लागू करता है तो नागपुर के दवा निर्यातकों के सामने प्रतिस्पर्धा बनाए रखना बड़ी चुनौती होगी।
हालांकि ट्रंप प्रशासन ने 1 अगस्त 2026 से अगले दो वर्षों तक जेनेरिक दवाओं पर 0% टैरिफ रखने का फैसला किया है। इससे भारतीय कंपनियों को तत्काल राहत मिली है। लेकिन यह राहत केवल तैयारी के लिए है। इसके बाद शुल्क बढ़ने की स्थिति में भारतीय कंपनियों को या तो अमेरिका में उत्पादन इकाइयां स्थापित करनी होंगी या भारी शुल्क देकर निर्यात जारी रखना होगा।
नागपुर फार्मा निर्यात का बड़ा केंद्र : नागपुर विदर्भ का सबसे बड़ा फार्मा निर्यात केंद्र बन चुका है। बुटीबोरी, हिंगना, कलमना, एमआईडीसी और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में दवा निर्माण, , इंजेक्शन, टैबलेट, कैप्सूल और न्यूट्रास्यूटिकल उत्पाद बनाने वाली कई कंपनियां कार्यरत हैं। इनकी बड़ी निर्भरता अमेरिका सहित विकसित देशों के बाजार पर है। अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा जेनेरिक दवा बाजार है और भारतीय कंपनियों की कमाई का बड़ा हिस्सा वहीं से आता है। ऐसे में यदि आयात शुल्क 100% या 200% तक पहुंचता है तो भारतीय उत्पादों की कीमत अमेरिकी बाजार में काफी बढ़ जाएगी। इससे अमेरिकी खरीदार स्थानीय या अमेरिका में उत्पादन करने वाली कंपनियों को प्राथमिकता दे सकते हैं।
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नागपुर के उद्योग पर क्या होगा असर? : विशेषज्ञों के अनुसार यदि टैरिफ लागू होता है तो सबसे पहले निर्यात लागत बढ़ेगी। कंपनियों का मार्जिन घटेगा और नए ऑर्डर मिलने में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। छोटे और मध्यम स्तर के निर्यातकों पर इसका असर सबसे अधिक पड़ सकता है क्योंकि उनके लिए अमेरिका में अलग से उत्पादन इकाई स्थापित करना आसान नहीं होगा। यदि बड़ी कंपनियां अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग शिफ्ट करती हैं तो भविष्य में भारत से तैयार दवाओं के निर्यात में कमी भी आ सकती है। इसका असर नागपुर के उत्पादन, रोजगार और सप्लाई चेन पर भी दिखाई दे सकता है।
टैरिफ से भविष्य में कई चुनौतियां : ट्रंप प्रशासन ने दो वर्ष का ट्रांजिशन पीरियड इसलिए दिया है ताकि विदेशी कंपनियां अमेरिका में निवेश कर सकें। यानी 2028 तक भारतीय कंपनियां मौजूदा व्यवस्था में निर्यात जारी रख सकेंगी। इसी अवधि में कंपनियां अपनी नई रणनीति तैयार करेंगी। यदि भारत और अमेरिका के बीच किसी व्यापार समझौते के तहत फार्मा सेक्टर को विशेष छूट मिलती है तो प्रभाव कम हो सकता है। लेकिन यदि ऐसा नहीं हुआ तो 2028 के बाद स्थिति बदल सकती है।
फार्मा उद्योग से जुड़े जानकारों का मानना है कि यह फैसला तत्काल झटका नहीं बल्कि भविष्य की चेतावनी है। अगले दो वर्ष भारतीय कंपनियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण होंगे। यदि कंपनियां अमेरिका में निवेश, स्थानीय साझेदारी या वैकल्पिक बाजार विकसित नहीं करतीं तो 2028 के बाद निर्यात प्रभावित हो सकता है। नागपुर का फार्मा उद्योग पिछले कुछ वर्षों में तेजी से निर्यात आधारित हुआ है। शहर के कुल निर्यात में फार्मा की हिस्सेदारी लगभग 31% है। ऐसे में अमेरिकी बाजार में किसी भी बड़े नीति परिवर्तन का असर केवल कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उत्पादन, रोजगार, लॉजिस्टिक्स, पैकेजिंग, परिवहन और निर्यात से जुड़े पूरे इकोसिस्टम पर पड़ेगा।
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Created On :   22 July 2026 3:48 PM IST












