जैव-विविधता का हॉटस्पॉट बना नागपुर: दिखे दो दुर्लभ मेहमान पतंगे, भारत में पहली बार मिली चीन और श्रीलंका में नजर आने वाली प्रजातियां, खोज को अंतरराष्ट्रीय पत्रिका की मान्यता

दिखे दो दुर्लभ मेहमान पतंगे, भारत में पहली बार मिली चीन और श्रीलंका में नजर आने वाली प्रजातियां, खोज को अंतरराष्ट्रीय पत्रिका की मान्यता
  • अब तक चीन और श्रीलंका समेत चुनिंदा एशियाई देशों में ही थी मौजूदगी की जानकारी
  • एक प्रजाति Strotihypera microplanga और दूसरी Sarbanisa subplava है

Nagpur News. रात में रोशनी के इर्द-गिर्द मंडराने वाले पतंगों के बीच शोधकर्ताओं को ऐसे दो दुर्लभ मेहमान मिले हैं, जिनकी मौजूदगी भारत में अब तक दर्ज ही नहीं हुई थी। खास बात यह है कि इन दोनों प्रजातियों के रिकॉर्ड अब तक एशिया के चुनिंदा देशों तक ही सीमित थे। नागपुर के शोधकर्ता राहुल बबनराव भेंडे ने वर्ष 2025 और 2026 में इन दोनों प्रजातियों की मौजूदगी दर्ज की। उनके शोध को अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका बायोनोट्स ने 15 अगस्त को प्रकाशित कर प्रमाणित किया है।

इनमें एक प्रजाति Strotihypera microplanga और दूसरी Sarbanisa subplava है। दोनों नॉक्टुइड (Noctuidae) कुल से संबंधित हैं। इनकी मौजूदगी सामने आने से मध्य भारत में पतंगों की विविधता और उनके भौगोलिक विस्तार को लेकर नई जानकारी सामने आई है।

250 वॉट की रोशनी में मिला पहला ‘दुर्लभ मेहमान’

राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय के प्राणीशास्त्र पीजी विभाग के सर्वेक्षण के दौरान 28 जनवरी 2026 को विश्वविद्यालय परिसर में यह महत्वपूर्ण खोज हुई। राहुल भेंडे ने 250 वॉट के मरकरी-वापर लाइट ट्रैप की मदद से Strotihypera microplanga के पांच नमूने प्राप्त किए।


प्रौढ़ पतंगों के बाहरी शारीरिक लक्षणों के साथ नर-मादा के जननांगों की सूक्ष्म जांच की गई। इसके आधार पर प्रजाति की पहचान की पुष्टि हुई। शोधकर्ताओं के मुताबिक, यह भारत में इस प्रजाति का पहला रिकॉर्ड है।

चीन-श्रीलंका से सीधे नागपुर तक पहुंचा दायरा

Strotihypera microplanga इससे पहले श्रीलंका, थाईलैंड, दक्षिण-पश्चिम चीन, ताइवान और फिलीपींस जैसे दक्षिण-पूर्वी एवं पूर्वी एशियाई क्षेत्रों में दर्ज की जा चुकी थी। नागपुर में करीब 356 मीटर की ऊंचाई पर इसकी मौजूदगी मिलने से इसके भौगोलिक और ऊंचाई आधारित वितरण को लेकर महत्वपूर्ण नई जानकारी मिली है।

इस खोज के बाद Strotihypera वंश का ज्ञात विस्तार दक्कन के पठार तक पहुंच गया है। इससे पहले भारत में इस वंश का प्रमुख प्रतिनिधित्व Strotihypera semiochrea के रूप में माना जाता था, जो विशेष रूप से पूर्वोत्तर भारत की मेघालय की खासी पहाड़ियों में पाई जाती है।

दूसरी प्रजाति इतनी तेज कि नमूना लेना हुआ मुश्किल

  • सर्वेक्षण में दूसरी महत्वपूर्ण खोज Sarbanisa subplava की हुई। जुलाई से सितंबर 2025 के बीच दिन में सक्रिय पतंगों के सर्वेक्षण के दौरान इस प्रजाति के तीन वयस्क देखे गए।
  • यह पतंगा बेहद तेज उड़ान भर रही थी। यही वजह रही कि शोधकर्ता इसके नमूने संकलित नहीं कर सके। हालांकि, इसके बाहरी शारीरिक लक्षणों के आधार पर पहचान संभव हुई।
  • शोध के अनुसार, Sarbanisa subplava की मौजूदगी भी भारत में पहली बार दर्ज की गई है। इस खोज ने नागपुर और मध्य भारत की पतंगा जैव-विविधता को लेकर शोध की नई संभावनाएं खोल दी हैं।

नागपुर बना नई जैव-विविधता का ‘हॉटस्पॉट’

दोनों प्रजातियों की पहली भारतीय रिकॉर्डिंग केवल दुर्लभ पतंगों की सूची में इजाफा नहीं है, बल्कि यह इस बात का संकेत भी है कि नागपुर और मध्य भारत में पतंगों की जैव-विविधता अभी पूरी तरह सामने नहीं आई है। शोधकर्ताओं के लिए यहां के जंगल, विश्वविद्यालय परिसर और शहरी हरित क्षेत्र आगे भी कई अनदेखी प्रजातियों का ‘ठिकाना’ साबित हो सकते हैं।

Created On :   17 Aug 2026 9:55 PM IST

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