अदालत: ट्रायल रूम में नाबालिग छात्रा का गुप्त वीडियो बनाने वाले को तीन साल की सजा, निजता से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं

ट्रायल रूम में नाबालिग छात्रा का गुप्त वीडियो बनाने वाले को तीन साल की सजा, निजता से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं
  • पोक्सो और आईटी एक्ट के तहत दोषी करार
  • अदालत ने कहा- महिलाओं की निजता से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं
  • यूनिफॉर्म की खरीदारी के दौरान की थी शर्मनाक हरकत
  • महिलाओं की सुरक्षा पर अदालत का सख्त संदेश

Nagpur News. ट्रायल रूम में कपड़े बदल रही नाबालिग छात्रा का चोरी-छिपे मोबाइल से वीडियो बनाना एक युवक को भारी पड़ गया। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने मामले को गंभीर मानते हुए आरोपी को तीन वर्ष के सश्रम कारावास और चार हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। न्यायालय ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि महिलाओं और बालिकाओं की निजता का उल्लंघन करने वाले ऐसे अपराधियों के प्रति किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश पी. जे. मोडक की अदालत ने सोमवार को यह फैसला सुनाया।

दोषी ठहराए गए आरोपी की पहचान निखिल उर्फ पिंटू दीपक चौथमल (27), निवासी पांचपावली, के रूप में हुई है। अदालत ने उसे भारतीय न्याय संहिता की धारा 354(क), पोक्सो अधिनियम की धारा 12 तथा सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम की धारा 66(ई) के तहत दोषी ठहराया। जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में उसे तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

यूनिफॉर्म की खरीदारी के दौरान की थी शर्मनाक हरकत

अभियोजन के अनुसार, 10 अगस्त 2019 की शाम 17 वर्षीय छात्रा अपनी सहेली के साथ सीताबर्डी मार्केट स्थित 'फ्रेंड्स' शोरूम में स्कूल यूनिफॉर्म खरीदने गई थी। छात्रा ट्रायल रूम में कपड़े बदल रही थी। इसी दौरान आरोपी ने मोबाइल फोन के जरिए उसका गुप्त और आपत्तिजनक वीडियो बना लिया। इस घटना से छात्रा की निजता और सम्मान को ठेस पहुंची।

तकनीकी साक्ष्यों से साबित हुआ अपराध

पीड़िता की शिकायत के बाद सीताबर्डी पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया। तत्कालीन जांच अधिकारी सहायक पुलिस निरीक्षक शुभदा संखे ने तकनीकी और परिस्थितिजन्य साक्ष्य एकत्र कर न्यायालय में मजबूत आरोपपत्र प्रस्तुत किया। सुनवाई के दौरान गवाहों के बयान और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी माना।

सरकारी पक्ष की ओर से अधिवक्ता आसावरी परसोडकर ने प्रभावी पैरवी की, जबकि बचाव पक्ष का प्रतिनिधित्व अधिवक्ता वाई. बी. मंडपे ने किया। कोर्ट पैरवी अधिकारी किरण कैथल और मीनल लोणारे ने भी न्यायिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

महिलाओं की सुरक्षा पर अदालत का सख्त संदेश

अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि ट्रायल रूम, सार्वजनिक स्थानों या किसी भी निजी स्थान पर महिलाओं और बालिकाओं का गुप्त वीडियो बनाना, छेड़छाड़ करना या उनकी निजता का उल्लंघन करना गंभीर अपराध है। ऐसे मामलों में कानून सख्ती से कार्रवाई करेगा और दोषियों को कठोर दंड भुगतना पड़ेगा।

Created On :   21 July 2026 10:13 PM IST

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